क्या यही हिंदुत्व है ?

दो दिनों से देख रहा हूँ कि मदर टेरेसा को लेकर बहुत विवाद हो रहा है | कहा जा रहा है कि मदर टेरेसा ने स्वयं कहा है कि वह धर्म परिवर्तन करवाती थी और उनका उद्देश्य केवल धर्म परिवर्तन करवाना ही था, उनकी कुछ तस्वीरें शेयर की जा रहीं हैं जिसमें उन्हें स्विमिंग पुल में नहाते या स्विम सूट पर बैठे दिखाया गया है….
अब जरा सोचिये, मदर टेरेसा की निंदा करके ये हिंदुत्व के ठेकेदार स्वयं हिंदुत्व का ही कितना अपमानित कर रहे हैं उसका इन्हें अंदाजा ही नहीं है | यह स्वयं सिद्ध कर रहे हैं कि ये ठेकेदार अपने ही धर्म के लोगों के लिए कभी सहयोगी नहीं रहे, इसलिए कोढियों की कभी सेवा नहीं की | यदि की होती तो आज वे लोग ईसाई नहीं होते | इन लोगों ने कभी बेघर निराश्रितों की सेवा नहीं की, यदि की होती तो वे आज ईसाई नहीं होते | इन्होने कभी भी आदिवासियों उत्तरपूर्वी लोगों की सहायता नहीं की, यदि की होते तो आज वे ईसाई नहीं होते…. मदर टेरेसा ने धर्मपरिवर्तन करवाया किसी पर हथियार चलाकर नहीं, किसी को डरा धमका कर नहीं, कोई संगठन बनाकर जय श्री राम का नारा लगा कर दंगा तोड़फोड़ करके नहीं….उन्होंने सेवा की और यही वास्तव में हमारे धर्म की मूल शिक्षा ही थी | लेकिन हम तो भूल गये अपने ही धर्म की मूल शिक्षा को, जबकि ईसा-मसीह लगभग बीस वर्ष भारत में रहकर हिन्दू धर्म, बौध धर्म को समझा और जाना कि सेवा से बड़ा कोई धर्म है ही नहीं | उन्होंने वापस जाकर इसी अहिंसा, प्रेम व सेवा की शिक्षा दी अपने लोगों को | हमारी ही शिक्षा मदर टेरेसा ने आत्मसात किया और वे भारत आकर हमें ही प्रेरणा देने का प्रयास किया कि प्रेम व सेवा से लोगों को जीतो न कि हिंसा व द्वेष से | उन्होंने तो मानवीय कार्यों के लिए न केवल कई सम्मान जीते, बल्कि पुरे विश्व में सम्मान भी पाया | अब जरा मदर टेरेसा के विरोधी अपने आस्तित्व पर नजर डालें कि उनको मानवीय कार्यों के लिए कितने सम्मान मिले और कितने लोग उनको मानवता के लिए जानते हैं ?

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लेकिन हम हिंदुत्व की अकड़ से मुक्त नहीं हो पाए और आज हिन्दू बद से बदतर स्थिति में पहुँचता चला गया | हिन्दू अब भारत में नहीं रहना चाहता, पैदा होते ही अमेरिका भागना चाहता है या विदेश में सेटल होना चाहता है | आज हिन्दुओं के लिए हिंदुत्व सिवाय एक लेबल के और कुछ नहीं रहा…लेकिन ये धर्म के ठेकेदारों को इन सब से कोई मतलब कभी नहीं रहा.. बस इनको वोट बैंक बढ़ाना है अपने नेता के लिए, मंदिरों में चढ़ावा चढ़ाने वालों की भीड़ खड़ी करनी है इसलिए हिंदुत्व का नारा लगा रहे हैं | लेकिन न इनको हिन्दू किसानों की चिंता है, न आदिवासियों की चिंता है, न भूमाफियाओं के आतंक से दुखी ग्रामीणों की चिंता है…. न ही इनको अस्पताल चाहिए, न स्कूल चाहिए, न स्वस्थ प्रशासन चाहिए.,… बस मंदिर होना चाहिए और उस मंदिर में चढ़ावा चढ़ना चाहिए…..

ऊपर से बेशर्मी के साथ मदर टेरेसा का अपमान कर रहे हैं | अरे उनका अपमान करने से पहले अपने नीचे तो देख लो कि किस हद तक नफरत के दलदल में धंस चुके हो ? क्या यही हिंदुत्व है ? यदि यही हिंदुत्व है तो मुझे नहीं लगता कि मुर्ख हिंसक प्रवृति के लोगों को छोड़कर कोई भी हिन्दू होना चाहेगा | इसलिए मदर टेरेसा का अपमान करके अपने ही धर्म का अपमान मत करो | ~विशुद्ध चैतन्य

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