क्या भूत-प्रेत, दैत्य, दानव,वास्तव में होते हैं ?

Does ghost really exists ?

यह एक सामान्य प्रश्न है जो अक्सर लोग मुझसे करते हैं | आज समाज शिक्षित हो गया है, पढ़ा लिखा हो गया है इसलिए वे इनपर विश्वास नहीं करते उलटे मजाक उड़ाते हैं इन्हें मानने वालों या देखने का दावा करने वालों का | मैं स्वयं आधुनिक जगत का ही प्राणी हूँ और विज्ञानं व तकनीकी से ही मेरा जुड़ाव रहा है बचपन से | लेकिन “भुत-प्रेत होता है या नहीं ?” जैसा प्रश्न मेरे लिए कुछ ऐसा ही प्रश्न है, जैसे कोई पूछे पुरुष वास्तव में होते हैं या नहीं, स्त्री वास्तव में होते हैं या नहीं, प्रधानमन्त्री वास्तव में होते हैं या नहीं, सांसद वास्तव में होते हैं या नहीं…..आदि इत्यादि | क्योंकि मैं इनसे परिचित हो चुका हूँ, बचपन से ही बहुत कुछ देखता आया और ऐसे ऐसे रहस्य देखे कि इनके आस्तित्व पर संदेह का कोई प्रश्न ही नहीं | लेकिन यहाँ मैं जो कुछ बताने जा रहा हूँ वह कोई सामान्य रिसर्च नहीं है, कई बरसों का गहन अध्ययन है | तो आइये  आज आपको समझाता हूँ कि भुत-प्रेत, दैत्य, दानव वास्तव में होते थे और आज भी उनका आस्तित्व उतना ही वास्तविक है, जितना आपका और मेरा आस्तित्व है |

कल्पना और यथार्थ

मुझे याद है जब मैं चार वर्ष का था, तब मेरे पिताजी ने मुझे एक छोटी सी किताब भेंट की थी | जिसका नाम था ‘उड़ने वाला घोड़ा’ | मैंने तब नया नया ही पढ़ना सीखा था और मेरे लिए वह किताब बहुत महत्वूर्ण थी | क्योंकि शायद वह पहली किताब थी जो मुझे भेंट स्वरुप मिली थी पढ़ाकू होने के कारण |

तो उसमें उड़ने वाले घोड़े की कहानी कहानी थी और वह उड़ने वाला घोड़ा मेरी कल्पनाओं की उड़ान के साथ उड़ता था | वह मेरे लिए यथार्थ था क्योंकि बचपन में ऐसी कोई भी कल्पना यथार्थ ही लगती है | बिलकुल वैसी ही जैसे स्वप्न में घटने वाली घटना यथार्थ लगती है स्वप्न देख रहे व्यक्ति को | स्वप्न में ऐसी ऐसी घटनाएँ घटती हैं जिसकी वास्तविक जीवन में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता |

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अब जिसने भी उड़ने वाले घोड़े की कल्पना की वह कैसे की ? कहीं तो कोई प्रेरणा मिली होगी, कहीं तो कोई ऐसी कहानी सुनी होगी ? और जिसने सबसे पहले उड़ने वाले घोड़े की कल्पना की उसने कैसे की ?

कोई यूँही तो कल्पना नहीं कर लेता, कोई न कोई तो आधार होता ही है | ऐसी ही कई काल्पनिक बातें हैं जो कभी कल्पनाएँ थीं आज यथार्थ यानि वास्तविकताएं | जैसे महाभारत में संजय का लाइव कमेंट्री करना धृतराष्ट्र के लिए और वह भी युद्धस्थल से दूर राजमहल में बैठे बैठे | रामायण का पुष्पक विमान, किसी ऋषि द्वारा दूर किसी दूसरे राज्य में बैठे अपने शिष्य या भक्त की पुकार सुन लेना | आज यह सब यथार्थ है क्योकि हमारे पास उड़न खटोला यानि हेलिकॉप्टर है, पुष्पक विमान यानि सुपर सोनिक जेट हैं, टेलीविजन हैं, रेडिओ है, मोबाइलफोन है जिससे हम दूर बैठे किसी से भी बात कर सकते हैं उनका हाल चाल जान सकते हैं |किसी ऋषि, देवता या राक्षस का किसी एक स्थान से अदृश्य होकर दूसरे स्थान में प्रकट हो जाना जिसे हम आज वर्चुअल रियलिटी के नाम से जानते हैं |

लेकिन यह सब जब नहीं थे, तब लोगों ने कल्पनाएँ कैसे कर लीं इन सब चीजों की ? जब बल्ब नहीं था, जब इलेक्ट्रिसिटी नहीं थी, तब एक अनपढ़ एडिसन ने इनकी न केवल कल्पना कर ली, बल्कि आज उसी की मेहनत के कारण, हम सब के घर में रौशनी है बिना मशाल और लालटेन के |

हम जब किसी बात को काल्पनिक कहकर मजाक उड़ाते हैं, जब असंभव कहकर मुँह बिचकाते हैं, तब ज़रा अपने हाथ में रखे मोबाइल फोन पर एक नजर अवश्य डाल लें | कभी संजय का लाइव कमेंट्री करना काल्पनिक माना जाता था आज हर कोई लाइव कमेंट्री से परिचित है, और विशेषकर क्रिकेट के शौक़ीन लाइव कमेंट्री से बहुत अच्छी तरह से परिचित हैं |

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जब कभी किसी बात को काल्पनिक कहकर मजाक उड़ाया जाता है, तब दशरथ माँझी के विषय पर अवश्य चिंतन मनन करियेगा, जिसने अकेले ही पहाड़ काटकर वह काम कर दिखाया, जो शक्तिसंपन्न सरकार नहीं कर पायी, जो धार्मिकों की भीड़ नहीं कर पायी, जो खुद को भगवान् मानते हैं, वे नहीं कर पाए थे |

तो भुत प्रेत भी कल्पना और यथार्थ का संगम हैं | मुझे बचपन में बहुत भुत-प्रेत दिखाई देते थे जिसकी वजह से मेरी रूचि जगी थी तंत्र-मन्त्र व साधनाओं में | मेरे पिताजी के पास एक पुस्तक थी ‘


Miracle Spiritology’ (Jun 1, 1975by Al G. Manning).

यह पुस्तक मैंने ग्यारह-वर्ष की उम्र में ही पढ़ ली थी | उसके बाद कई प्रयोग किये और सोलह सत्रह वर्ष की उम्र तक प्रयोग करता था कई प्रकार के | बहुत कुछ समझा और बहुत कुछ जाना क्योंकि मैं संदेह भी करता हूँ तो जानने के लिए समझने के लिए | आधुनिक वैज्ञानिक या धार्मिक विद्वानों की तरह किसी को गलत सिद्ध करने के लिए नहीं, इसीलिए सहजता से बहुत कुछ सीख व समझ गया |

लेकिन मैं यहाँ आपको भुत-प्रेत वशीकरण या उनके चमत्कारिक किस्से कहानियाँ नहीं सुनाने जा रहा | इन सबके लिए तो ढेर सारी पुस्तकें हैं, धार्मिक ग्रन्थ हैं, हदीसें हैं, पुराण हैं…..आप सहजता से वहाँ पढ़ सकते हैं | वशीकरण आदि की भी ढेर सारी पुस्तकें सड़कों के किनारे मिल ही जाती हैं….आप पढ़ सकते हैं |

मैं यहाँ केवल यह बताने जा रहा हूँ कि भुत-प्रेत वास्तव में होते हैं | पहले भी थे और आज भी हैं |

क्रमशः…..शेष भाग शीघ्र ही….
काल्पनिक नहीं यथार्थ हैं भूत-प्रेत, दैत्य, दानव ! शीर्षक से…..तब तक आप कमेन्ट बॉक्स पर आपने विचार व्यक्त रख सकते हैं.

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Sanjay visnoi
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Sanjay visnoi

गुरु जी, हमारा मस्तिष्क यदि धारणा बना लेता है कि भूत-प्रेत होते है तो व्यवहार में भी आभास होने लग जाता है कि वास्तव में ऐसा होता है। मैंने आज तक भूत-प्रेत के अस्तित्व को हमेशा अस्वीकार ही किया है तथा ना ही मेरा कोई अनुभव रहा है। अतः मुझे लगता है ऐसा कुछ नहीं होता है। यह केवल हमारी कल्पनाओं पर आधारित होता है। आपके शेष लेख का इंतजार रहेगा… बढ़िया लेख..

Raj Aryan Suryavanshi
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Raj Aryan Suryavanshi

लाजवाब तरीका समझाने का,
ब्यक्तिगत रूप से मैं खुद को आधुनिक मानता हूं,पर कुछ रहस्य और अनुभव ऐसे हैं जिसकी वजह से एक दिन मैं विस्वास करने लगा इन शक्तियों में,पर सतग ही ये भी की इनसे कहीं ज़्यादा शक्तिया मेरी आत्मा में है हालांकि मेरा ज़िस्म कमज़ोर पड जाता है कभी जब इनका असर होता है पर कुछ समय बाद ही मेरी आत्मा या कुंडली मुझे इनसे ज़्यादा ताकतवर बना देती है और इनका असर ख़तम हो जाता है।
आपके अगले पार्ट का बहुत बेशब्री से प्रतीक्षा रहेगी।
साधुवाद

Ajay yadav
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Ajay yadav

अच्छी व्याख्या किया आपने गुरु जी, मैंने कहीं पढ़ा था कि सब मानने पर निर्भर है – ढंग से मान लिया तो ये सब होते हैं और दिखाई भी पड़ेंगे और न माने तो कहीं कुछ नही