गुजर गया 2018 लड़खड़ाता हुआ

कुछ इस प्रकार….

धर्म, जाति, साम्प्रदायिकता, और सत्ता के नशे में धुत्त नेताओं, चाटुकारों और दुमछल्लों के कारण कुछ इसी प्रकार लड़खड़ाता हुआ बीता, जैसे कि यह शराबी | कई लोगों को हानि उठानी पड़ी उन नशेड़ियों के कारण, जिन्हें हिन्दू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद, सवर्ण-दलित, आरक्षण और क्रिकेट जैसे मादक खेलों की लत लग चुकी है | इन नशे में धुत्त लोगों ने साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, देश में अराजकता का वातावरण बनाने में अपनी तरफ से कोई कमी नहीं रहने दी |

आज वर्ष का अंतिम दिन है क्या यह दिन भी नशे में बीतेगा ?

नशा करना गलत नहीं है यदि वह अपनी थकान मिटाने, स्वास्थ्यवर्धन, मानसिक तनाव से मुक्ति, हर्ष उल्लास के लिए किया जा रहा हो | नशा गलत नहीं है यदि अपने काम का नशा हो, देशभक्ति का नशा हो, समाज कल्याण का नशा हो, प्रेम का नशा हो, मेहनत का नशा हो | लेकिन नशा कोई भी भी हो, उसपर आपका नियंत्रण रहना चाहिए, ऐसा न हो कि आप नशे के नियंत्रण में चले जाएँ | क्योंकि ऐसा होने पर न केवल आपका जीवन नर्क बन जाएगा, अपितु आपके परिवार को भी हानि उठानी पड़ेगी |

यूँ तो पर्व कोई भी हो, उसमें अपना ही नशा होता है, जो किसी भी प्रकार का नशा नहीं करते, वे भी त्यौहार, नए वर्ष के स्वागत के नशे में मगन होते हैं, झूमते नाचते गाते हैं | कुछ लोगों को त्योहारों पर उपहार देने का नशा होता है, कुछ लोगों को भोज कराने का, तो कुछ लोगों को धन बाँटने का |

उपहार में हाथ से बने कार्ड्स या मिठाइयाँ गिफ्ट करना

आजकल मोबाइल फोन पर रेडीमेड कार्ड्स मिल जाते हैं, जिसमें न तो आपको कोई श्रम करना होता है, न ही कोई कीमत चुकानी पड़ती है | बस शेयर कर दो, फॉरवर्ड कर दो और हो गयी रस्म अदायगी |

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मुझे याद है बचपन में हम लोग हर त्यौहार में कितनी मेहनत करते थे कार्ड्स बनाने में | लेकिन वह हमारे लिए मेहनत नहीं, नशा हुआ करता था | हम कार्ड अपने हाथों से डिजाइन करते थे….यानि ब्लेंक कार्ड्स लेकर आते या फिर चार्ट पेपर लेकर आते और उसपर अपने पसंद की चित्रकारी करते और फिर भेजते थे पोस्ट के द्वारा या खुद अपने हाथों से देकर आते थे | और कार्ड के साथ होता था घर की बनी गुझियाँ, पूड़ी और खीर या हलुआ |

बदले में वे हमें अपने घर की बनी मिठाई खिलाते और साथ ही पैक करके देते थे अपने साथ ले जाने के लिए | अगले दिन हर कोई एक दूसरे के घर की मिठाई की प्रशंसा कर रहा होता था……वह हर्ष, वह आनन्द आज कहाँ है ?

क्या फेसबुक पर पर बधाईयाँ शेयर कर देने मात्र से कोई फर्क पड़ता है ? शायद नहीं क्योंकि जिस कार्य में कोई श्रम शामिल न हो, जिसकी आपने कोई कीमत ही नहीं चुकाई, ऐसे गिफ्ट्स और कार्ड्स भी प्रभावहीन होते हैं |

उपहार हमेशा ऐसे दें, जो दिल छू जाए किसी का

पिछले कुछ वर्षों से देख रहा हूँ कि समाज घृणा व द्वेष में ऐसा डूबा कि होश ही खो बैठा | ऊपर से सोशल मिडिया ने और बर्बाद कर दिया | अब बधाइयाँ हो, या उपहार सब सोशल मिडिया में उपलब्ध हैं | न तो एक पैसा किसी का खर्च होता है और न ही कोई मेहनत लगती है….बस शेयर करना होता है एक क्लिक से |

वर्ष बीत गया द्वेष व घृणा से भरे समाज का चेहरा देखते हुए

किसी को बधाई सन्देश देने के बाद फिर वही हिन्दू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद, सवर्ण-दलित, कांग्रेस-भाजपा और क्रिकेट का मादक राष्ट्रीय खेल शुरू | फिर उपदेश भी साथ साथ चेपते रहते हैं कि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना |

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बिलकुल उन तोतों जैसी स्थिति हो गयी है सभी की जो बहेलियों के जाल में फँसे होते हैं और चिल्ला चिल्ला कर गाते हैं, “बहेलिया आएगा, जाल फैलाएगा, दाना डालेगा, मत फँस जाना प्यारे….”

लेकिन घृणा और द्वेष की जहरीली फसल अपना काम कर गयी, समाज ने कई मोबलिंचिंग देखी, समाज ने अपना ही वह वीभत्स चेहरा देखा, जिसे वह धार्मिकता के ढोंग के पीछे छिपाने का प्रयास करता रहा | न तो गीता काम आयी, न कुरान, न बाइबल, न ही सदगुरुओं व इतिहास की शिक्षा | साम्प्रदायिक उन्मादी अपने उत्पात में मस्त रहे, और धर्मों के ठेकेदार तोतों की तरह रटते रहे कि हमारी धार्मिक किताबें पढ़ लो, उसमें प्रेम और भाईचारा ही सिखाया गया है | उसमें कहा गया है कि किसी निर्दोष का खून मत बहाओ…..और खून बहते गये, लाखों लोग साम्प्रदायिक अग्नि में भस्म होते गये….लेकिन तोतों ने रटना बंद नहीं किया |

मैं ये सब तमाशों को देखकर उकता गया हूँ | किताबी धर्म और व्यवहारिक धर्मो में जमीन आस्मां का अंतर है |फिर वह गीता कुरान हो या भारतीय संविधान….सब किताबी हैं व्यव्हार में कोई नहीं लाता | और जो लाते भी हैं, तो समाज उसका दुश्मन हो जाता है | क्योंकि साम्प्रदायिक वैमनस्यता में जो नशा है, जो उन्माद है, जो मदहोशी है, जो बेहोशी है, जो सुख है…..वह शायद प्रेम और परस्पर सौहार्द में नहीं |

बस सभी से यही आग्रह है मेरा कि आने वाले वर्ष को इन विषैले नशों के प्रभावों से मुक्त रखें | आने वाले वर्ष को साम्प्रदायिक वैमनस्यता से मुक्त रखें |

सभी को 2019 की हार्दिक शुभकामनाएं !

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~विशुद्ध चैतन्य

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