पलायनवादी कौन ?

क्या गौतम बुद्ध पलायनवादी थे ??

यदि बुद्ध पलायनवादी थे, तो वे सभी पलायनवादी ही हैं जो घर छोड़कर होस्टल में रह रहे हैं शिक्षा प्राप्त करने के लिए | वे सभी पलायनवादी ही हैं जो अपनी पत्नी-बच्चों को छोड़कर विदेशों में पड़े हुए हैं चंद रुपयों के लिए |

लोग बुद्ध को पलायनवादी मानते हैं क्योंकि वे लौटकर वापस साधारण मानव नहीं बने, गृहस्थ नहीं हुए | लेकिन हम बाकी किसी को पलायन वादी नहीं मानते, चाहे फिर वह विदेशी नागरिकता लेकर विदेश में ही सेटल हो जाए, अपने बीबी बच्चों को भूल जाए और नई दुनिया बसा ले |

पलायनवादी बुद्ध नहीं, वे लोग हैं, जो गाँवों से निकलते हैं शिक्षा के लिए और भूल जाते हैं गाँवों को | पलायनवादी वे लोग हैं जो शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं और भूल जाते हैं अपने देश को | पलायनवादी वे लोग हैं जो अपनी भूमि, अपने खेतों को उन्नत बनाने के लिए शिक्षित नहीं होते, बल्कि नौकरी पाने के लिए डिग्रियाँ बटोरते हैं | पलायनवादी वे लोग हैं जिन्हें किसानों, आदिवासियों की दुर्दशा नहीं दिखाई देती, लेकिन मंदिर-मस्जिद, हिन्दू-मुस्लिम जैसे खेलों में मस्त हैं |

जो मंदिर-मस्जिद के लिए लड़ रहे हैं यह जानते हुए भी उनसे न तो ग्रामीणों का कोई हित होना है, न ही गाँवों का कोई हित होना है, न ही किसानों का कोई हित होना है, न ही आदिवासियों का कोई हित होना है, न ही बेरोजगारों का कोई हित होना है…केवल राजनीतिज्ञों और कुछ पण्डे-मौलवियों का ही भला होगा |

ये हिन्दू-मुस्लिम, सवर्ण-दलित, कांग्रेसी-भाजपाई, संघी-मुसंघी, वामपंथी-दक्षिणपंथी, मोदीवादी, आंबेडकरवादी, मंदिर-मस्जिद…जैसे खेल बिलकुल वैसे ही हैं, जैसा क्रिकेट, दारु और स्मैक | नशा बहुत है इन खेलों में लेकिन दर्शकों को लाभ कुछ नहीं | हाँ आयोजकों को बहुत लाभ होता है जैसे भारतीय क्रिकेट बोर्ड सबसे अमीर बोर्ड बन गया, जैसे भाजपा ने 8000 करोड़ का ऑफिस बना लिया, जैसे भारत के कई मंदिर सबसे अमीर मंदिरों में गिने जाने लगे |

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और ऐसे खेलों में मस्त लोग ही पलायनवादी हैं क्योंकि ये समस्याओं को सुलझाने के उपाय नहीं खोज रहे, ये समस्याओं से भाग रहे हैं और साम्प्रदायिकता व जातिवाद के नशे में धुत्त होकर यह समझ रहे हैं कि समस्याओं से मुक्ति पा ली |
~विशुद्ध चैतन्य

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