क्षत्रियों में भी कायर होते हैं और ब्राहमणों में भी शूद्र होते हैं

भाषा की खबर के अनुसार, प्रदर्शनकारियों में से एक ने कहा, ‘हम डायरी और कैलेंडर में मोदीजी की तस्वीर शामिल करने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन गांधीजी की तस्वीर नहीं पाकर हम दुखी हैं। हम सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि क्यों गांधीजी को यहां स्थान नहीं दिया गया है। क्या गांधीजी खादी उद्योग के लिए अब प्रासंगिक नहीं रहे।’


प्रदर्शनकारियों ने गांधीजी की तस्वीरों के साथ फिर से कैलेंडर प्रकाशित करने की मांग की। आयोग के एक
वरिष्ठ अधिकारी ने हालांकि, इस मुद्दे को तरजीह नहीं दी।

आयोग के कर्मचारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा, ‘सरकार की ओर से इस तरह महात्मा गांधी के दर्शन, विचारों और आदर्शों को खारिज किए जाने से हम दुखी हैं। पिछले साल ऐसा पहला प्रयास किया गया था, जब कैलेंडर में पीएम मोदी की तस्वीर छापा गया।’ 2016 के कैलेंडर में पीएम मोदी की तस्वीर छापे जाने के मुद्दे को आयोग की स्टाफ यूनियंस ने उठाया था। इस पर मैनेजमेंट की ओर से भविष्य में ऐसा न होने का आश्वासन दिया गया था।

उपरोक्त समाचार आप सभी ने पढ़ी होगी और सामान्य सी प्रतिक्रिया रही होगी कि गलत हुआ जो हुआ | या तस्वीर ही तो लगाईं है कौन सा पहाड़ टूट गया…. |

लेकिन मैं इस घटना को सामान्य रूप में नहीं ले सकता क्योंकि मेरी आदत नहीं है गलत को देखकर आँख मूँद लेने की | वह इसलिए क्योंकि मेरे खून में क्षत्रिय वंश का खून दौड़ता है और क्षत्रिय यदि सही मार्ग पर हों, तो कभी भी अधर्म या गलत को देखकर आँखें बंद नहीं कर सकते |

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अब क्षत्रिय शब्द का प्रयोग कर ही लिया है तो आइये फिर से वर्णों की चर्चा करते हैं और समझते हैं कि इस घटना को कि यह अनदेखा किया जाने वाला है या नहीं |

चार वर्णों में शूद्र सबसे निकृष्ट वर्ण माना गया है क्योंकि शूद्रों में विवेक नहीं होता, स्वाभिमान नहीं होता | उनमें स्वयं कोई निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती और भीरु प्रवृति के होते हैं | इसलिए शूद्रों को सेवक के रूप में ही रखा जाता है | शूद्र अच्छे सेवक हो सकते हैं, अच्छे नौकर हो सकते हैं लेकिन जहाँ स्वतंत्र रूप से कोई निर्णय करना हो तो इनके लिए यह बहुत ही कठिन कार्य हो जाता है | इसलिए शूद्र प्रवृति के लोग किसी न किसी का अनुयाई होने में गौरवान्वित होते हैं | जबकि बाकी तीनो वर्ण स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम होते हैं, कठिन परिस्थिति में भी विचलित नहीं होते और समाज को न केवल सुरक्षा, ज्ञान व सुख सुविधाएं उपलब्ध करवाते हैं, बल्कि सदैव नित नए की खोज में लगे रहते हैं |

अब आप लोग उलझ गये होंगे यह सब पढ़कर… स्वाभाविक ही है क्योंकि वर्ण व्यवस्था को आप लोगों ने जाति व्यवस्था में परिवर्तित कर लिया है | अब कोई मुर्ख भी खुद को ब्राहमण कह लेता है, कोई कायर भी खुद को क्षत्रिय कह लेता है, कोई शूद्र भी परचून की दूकान खोलकर खुद को वैश्य कह लेता है |

ब्राहमण वह व्यक्ति होता है जो ज्ञान का प्रकाश लिए चलता है, ब्रह्म में रमण करता है और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के समस्त प्राणियों के साथ मैत्री पूर्ण व्यव्हार रखता है | नविन खोज करता है, समाज को नवीन ज्ञान से परिचित करवाता है और शिक्षा को व्यापार नहीं बनाता |

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क्षत्रिय वे लोग होते हैं जो सुरक्षा व अन्याय के विरुद्ध सदैव खड़े होते हैं बिना कोई भेदभाव किये | जैसे राणा प्रताप, जैसे रानी लक्ष्मी बाई आदि | जब कोई भी अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस नहीं कर पाते, तब क्षत्रिय और ब्राह्मण ही हैं जो निर्भीकता से आवाज उठाते हैं जैसे चाणक्य और चन्द्रगुप्त |

वैश्य वे लोग होते हैं जो स्वाभाव से ही व्यापारी होते हैं | गणित आदि में रूचि रखते हैं, देश विदेश घुमने का शौक रखते हैं और जो अपने राज्य या देश में उपलप्ध न हो, उसे विदेश से लाकर बेचते हैं |

शूद्र को उपरोक्त में से किसी में कोई रूचि नहीं होती, उन्हें तो बस नौकरी करनी होती है | वे पढाई भी करते हैं तो ज्ञान पाने के लिए नहीं, बल्कि नौकरी पाने के लिए करते हैं | इनको विरोध करने के लिए भी नेतृत्व की आवश्यकता होती है | अच्छा काम भी करना हो तो नेतृत्व की आवश्यकता होती है | ऐसे लोग यदि विरोध भी करेंगे तो स्वयं को बचाकर विरोध करेंगे | ये लोग यदि किसी के अनुयाई भी होंगे तो केवल व्यक्तिगत स्वार्थ को प्राथमिकता देंगे | यदि ये लोग गाँधी के अनुयाई भी होंगे तो गांधी जी के आदर्शों को अपने जीवन में नहीं उतार पाएंगे, बल्कि उनकी खोल में खुद को ढँक कर गाँधीवादी होने का ढोंग करेंगे | इनको कोई फर्क नहीं पड़ेगा यदि कोई गाँधी की जगह खुद को रख दे.. उपरोक्त समाचार से आप समझ सकते हैं कि शूद्र कैसे होते हैं | लेकिन क्षत्रिय, ब्राहमण वैश्य ऐसा व्यव्हार बिलकुल भी सहन नहीं करेंगे |

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लेकिन धूर्तों ने वर्ण व्यवस्था को बड़ी चतुराई से जातिवाद में बदल दिया और शूद्र बना दिया दलितों को | जबकि शूद्र हों या ब्राहमण हों या क्षत्रिय या वैश्य सभी वर्णों में पाए जाते हैं || क्षत्रियों में भी कायर होते हैं और ब्राहमणों में भी शूद्र होते हैं | वर्तमान में वे सभी शूद्र ही हैं जो गलत का विरोध करने की क्षमता खो चुके हैं | वे सभी शूद्र ही हैं जो मन मारकर नौकरी करते हैं, दुनिया भर का अपमान सहते हैं, लेकिन आत्मनिर्भर होने के लिए कोई स्वरोजगार नहीं अपनाते | आशा करता हूँ आप मेरी बातें समझ पा रहे होंगे | ~विशुद्ध चैतन्य

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