स्वप्न तो केवल स्वप्न होता है

अक्सर आप लोगों ने पढ़े-लिखे और जमीने विद्वानों को यह कहते सुना होगा, “स्वप्न तो केवल स्वप्न होता है सत्य नहीं | स्वप्न मन की दबी हुई भावनाओं को ही दिखाता है या दिन में जो कुछ भी हम सोचते हैं, देखते हैं वही सब स्वप्न के रूप में उभर कर आता है |”


भौतिक जगत से ऊपर उठ पाने में असमर्थ मस्तिष्क इससे अधिक समझ पाने में असमर्थ होता है | और यदि मैं उनकी जगह स्वयं को रखकर देखूँ तो वे भी गलत नहीं हैं | क्योंकि स्वप्न केवल स्वप्न में ही सत्य प्रतीत होते हैं, कई बार इतने भयभीत हो जाते हैं कि पसीने से तरबतर हो जाते हैं | हडबडा कर ऐसे उठते हैं मानो कोई घटना बिलकुल सच में घटित हुई हो, लेकिन थोड़ी देर में जब होश आता है तब पता चलता है कि वह तो केवल स्वप्न था सच नहीं | इसी प्रकार धर्मों के ठेकेदार स्वप्न दिखाते हैं कि फलाँ सम्प्रदाय या देश के कारण हमारा देश या धर्म खतरे में हैं…. और लोग भेड़ों की तरह एक झुण्ड में सिमटना शुरू कर देते हैं… किसी को हर मुसलमान आतंकवादी दिखाई देने लगता है तो किसी को हर हिन्दू संघी-बजरंगी नजर आने लगता है | किसी को हर सेक्युलर पाकिस्तानी दिखने लगता है तो किसी को हर भगवाधारी प्राची, साक्षी या दंगाई दिखाई देने लगता है | लेकिन कोई यह मानने को तैयार नहीं होता कि स्वपन तो केवल स्वप्न होता है |

ऐसे ही कई उदाहरण मिल जायेंगे जो यह सिद्ध कर देंगे वैज्ञानिक रूप से कि स्वप्न सत्य नहीं होते जैसे;

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· लोग स्वप्न देखते हैं कि कोई नेता, पार्टी, सरकार, या किसी धर्म/नैतिकता का ठेकेदार राष्ट्र में सुख-समृद्धि, अच्छे दिन या एकता, भाईचारा, अमन-चैन ले आएगा | लेकिन वास्तविकता बिलकुल विपरीत होती है | नेता और धर्मों के ठेकेदार ही समाज में फूट डालते हैं, नफरत फैलाते हैं, व्यक्तिगत स्वार्थों को राष्ट्रहित से ऊपर रखते हैं, जानते बुझते हुए भी कि देश की जनता शारीरिक, मानसिक व आर्थिक रूप कमजोर होगी, रासायनिक खादों, नोटबंदी, भ्रष्टाचार, घोटालों, जुमलेबाज-नौटंकीबाज नेताओं को न केवल मान्यता देते हैं, अपितु प्रचार-प्रसार भी करते है | जानबूझ कर उद्योगपतियों के कर्जे और टैक्स माफ़ करते हैं, लेकिन किसानों की लाशों से भी कर्जे वसूल करने निकल पड़ते हैं | जनता को स्वप्न दिखाते रहते हैं कि अच्छे दिन आयेंगे | गरीब जनता के तो अच्छे दिन नहीं आते, लेकिन नेताओं, घोटालेबाजों, अपराधियों, भ्रष्टाचारियों और बड़े पूंजीपतियों के अच्छे दिन अवश्य आ जाते हैं | फिर भी जनता स्वप्न देखना और दिखाते रहना पसंद करती है |

· यह भी स्वप्न है कि बड़े बड़े कानून बना देने से, अदालतें खोल लेने से, धर्म और कानून की नई नई किताबें रटा देने से, जजों और वकीलों की फ़ौज खड़ी कर लेने से, थाना-पुलिस आदि से अपराध रुक जाता है, अपराधी सुधर जाते हैं, भ्रष्टाचार बंद हो जाता है, न्याय मिलने लगता है, बलात्कार रुक जाते हैं….लेकिन वास्तव में ऐसा होता नहीं है | लेकिन फिर भी करोड़ों रूपये खर्च किये जाते हैं इन सब पर क्योंकि ऐसे स्वप्न देखना सभी को अच्छा लगता है |

ये सभी स्वप्न मेरे लिए बिलकुल वैसे ही हैं, जैसे कि पढ़े लिखों के लिए सोते समय देखे गये स्वप्न हैं | अंतर केवल इतना ही है कि पढ़े लिखे लोग दिन में भी नींद में ही होते हैं इसलिए उन्हें सरकारों, नेताओं, धर्मों के ठेकेदारों द्वारा प्रायोजित स्वप्न सत्य प्रतीत होते हैं |

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जानता हूँ….अब आप कहेंगे कि कुछ लोग गलत हो गये इसका अर्थ यह नहीं कि सारे स्वप्न ही गलत हो गये, कई लोगों को न्याय मिला है, पुलिस भी कई लोगों की बहुत सहायता करती है, दिन रात काम करती है, सरकार की कई योजनाओं से बहुतों को लाभ हुआ है…सारांश यह कि सारे सपने झूठ नहीं होते, कुछ सही भी होते हैं |

बिलकुल सहमत हूँ आप लोगों से और मैं भी यही मानता हूँ कि सारे सपने केवल सपने नहीं होते, कुछ सही भी होते हैं | जैसे मैंने स्वप्न में देखा कि मेरे परिवार में कोई दुर्घटनाग्रस्त हो गया | दो दिन बाद मुझे खबर मिली की मेरे पिताजी पहाड़ी से गिर गये और कॉलरबॉन टूट गयी | एक स्वप्न देखा कि मेरे एक कलीग के घर में कोई बहुत बीमार है…फोन किया, उससे पुछा तो उसने बताया कि उसके घर में कोई बीमार नहीं है | लेकिन दूसरे दिन बताया कि उसके रिश्ते के ससुर की तबियत बहुत खराब हो गयी थी, उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है | ऐसे बहुत से स्वप्न हैं जो सच हुए मेरे | मुझे स्वप्नों को डायरी में लिखने की आदत थी लेकिन दो तीन बार डायरी खो जाने के बाद से लिखना लगभग बंद ही कर दिया था |

तो स्वप्न आप खुली आँखों से देखें या बंद आँखों से, स्वपन केवल स्वप्न नहीं होते कई सच भी होते हैं और कई पूर्वाभास भी होते हैं जो आपको सचेत करने के लिए आते हैं | इसलिए स्वप्नों को गंभीरता से लें | फिर वे स्वप्न नेताओं, धर्मों के ठेकेदारों, सरकारों द्वारा दिखाए जाएँ या प्रकृति द्वारा, कोई अंतर नहीं पड़ता | ~विशुद्ध चैतन्य

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