भारत एक सनातनधर्मी राष्ट्र था, है और रहेगा

जब भी सनातन धर्म की बात होती है, तो लोग समझते हैं कि हिन्दू-धर्म का ही दूसरा नाम सनातन धर्म है | जबकि दोनों में बहुत ही बड़ा अंतर है |

हिन्दू धर्म

हिन्दू धर्म वह धर्म था जो भारतवर्ष के नागरिक पालन करते थे | इसके अंतर्गत 1. वैष्णव, 2. शैव, 3. शाक्त, 4 स्मार्त और 5. वैदिक संप्रदाय आते हैं । वैष्णव जो विष्णु को ही परमेश्वर मानते हैं, शैव जो शिव को परमेश्वर ही मानते हैं, शाक्त जो देवी को ही परमशक्ति मानते हैं और स्मार्त जो परमेश्वर के विभिन्न रूपों को एक ही समान मानते हैं। अंत में वे लोग जो ब्रह्म को निराकार रूप जानकर उसे ही सर्वोपरि मानते हैं।

लेकिन मेरी व्यक्तिगत मान्यता यह है कि हिन्दू कोई धर्म नहीं है, अपितु विभिन्न सम्प्रदायों, संस्कृतियों, मान्यताओं का संयुक्त नाम है |विदेशियों ने भारत को नया नाम दिया था हिन्दुस्तान क्योंकि उनके लिए यह सिन्धु नदी के पार बसा एक देश था | और सिन्धु से हिन्दू बना और हिन्दू से हिन्दुस्तान अर्थात हिन्दुओं का देश |

आगे चलकर मुग़ल आये तो इस्लाम भी आया, फिरंगी आये तो ईसाई भी आये और समय के साथ कई और अन्य विदेशी सम्प्रदाय यहाँ आकर बस गये | हिन्दुओं में कई कुप्रथाएं थीं, छुआ-छूत, ऊँच-नीच था, जिसकी वजह से शोषित समाज धर्म परिवर्तन करने लगा | कुछ बौद्ध हो गये तो कुछ मुसलमान हो गये तो कुछ ईसाई हो गये |इस प्रकार भारतीय ही कई विभिन्न मान्यताओं में बंटते चले गये |

हिन्दू समाज न तब सुधरा न अब | आज भी हिंदुत्व के ठेकेदार शोषितों, पीड़ितों के प्रति अपनी आँखें वैसे ही बंद किये रहते हैं जैसे पहले बंद किये बैठे थे | अपने समाज के उत्थान के लिए कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाये, उलटे मंदिर मंदिर की रट लगाये रहते हैं | इन्हें केवल मंदिरों से मतलब रहता है, बाकि कोई भूख से मर रहा है तो मरता रहे, कोई बेघर हो रहा है तो होता रहे, कोई किसी भी भूमि छीन रहा है तो छीन ले….इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता | हिन्दू समाज की यही उदासीनता शोषितों पीड़ितों को हिन्दू धर्म के प्रति घृणा से भर दी | और वे विवश हो गये अन्य सम्प्रदायों की मान्यताओं को अपनाने के लिए |

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धर्म निरपेक्षता

आज भारत में कई सम्प्रदाय हैं और उनके अनुयायी भारतीय ही हैं |इसीलिए ही, भारत के संविधान निर्माताओं ने भारत को पाकिस्तान की नकल पर साम्प्रदायिक राष्ट्र न बनाकर धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाया | धर्म निरपेक्ष राष्ट्र होने का अर्थ यह नहीं कि वह किसी भी धर्म का पालन नहीं करता | वह राष्ट्र व न्याय धर्म का पालन करता है |लेकिन किसी भी साम्प्रदायिक मत-मान्यताओं से अप्रभावित रहकर | धर्म निरपेक्ष होने का अर्थ है कि शासक और न्याय व्यवस्था सभी के साथ समान व्यव्हार रखेगा, किसी से कोई भेदभाव नहीं करेगा |

सनातन धर्म

धर्म निरपेक्षता का सिद्धांत सनातन धर्मी है |सनातन धर्मी इसलिए, क्योंकि यह सार्वभौमिक सिद्धांत है | आप किसी वन में चले जाएँ, वहाँ विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षी, कीट-पतंगे मिलेंगे | वहाँ आपको शिकार भी मिलेगा और शिकारी भी | लेकिन वे सभी परस्पर निर्भर हैं कोई किसी प्रजाति को मिटाने के सपने नहीं देख रहा होता | शेर हिंसक प्राणी होता है, फिर भी वह अपनी शक्ति का प्रदर्शन किसी साम्प्रदायिक संगठन की तरह क़त्ल-ए-आम मचाने के लिए नहीं करता |केवल इंसान ही ऐसा प्राणी है जो खुद को सभ्य व धार्मिक भी बताता है और निर्दोषों, स्त्रियों की हत्याएं करता फिरता है धर्म रक्षा के नाम पर, दूसरों के घर जलाता फिरता है, समाज को आपस में लड़ाता फिरता है |

तो सनातन धर्म वह धर्म है जो सार्वभौमिक है सभी जीव जंतु यहाँ तक कि अणु-परमाणु तक उसका अनुसरण करते हैं |हम यह भी कह सकते हैं जो ब्रह्माण्ड का निर्धारित धर्म है या जो प्राकृतिक धर्म है वही सनातन धर्म है | सनातन धर्म कोई किताबों पर आधारित नियम कानून नहीं है, न ही किसी व्यक्ति या विचारों पर आधारित नियम कानून है |आप प्रेम करें किसी से तो प्रत्युत्तर में प्रेम ही मिलेगा | फिर चाहे आप पशु-पक्षियों से प्रेम करें या पेड़-पौधों से | सनातन धर्म कोई रीती-रिवाज, मान्यता या कर्मकाण्ड नहीं हैं, यह पुर्णतः व्यवहारिक है |

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हिंदुत्व के ठेकेदार क्यों चाहते हैं कि भारत हिन्दू-राष्ट्र घोषित हो ?

वह इसीलिए क्योंकि इस्लाम एक विदेशी संस्कृति है और इस्लाम जिस भी देश में पहुँचा, वहां उत्पात मचाया | इनके अपने रीतिरिवाज हैं और कई ऐसे हैं जो भारतीय समाज के साथ मेल नहीं खाते | लेकिन यदि ऐसे देखा जाये तो शैव, वैष्णव, चार्वाक, बौद्ध भी परस्पर मेल नहीं खाते | तो यह कहकर कि इस्लामिक विदेशी हैं यह हमारे से मेल नहीं खाते, इन्हें देश से बाहर कर देना, सिवाय मूर्खता के और कुछ नहीं है | ऐसे तो जो भी बहुमत प्राप्त कर लेगा वही दूसरे को देश से बाहर खदेड़ने लगेगा |

इसीलिए ही भारत के विद्वानों ने भारत को सनातन धर्मी रखा अर्थात सर्वधर्म समभाव व वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत पर आधारित | सनातन धर्म का ही फिरंगी रूप है सेक्युलरिज्म |

क्या सनातन धर्मी होना घातक है देश के लिए ?

प्रायः हिंदुत्व के ठेकेदार मुझसे तर्क करते हैं कि भारत यदि हिन्दू राष्ट्र घोषित नहीं हुआ तो एक दिन इस्लामिक राष्ट्र बन जाएगा | यह मुझे बहुत ही हास्यापद लगता है |

जब हज़ार वर्षों तक मुगलों का शासन रहा भारत में, तब इस्लामिक राष्ट्र नहीं बना, तो भला अब कैसे बन सकता है ?

सनातनी या धर्म निरपेक्ष होने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि साम्प्रदायिकता को यहाँ स्वीकार नहीं किया जायेगा | जो भी साम्प्रदायिकता फैलाएगा, उसके विरुद्ध आवश्यक कदम उठाये जायेंगे | फिर वह कोई भी सम्प्रदाय हो | भारत न तो इस्लामिक राष्ट्र बनेगा न ही हिन्दू राष्ट्र बनेगा | यह सनातनी था है और सनातनी ही रहेगा |

हाँ यदि हिन्दू यह चाहते हैं कि लोग हिन्दू धर्म से पलायन करके किसी और पंथ या सम्प्रदाय को न अपनाएँ या नास्तिक न हो जाएँ, तो उन्हें चाहिए कि वे धार्मिक हो जायें | धार्मिक होने का अर्थ कर्मकाण्डी हो जाना या ‘मंदिर वहीँ बनायेंगे’ गेंग में शामिल होना नहीं होता | धार्मिक होने का अर्थ है आपके आसपास किसी पर कोई अत्याचार न होने पाए, कोई भूख से न मरने पाए, कोई बेघर न होने पाए, कोई आर्थिक आभाव के कारण आत्महत्या न करे…यह सब ध्यान रखना, अपनी तरफ से जो सहयोग बन पड़े वह करना, अन्यायी व अत्याचारियों के विरुद्ध निर्भीकता से खड़े होना, भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध संयुक्त अभियान चलाना…..आदि इत्यादि | यदि मैं गलत कह रहा हूँ तो अपने अपने धार्मिक ग्रंथो को उठाकर देख लीजिये, क्या यही सब नहीं समझाया गया है ?

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~विशुद्ध चैतन्य


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