यदि आप सही जगह पर नहीं हो, तो बेचैनी होना शुरू हो जाता है

04 मार्च 2015 सुबह चन्दन स्वामी, अपने पालतू गुंडों और कुछ ग्रामीणों को लेकर त्रिकुटाचल आश्रम से लीलामंदिर आश्रम के अध्यक्ष व अरुणाचल मिशन के ट्रस्टी स्वामी ध्यान चैतन्यानंद जी और उनके समर्थकों को बाहर खदेड़ दिया और अपना ताला उस आश्रम में लगा दिया | हालाँकि त्रिकुट आश्रम के अध्यक्ष माँ प्रभा देवी का लिखित अनुमति ध्यान महाराज के पास था जबकि चन्दन स्वामी को माँ प्रभा देवी ने आश्रम से बहिष्कृत हो चूका था बहुत ही पहले अपने ही कुकर्मों के कारण |

पता चला है कि चंदनस्वामी ने आश्रम की सारी संपत्ति अपने नाम पर करवाने के लिए झूठे दस्तावेज तैयार करवाए थे, और अभी भी कोर्ट में केस चल ही रहा है | इसलिए त्रिकुटपर्वत पर जाने वालों के लिए यह आवश्यक है कि उस आश्रम में जाने से पहले सावधान रहें क्योंकि वहाँ एक शातिर बदमाश बैठा हुआ है साधू के वेश में | वहाँ चढ़ावा चढ़ाने से पहले यह अवश्य जान लें कि जो भी दान आप दे रहे हैं, वह ऐय्याशी व शराब आदि में ही खर्च होंगे, किसी सामाजिक हितार्थ नहीं |

गलती ध्यान महाराज से यह हुई कि वे बिना किसी सुरक्षा के उस आश्रम में पहुँचे थे और जिन लोगों ने सहयोग देने का आश्वासन दिया था, वे आये ही नहीं | केवल फोन पर ही आश्वासन देते रहे |

 मैं वहाँ से एक दिन पहले ही निकल आया था, क्योंकि मुझे वहाँ बहुत ही बेचैनी हो रही थी | अब यह ध्यान व साधना का ही परिणाम है कि वहाँ की नकारात्मक उर्जा मुझे बेचैन किये हुए थी | भीतर कोई बार बार कह रहा था कि जितनी जल्दी हो सके यहाँ से निकल जाओ | यदि आप स्वयं से परिचित हैं तो आपको पता रहता है कि आप सही जगह पर हो या नहीं | यदि आप सही जगह पर नहीं हो, तो बेचैनी होना शुरू हो जाता है | यह सब आप भी अनुभव करते होंगे, लेकिन आप लोग उसे अनदेखा कर देते हैं, जबकि मैं नहीं करता | ध्यान महाराज के मना करने के बाद भी मैं वापस चला आया था |

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मैं ऐसी किसी भी जगह नहीं बैठ सकता जहाँ व्यापारिक उद्देश्य से श्रृद्धा व भक्ति का दोहन किया जाता हो | श्रृद्धालुओं को नहीं पता कि वे जहां आ रहे हैं, वह अब वास्तव में तीर्थ-स्थल है या केवल कुछ लोभियों के लिए हराम की कमाई का स्थान | जिस गुरु स्वामी सम्पदानंद जी के नाम पर वे वहाँ व्यापार कर रहे हैं, उन्होंने कभी भी पैसों के लिए कोई कार्य नहीं किया | वे केवल साधना करते रहे और साधना करते हुए ही शरीर त्याग कर दिया था |

मैं जानता हूँ कि वह अरुणाचल मिशन की संपत्ति है और एक दिन वापस मिल ही जायेगी | लेकिन ध्यान महाराज ने जल्दबाजी की | ~विशुद्ध चैतन्य

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