धार्मिकों का समाज सदैव शैतान का अनुयायी रहा है

एक फिल्म (Zu Magical Warrior) देख रहा था | यह फिल्म १९८३ में हांगकांग में बनी थी और उस समय इस फिल्म ने एक करोड़ हांगकांग डॉलर से अधिक की कमाई की थी | यह और बात है कि यह फिल्म बिलकुल बच्चों के लिए बनाई गयी फिल्म जैसी ही लगती है लेकिन यदि ध्यान दें तो धार्मिकों का समाज और बच्चों के समाज में कोई बहुत अंतर नहीं होता | दोनों ही परीकथाओं की दुनिया में जीते हैं, दोनों ही वास्तविक दुनिया से अनभिज्ञ व अनजान रहते हैं |

खैर में ऐसी फ़िल्में इसलिए देखना पसंद करता हूँ क्योंकि इसमें बहुत सी ऐसी बातें देखने मिल जाती है, जिसका वास्तविक दुनिया से बहुत ही गहरा सम्बन्ध होता है | जैसे कि यह विडियो क्लिप जो कि उसी फिल्म से लिया है मैंने;

इस फिल्म में त्रिशूल तिलकधारियों को दुष्टआत्माओं के रूप में प्रदर्शित किया गया है | शायद चीन के लोगों के की नजर में शैतान त्रिशूल तिलकधारी ही होते हैं |

यदि आज हम भारत में देखें तो हिंदुत्व के ठेकेदारों और उनके नेताओं के आचरण किसी शैतान से कम नहीं नजर आते | इन्हें देखकर ऐसा ही लगता कि शैतान शायद ऐसे ही होते हैं | जिन कार्यों को ये लोग गलत बताते हैं, वही कार्य यदि ये स्वयं या करते हैं या इनके नेता द्वारा किये किये जाते हैं, तब गलत नहीं माना जाता है | उलटे बचाव करते हैं यह कहकर कि राजनीती में सब (साम, दाम, दण्ड, भेद) मान्य है |

ग्रह-नक्षत्र कुछ ऐसा प्रभाव डालते हैं मानव मस्तिष्क में कभी-कभी, कि उस काल में अधिकांश मानव बुद्धिमान हो जाते हैं | और वे बुद्धिमान लोग साथ देते हैं दुर्योधन, हिटलर, ट्रम्प, मोदी जैसे महान नेतृत्व का |

इतिहास उठाकर देखिये, आज हम जो कुछ भी हैं उन्हीं की वजह से हैं | यदि वे न होते तो शायद इतिहास और सोशल मीडिया बहुत उबाऊ हो जाता और हम यह कभी नहीं सीख पाते कि हमें उनकी तरह नहीं बनना है केवल उनके सामने नतमस्तक रहना है |

शेष….कल लिखूंगा…..

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