एक जुट होकर आतंकियों के विरुद्ध आन्दोलन छेड़ दें

हिन्दुओं में तो कोई उपद्रव करता है तो हिन्दू स्वयं को उपद्रवियों से अलग कर लेते हैं, जैसे ब्राह्मण हुए तो और यादव हुए तो वे अलग…. सभी हिन्दू उसे अपने ऊपर नहीं लेंगे इसलिए हिन्दू आतंकवाद से जल्दी मुक्त हो जाते हैं | नक्सली भी राजनैतिक ही है क्योंकि नेता नहीं चाहें तो ये नक्सली भी नहीं होंगे | ये उनकी छीनी हुई जमीनें उन्हें वापस कर दें या फिर व्यापारियों से उनको उचित मुवावजा दिलवा दें तो कोई क्यों जंगलों में भटकना चाहेगा ?

इसी प्रकार यदि मुस्लिम भी अपनी उन शाखाओं को जिहाद के नाम पर वीभत्स रूप ले चुकी है उसे स्पष्ट रूप अलग दिखाए तो बाक़ी सभी मुस्लिम भी सुरक्षित हो जायेंगे | अभी तक तो हम हिन्दू भी नहीं जानते थे कि जिहाद की कुरान में पहली ही व्याख्या हैं;

“जिहाद अल-नफ़स” यानी खुद की बुराइयों के खिलाफ जंग है.

“रूह और उसे मुकम्मल बनाने वाला (अल्लाह) बताता है कि क्या नेक है और क्या बद है. वही कामयाब है जो इसे पाक बना सके” (सूरह अल-शम्स, कुरान, 91: 7-9)

तुम क़त्ल मत करो क्योंकि अल्लाह ने ज़िंदगी को पवित्र बनाया है “सूरह अल-अनम, कुरान 6:151)

जब ऐसा है तो फिर अचानक वह जिहाद कहाँ से आया जो इंसानों का, यहाँ तक की मासूम बच्चों का खून बहाना इस्लाम का हिस्सा बन गया. दुनिया भर में “इस्लामी” आतंकवाद खतरा बन के मंडराने लगा. यकीनन यह आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए खतरा है पर कहाँ से आया यह खतरा? Read more

अभी तो सारी दुनिया को यही पता है कि क़ुरान और इस्लाम के नाम पर ही सारे नरसंहार किये जा रहे हैं | जिस प्रकार राम और गीता के नाम पर संघियों की xyz सेनाएं उपद्रव कर रहे हैं | परिणाम यह हो रहा है कि दुनिया तेजी से नास्तिक होती जा रही है और आपसी एकता और सहयोगिता का भाव कम होता जा रहा है | इसका ये विकृत मानिसकता के धार्मिक उन्मादी लोग लाभ उठा रहे हैं और हजारों की संख्या में निर्दोषों और मासूमों को मार रहे हैं | और बचे हुए लोग यह सोच कर खुश हो रहे हैं कि हम तो सुरक्षित हैं |

READ  लेकिन हम (हिन्दू-मुस्लिम) लोग कर क्या रहे हैं ?

यदि सभी एक जुट होकर आतंकियों के विरुद्ध आन्दोलन छेड़ दें, चाहे फेसबुक से ही शुरू करें और नफरत के बीज बोने वालों को ब्लॉक करना शुरू कर दें, जो मुस्लिम जिहाद के विकृतरूप का समर्थन नहीं करते वे भी खुलकर विरोध करने लगें तो जल्दी ही हम इनपर काबू पा लेंगे | ~विशुद्ध चैतन्य

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