ज्योतिषी ने यह भविष्यवाणी मेरे बचपन में कर दी थी

आजकल देख रहा हूँ कि लोग ज्योतिष का कुछ आवश्यकता से अधिक ही मजाक उड़ाने लगे हैं | और उसका कारण भी है क्योंकि ज्योतिष केवल गणित नहीं आध्यात्म भी है | और वर्तमान ज्योतिष उसे आध्यात्म की जगह सामान्य गणित की तरह सीख व समझ रहे हैं | कई लोगों ने तो पत्राचार से ज्योतिषी सिखाने के स्कूल खोल रखे हैं क्योंकि ज्योतिष का स्तर गिरते गिरते अब डिग्रियों पर निर्भर हो गया |

बचपन में हमारे गाँव के दादू राम पुरो

हित जी से पिताजी ने मेरी कुंडली बनवाई | वे न तो अंग्रेजी जानते थे और न कि किसी विलायती (कान्वेंट) स्कूल से शिक्षा प्राप्त थे | गाँव के ही स्कूल में थोड़ा बहुत पढ़ लिए थे और फिर अपना खानदानी काम पुरोहिती शुरू कर दिया था |

जब उन्होंने मेरी कुंडली बनाई तब मेरी उम्र नौ वर्ष की थी और मैं बहुत ध्यान से उनकी बातें सुन रहा था | उस समय जब कुंडली बनाई जाती थी तब घर में पूरा अध्यात्मिक वातावरण हो जाता था | अगरबत्ती, धुप बत्ती, पूरा परिवार पंडितजी को घेर कर बैठे हुए और बहुत ही चिंतन मनन करते पंडित जी, एक एक लाइन कहने में घंटों लगाते और कई तरह की पुस्तकें खोलकर उनसे मिलान करते……|

उन्होंने बताया कि यह लड़का बैरागी हो या घर से बाहर ही रहने वाला होगा | यह घर में किसी प्रकार का सहयोग नहीं देगा… इसकी रूचि तंत्र-मन्त्र व ज्योतिष में रहेगी और आजीविका अभियांत्रिकी से होगी या फिर लेखन आदि से….

यदि मैं पीछे लौटकर देखूं तो पाता हूँ कि जो भविष्यवाणी उस गाँव के ज्योतिषी ने की थी फिर वैसी सटीक भविष्यवाणी कोई और नहीं कर पाया | मेरी आजीविका बनी इलेक्ट्रोनिक्स और ब्रॉडकास्ट मिडिया और नाम शोहरत सबकुछ पाया… लेकिन भीतर एक बैचेनी मुझे उन सुखों को भोगने नहीं दिया और मैं आज उस स्थिति में हूँ जहाँ स्वयं में हूँ और वही हूँ जो मुझे होना था | जबकि ज्योतिषी ने यह भविष्यवाणी मेरे बचपन में कर दी थी | और यह सब बिना किसी प्रयास के स्वतः होते चले गये | मैं जहाँ भी गया..कंप्यूटर या इलेक्ट्रॉनिक्स स्वयं मेरे पास आ गए चाहे मेरे पास फूटी कौड़ी भी न रही हो उन्हें खरीदने के लिए | आज भी जो आश्रम प्रमुख जानते हैं वे पूजा पाठ के लिए नहीं, बल्कि कंप्यूटर और डिजाइन से सम्बंधित विषयों के लिए ही बुलाते हैं…..

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सारांश यह कि ज्योतिषी यदि ज्योतिष को केवल गणित के रूप में देखता है तो वह अधुरा है | कंप्यूटर में भी लोग निकालते हैं कुंडली…लेकिन वह भी सटीक नहीं होती.. क्योंकि कंप्यूटर आध्यात्म तक कभी पहुँच नहीं सकता | -विशुद्ध चैतन्य

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