काल्पनिक नहीं यथार्थ हैं भूत-प्रेत, दैत्य, दानव !

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क्या भूत-प्रेत, दैत्य, दानव,वास्तव में होते हैं ? से आगे…

विडियो आपने देख ली होगी और यदि नहीं देखी है तो पहले देख लीजिये, फिर आगे पढ़िए….

जब भी भूत-प्रेत से सम्बंधित कोई भी बात हो, तो पढ़े-लिखे लोग और स्वयं को आधुनिक वैज्ञानिक सोच का मानने वाले मजाक उड़ाना शुरू कर देते हैं | कुछ कहते हैं कि हमने तो कभी देखा नहीं, हमें भी दिखाओ….मानो भुत-प्रेत कोई पालतू जानवर हो या किसी चिड़ियाघर में रखा हो जो उन्हें भी दिखा दी जाए | उनका अविश्वास करना स्वाभाविक ही है क्योंकि जो चीज उन्होंने देखी ही नहीं उसपर विश्वास भला क्यों कर लें ?

किसी जन्मजात अंधे को आप इन्द्रधनुष नहीं दिखा सकते, उसे नहीं समझा सकते कि इन्द्रधनुष में सात रंग होते हैं | वह तर्क करेगा कि यदि रंग नहीं दिखा सकते, तो कम से कम हमारे हाथ में ही रख दो, आखिर धनुष ही तो है ? किसी न किसी चीज की तो बनी ही होगी, तो हम हाथ से छूकर पता कर लेंगे कि वह धनुष है भी या नहीं ?

बस बिलकुल ऐसी ही स्थिति होती है भुत-प्रेत दैत्य दानवों के विषय में जब भी चर्चा होती है, तब पढ़े-लिखे आधुनिक विद्वानों की | लेकिन जैसा कि मैंने कहा पिछले लेख में कि मैं भुत-प्रेत, दैत्य, दानवों के विषय में कोई चमत्कार या महिमा नहीं सुनाने जा रहा | मैं तो केवल यह समझाने व प्रमाणित करने जा रहा हूँ कि ये सब पहले भी थे और आज भी हैं, कोई काल्पनिक चरित्र नहीं हैं |

भुतप्रेत, दैत्य, दानव, पिशाच, ब्रह्मराक्षस, डायन

भूत का अर्थ तो आप सभी जानते ही हैं ! भूत का अर्थ होता है जो बीत चुका अर्थात जो पहले कभी आस्तित्व में था लेकिन अब नहीं | जो घटना घट चुकी वह भूतकाल है |

भूत-प्रेत व बाकी सभी संबोधन उनके लिए हैं, जो भौतिक शरीर त्याग चुके किन्तु उनका प्रभाव अभी तक है | वे सूक्ष्म शरीर में विचरण करते हैं और प्रभावित करते हैं वातावरण को, मानव व पशु जीवन को अपनी नकारात्मक उर्जा से |

विज्ञान भी यह स्वीकरता है कि उर्जा कभी नहीं मरती, केवल रूपांतरित होती है | सभी जीव जंतुओं के भौतिक शरीर को चलाने के लिए उर्जा कार्य करती है | उस उर्जा को हम प्राण, आत्मा, रूह और Spirit के नाम से जानते हैं | तो जब ये उर्जा शरीर का त्याग कर देती है किसी भी कारणवश, तब वह मिट नहीं जाती केवल भौतिक शरीर विहीन हो जाती है | और वही उर्जा, वही शक्ति जब दूसरों के जीवन में प्रभाव डालने लगे, दूसरों को प्रभावित करने लगे, तब उसे हम भूत-प्रेत, दैत्य, दानव, पिशाच, ब्रह्मराक्षस, डायन…आदि के नाम से जानते हैं |

अब ये सब बाते तो कोई नई नहीं बता रहा, आपकी धार्मिक ग्रंथों में यह सब लिखा ही हुआ है | लेकिन हम भारतीयों व एशियाई मूल के देशों में थोड़ा आगे भी लिखा गया है और वह पुनर्जन्म पर |

पुनर्जन्म

अब आप कहेंगे कि भुत-प्रेत के विषय में बताते बताते ये पुनर्जन्म का विषय बीच में क्यों ले आया ?

लेख के शुरू में ही आपने एक विडियो देखा, जिसमें एक बच्चा वाहन चलाता दिखता है | क्या जो विशेषताएं आपने उस बच्चे में देखीं, वही विशेषताएं सभी बच्चे में देखने मिलती हैं ?

किसी बच्चे की रूचि किसी विषय में होती है, तो किसी बच्चे की रूचि किसी दूसरे विषय में | एक ही माता-पिता से जन्में बच्चों के स्वभाव, व्यव्हार व रुचियों में अंतर देखने मिलेगा | ऐसा क्यों होता है, उसपर बहुत ही कम लोग चिंतन मनन करते हैं |अधिकांश के पास तो समय ही नहीं होता कि वे अपने बच्चों की रूचि को जाने समझें | उन्हें तो लगता कि उन्होंने बच्चा पैदा किया है तो वह काम करने के लिए, जो वे खुद नहीं कर पाए | जैसे कोई खुद पढ़-लिख नहीं पाया, तो अपने बच्चे को मार-पीटकर पढ़ाना चाहता है, सरकारी नौकरी करवाना चाहता है या फिर डॉक्टर, इंजिनियर बनता हुआ देखना चाहता है | अब यदि वह संगीतकार बनना चाहे तो माता-पिता अपनी किस्मत को कोसने लगते हैं |

भूत-प्रेत व पुनर्जन्म

तो बच्चों में पिछले जन्म का प्रभाव देखने मिल जाता है | यदि उन्हें सही दिशा मिले, सही परवरिश मिले, तो वे पिछले जन्मों में सीखे गुणों से आगे की यात्रा करेंगे | यदि वे वही कर पाते हैं, जो वे करने आये हैं, तो वे सुखी रहेंगे चाहे उन्हें गरीबी में ही क्यों न जीना पड़े | लेकिन यदि उन्हें विवश किया जाये किसी दूसरे मार्ग पर चलने के लिए, तब वे असहज हो जायेंगे और आजीवन दुखी व अतृप्त रहेंगे चाहे वे करोड़पति ही क्यों न हो जाएँ |

एक जन्म से दूसरे जन्मों के बीच के अन्तराल में आत्मा भटकती रहती है | और इनमें वे आत्माएं भी होती हैं जो भ्रष्ट नेता रह चुके, ठग व बदमाश रह चुके, बलात्कारी रह चुके पिछले जन्म में | यदि उनमें कोई सुधार न हुआ, तो वे जन्म लेने के बाद वही सब करेंगे जो पिछले जन्म में करते रहे |

इन दुष्टात्माओं को जन्म लेने में सबसे अधिक सहयोग करते हैं वे माता-पिता, जो भ्रष्टाचारियों के सहयोगी होते हैं, जो अपनी कायरता के कारण अपराधियों, भ्रष्टाचारियों, हत्यारों को वोट देकर सत्ता सौंपते हैं, उनके हर गलत कार्यों का समर्थन करते हैं | लेकिन स्वयं समाज में धार्मिक व सदाचारी होने का ढोंग करते फिरते हैं |

अब यदि हम ध्यान से देखें, तो जितने भी तथाकथित सभ्य व धार्मिक लोग हैं, वे सभी अनैतिकता, भ्रष्टाचार, अपराध, बलात्कार के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष समर्थक ही हैं | और ये वही लोग हैं जो कभी भूत-प्रेत बनकर भटक रहे थे और मानव शरीर मिला, तब भी नहीं सुधरे | अब चूँकि ये स्वयं नहीं सुधरे, तो इनकी संताने पुण्यात्मा कैसे हो सकतीं हैं ?

आज अधिकांश मानव शरीर धारी प्राणी, भूत-प्रेत, दैत्य, दानव, डायन ही हैं | बस इन्होने धार्मिकता के मुखौटा लगा रखा है | इन्हें ईश्वर से कोई भय भी नहीं है, इन्हें भय केवल समाज से है कि कहीं कोई इनकी वास्तविकता न पहचान जाए | इसीलिए ये लोग अधिक से अधिक धार्मिक होने का दिखावा करते हैं, अधिक से अधिक पूजा पाठ का ढोंग करते हैं |

ये तथाकथित धार्मिक लोग केवल एक प्रतिशत भले लोगों की आढ़ लेकर अपनी वास्तविकता छुपाये रहते हैं | लेकिन जैसे ही इन्हें अवसर मिलता है, ये धर्म व जाति के नाम पर उत्पात मचाने लगते हैं | ये धर्म व जाति के नाम पर समाज में नफरत का ज़हर बोने लगते हैं |मोबलिंचिंग जैसे कुकृत्यों में शामिल हो जाते हैं, दंगे और आगजनी में शामिल हो जाते हैं | क्योंकि ये जानते हैं कि बहुमत इन्हीं का है, इसलिए नफरत की खेती इनकी बहुत फलती फूलती है | धर्म व जाति के नाम पर उत्पात करने के लिए हजारों लाखों की भीड़ इकट्ठी हो जायेगी, लेकिन किसी भले कार्य के लिए कोई इक्का दुक्का ही सामने आएगा |

धर्म व जाति के नाम पर नफरत फैलाने वालों के सहयोग के लिए लाखों लोग चंदा दे देंगे, पुलिस से लेकर कोर्ट-कचहरी तक हर प्रकार का सहयोग उन्हें मिलेगा चाहे वे कितने ही जघन्य अपराध क्यों न कर रखे हों | लेकिन किसी भले कार्य के लिए कोई अपनी जेब ढीली नहीं करना चाहेगा | और जो कर भी कर रहे होते हैं, थोड़ा बहुत, तो वे भी व्यक्तिगत स्वार्थों को महत्व देते हैं |

आज आप नेताओं, धर्म व जाति के ठेकेदारों के रूप में जिन्हें देख रहे हैं, उनमें अधिकाँश वही भूत-प्रेत, दैत्य, दानव, पिशाच, ब्रह्मराक्षस, डायन आदि ही हैं, जिनके आधार पर काल्पनिक कहानियाँ लिखी गयीं | ये कभी काल्पनिक अवश्य रहे होंगे, लेकिन आज वास्तविकताएँ हैं | आज हम भूत-प्रेत, दैत्य, दानव, पिशाचों से भरे समाज में ही जी रहे हैं | पहले जनसँख्या कम थी, इसलिए ये कम थे, आज इन्हीं का साम्राज्य है, इन्हीं का बहुमत है | इसीलिए ईमानदार व्यक्ति की कोई कीमत नहीं, इसीलिए धूर्त, मक्कारों की जय-जयकार हो रही है | क्योंकि साम्राज्य दैत्यों, दानवों और पिशाचों का ही फैला हुआ है |

  • दैत्य, दानव, पिशाच आदि उन्हें कहा जाता है, जिनके पास असीम शक्तियाँ होती हैं | अर्थात सत्ता और पुलिस जिनके सामने नतमस्तक रहती है |
  • जैसे कि गौरक्षकों के भेस में भटकती प्रेतात्माएं जो खून की प्यासी होती हैं और किसी भी कमजोर, दरिद्र व्यक्ति को अपना शिकार बना लेती है |
  • भूमाफियाओं के पालतू कुछ पिशाच सैनिक या पुलिस के भेस में, आदिवासियों व किसानों की भूमि हथियाने के लिए उनकी स्त्रियों को उठा ले जाते हैं पूछताछ के नाम पर और अपनी हवस मिटाकर गोली मार देते हैं |
  • जैसे कि भूमि हथियाने के लिए हत्याएं करवाने वाले पिशाच जिन्हें आज हम भूमाफिया के नाम से जानते हैं |
  • जैसे कि अपनी सत्ता बचाने के लिए धर्म व जाति के नाम पर समाज को आपस में लड़ाने वाले पिशाच, जिन्हें हम धार्मिक व राजनैतिक नेताओं के रूप में जानते हैं |

ये सभी वही दुष्टात्माएं हैं, जिन्हें हम प्रेत, पिशाच, दैत्य, दानव आदि के नाम से जानते हैं | ये हम सभी के बीच रहते हैं कोई आसमान में नहीं भटक रहे होते | इन्हें आप हरा नहीं सकते केवल कुछ समय के लिए दबा ही सकते हैं | क्योंकि समाज में इन्हीं के  सहयोगी भरे पड़े हैं, इन्हीं के साथी समाज में फैले हुए हैं | इनकी पहचान भी बहुत आसान है….बस अपने आसपास देखिये, कोई मिलावटखोर, कोई रिश्वतखोर, कोई धर्म व जाति के नाम पर नफरत फैलाने वाला, कोई दहेज़ के लिए हत्या करने वाला, कोई धूर्त मक्कार नेता की चाटुकारिता करने वाला नजर आये, तो समझ जाइएगा कि भूत-प्रेत, दैत्य, दानव, पिशाच काल्पनिक नहीं है, वास्तविक है और वह आपके आसपास ही है |

~विशुद्ध चैतन्य

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