रिलीजन कभी भी धर्म नहीं हो सकता

यह एक आम धारणा है कि धर्म ही भेदभाव व साम्प्रदायिक उन्माद का प्रमुख कारक है | यह कुछ वैसी ही धारणा है कि सारे अपराधों की जड़ रात्री का अंधकार है या सारे नेता को झूठ बोलने, जुमले सुनाने के लिए प्रेरित करने का कारक दिन है |

न तो दिन किसी को प्रेरित करता है जुमलेबाज, घोटालेबाज होने के लिए, न ही रात प्रेरित करता है अपराध करने के लिए | ठीक इसी प्रकार धर्म किसी को गलत के लिए प्रेरित नहीं करता और अधर्म किसी को प्रेरित नहीं करता सही के लिए | जो गलत है उसे ही अधर्म कहा जाता है और जो सही है उसे ही धर्म कहा जाता है | जिससे समाज, राष्ट्र व प्राणियों का अहित होता है, उसे अधर्म कहा जाता है, जिससे कल्याण होता है उसे धर्म कहा जाता है |

अतः हिन्दू कोई धर्म नहीं, इस्लाम कोई धर्म नहीं, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई, यहूदी….आदि कोई भी धर्म नहीं मात्र रिलिजन हैं अर्थात सम्प्रदाय हैं | सभी रिलीजन में आपको भले और बुरे लोग मिल जायेंगे, सभी रिलीजन में आपको स्वार्थी और परमार्थी मिल जायेंगे, सभी रिलीजन में आपको बलात्कारी और हत्यारे मिल जायेंगे, लुटेरे मिल जायेंगे, धोखेबाज, देशद्रोही मिल जायेंगे |

यह धारणा भी गलत है कि केवल हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन बुद्ध….आदि ही रिलीजन हैं | कांग्रेसी, भाजपाई, सपाई, बसपाई, आरएसएस, एम्एनएस, एम्आईएम्, वामपंथ, दक्षिणपंथ, मोदीवाद, अम्बेडकरवाद, गोडसेवाद, गांधीवाद…..आदि सभी रिलीजन ही हैं | बस इन्हें आधिकारिक रूप से रिलीजन नहीं माना गया है | लेकिन भविष्य में इन्हें भी रिलीजन मान ही लिया जाएगा |

और रिलीजन कभी भी धर्म नहीं हो सकता, क्योंकि प्रत्येक रिलीजन में भले और बुरे लोग होते हैं | रिलिजन केवल मिश्रित समूह है भयभीत व स्वार्थी लोगों का | लेकिन इन समूहों में भले लोग भी मिल जाते हैं |

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मान्यता है कि इस्लाम सबसे तेजी से फैलने वाला सबसे धर्म है | जबकि इस्लाम सबसे तेजी से फैलने वाला धर्म नहीं रिलीजन यानि सम्प्रदाय है | और इस्लाम से भी तेजी से फ़ैल रहा है नास्तिकता-वाद, नेतावाद, पार्टीवाद, भौतिकतावाद |

यदि इस्लामिक समाज से अधर्मियों (चोरी-चकारी करने वाले, हेरा-फेरी करने वाले, झूठ बोलने वाले, धूर्त-मक्कार देश लूटने वाले नेताओं का समर्थन करने वाले, शराब पीने वाले…) यानि जो भी कार्य इस्लाम में हराम माना गया है उसे करने वालों का सार्वजनिक बहिष्कार कर दिया जाए, तो इस्लाम का आस्तित्व ही खतरे में पड़ जाए |

इसी प्रकार हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, यहूदी, कांग्रेसी, भाजपाई, संघी-मुसंघी, सपाई, बसपाई, वामपंथ, दक्षिणपंथ….आदि सभी रिलिजन से भी अधर्मिकों का बहिष्कार हो जाये, तो इनका भी आस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा |

~विशुद्ध चैतन्य

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