अपने विवेक का प्रयोग हमें ही करना है क्योंकि…

हमारा मूल धर्म सनातन है न कि हिन्दू | हिन्दू वास्तव में एक सामूहिक संबोधन है जो कि सिन्धु नदी से जुड़ा हुआ है | यहाँ वैष्णव भी थे शैव भी थे और न जाने कितने और मान्यताएं थीं… लेकिन सभी हिन्दू ही कहलाते थे ठीक वैसे ही जैसे कि जापानी, जर्मनी…. आदि | हो सकता है कि जापानियों में भी ब्राह्मण शुद्र… जैसा कुछ होता हो, लेकिन हम उन्हें जापानी ही कहते हैं | अमेरिका में भी काले सफ़ेद का झगडा है लेकिन हम उन्हें अमेरिकन ही कहते हैं | ईसाई, मुस्लिम, सिख आदि सभी सम्प्रदायों के संस्थापक रहे लेकिन हिन्दू धर्म का कोई संस्थापक नहीं है | भिन्न-भिन्न मान्यताएं थीं पहले से और उसके बाद उनकी कई शाखाएं होती चली गयीं | भारत में सभी मान्यताओं के एक समूह को हिन्दू के रूप में जाना जाता है |

मैं मानता हूँ कि आज इतनी भिन्न मान्यताओं में ईसाई और मुस्लिम भी शामिल हो गये | क्योंकि पीढ़ियों से जो मान्यताएं उन्होंने परिस्थितिवश स्वीकारी उसे बदलने का अधिकार किसी भी सम्प्रदाय को नहीं है क्योंकि हमारा संविधान इसकी अनुमति नहीं देता कि किसी को लालच या भय दिखाकर एक सम्प्रदाय से दूसरे पर लाया जाय | अब भारत में तीन प्रमुख सम्प्रदाय हैं जिनमें विवाद रहता है वे हैं; हिन्दू, मुस्लिम और ईसाई | हिन्दू और मुस्लिम आपस में लड़ते रहें तो लाभ विदेशियों को है इसलिए विदेशी इस झगडे को बनाये रखना चाहते हैं | वे यहाँ की राजनैतिक साम्प्रदायिक संगठनों को आर्थिक सहयोग भी देती रहती हैं विवाद बनाये रखने के लिए और इसलिए ही आये दिन कोई न कोई नेता विवादित बयान देता रहता है….

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अमेरिका भारत पर तब तक अपना आधिपत्य स्थापित नहीं कर सकता पाकिस्तान की तरह, जबतक हिन्दू और मुस्लिम एकजुट हैं | जब तक हम आपस में लड़ रहें हैं तब तक ही वह अपने उद्देश्य में सफल है | अब हमको यह समझना है कि सनातन धर्म है क्या ! क्योंकि हम सनातन धर्म को समझ कर ही राष्ट्र को बचा सकते हैं | मैं एक सन्यासी हूँ और संयासी न हिन्दू होता है मुस्लिम होता है न ब्राह्मण होता है और न ही शुद्र होता है…. क्योंकि इन दीवारों से निकलने के बाद ही कोई सन्यास को समझ सकता है | जब तक वह भेदभाव में पड़ा हुआ है, संयासी हो ही नहीं सकता | लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सन्यासी अधर्मी हो गया | सन्यासी सनातन धर्म पर स्वतः आ जाता है | सनातन वह धर्म है जिसपर सभी धर्म आधारित हैं | सनातन वह अंतरिक्ष है जिसपर, ग्रहों नक्षत्रों की तरह सभी सम्प्रदाय गति कर रहें हैं | जिस प्रकार अंतरिक्ष का कोई छोर नहीं है, कोई सीमा नहीं है, वैसे ही सनातन है | जिसप्रकार अंतरिक्ष का कोई रंग रूप नहीं है, वैसे ही सनातन है | इसलिए ही इसे सनातन कहा जाता है | कोई ग्रह लाल रंग का है, इसलिए हम उसे हिन्दू मान लेते हैं और जो ग्रह हरा है हम उसे मुस्लिम मान लेते हैं | अब कोई हरे ग्रह से लाल ग्रह पर चला जाए तो क्या धर्म परिवर्तन हो जायेगा ? नहीं धर्म तो वहीँ का वहीँ है, केवल ग्रह परिवर्तन हो जाएगा……

इसलिए हमको सौरमंडल (भारत) की सीमा में रहने वाले सभी ग्रहों का सम्मान करना चाहिए और जिस प्रकार सभी ग्रह अपनी अपनी मर्यादा व सीमा का ध्यान रखते हैं, वैसे ही हमें भी रखना चाहिए…ये लोग हिन्दू हों, या मुस्लिम हों, या ईसाई हों… अपने अपने सम्प्रदायों के पिछड़े वर्ग का उत्थान के लिए कार्य करें व सभी राष्ट्र के लिए समर्पित होने की प्रेरणा दें तो हम राष्ट्र को विश्व में श्रेष्ठ स्थान दिला सकते हैं, अन्यथा ईराक बनाने की तो पूरी तैयारी कर ही रहें हैं धर्मो के ठेकेदार और नेतागण | अपने विवेक का प्रयोग हमें ही करना है क्योंकि ईश्वर ने मस्तिष्क केवल नेताओं और धर्मों के ठेकदारों को ही नहीं, हमें भी दे रखी है और वह भी फ्री में | ~विशुद्ध चैतन्य 

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