पुलवामा हत्याकाण्ड

मोदी ने कहा था कि उसके राज में एक भी आतंकी हमला नहीं हुआ और आतंकियों ने हमला कर दिया | हमला भी ऐसा कि बरसों बाद इतना बड़ा हमला हुआ है | 350 किलो विस्फोटक और 42 जवान शहीद |

आज हर कोई इस घटना की निंदा कर रहा है, सैनिकों को श्रद्धान्जली दे रहा है | मोदी भक्त कह रहे हैं कि कम से कम इस घटना को लेकर मोदी का विरोध मत करो, बल्कि सैनिकों की मौत का मातम मनाओ | और यही लोग कांग्रेस राज में ऐसी ही घटनाओं पर सरकार को घेरते थे, मनमोहन सिंह को कोसते थे | डायलॉग मारते फिरते थे, कि हमारी सरकार होती तो एक के बदले दस सर लेकर आते, पाकिस्तान में घुस कर मारते, पाकिस्तान का नामो निशां मिटा देते | अब कहते हैं कि मोदी को कुछ मत कहो |

बरसों से यही सब देखता आ रहा हूँ, लगभग हर चुनावी सीजन के आसपास ही ऐसी कोई घटना घट जाती है, सारे अहम मुद्दे दबा दिए जाते हैं | फिर दो देशों के बीच परस्पर आरोप प्रत्यारोप चलते हैं, यूँही खेलते खेलते चुनावी सीजन बीत जाता है और सब कुछ भुला दिया जाता है अगले चुनाव तक के लिए |

कल ही किसी शहीद के परिवार के विषय में पढ़ रहा था कि उनके घर में खाने के लाले पड़े हुए हैं, छोटी छोटी बच्चियाँ हैं….ये श्रृद्धांजलि देने वाले कहाँ मर जाते हैं ? ये सैनिकों को महान बताने वाले कहाँ मर जाते हैं ? क्या शहीदों के परिवार की कोई खोज खबर भी लेता है, या केवल रस्मअदायगी ही होती है ये दुःख प्रकट करना, ये शोक का दिखावा करना, ये श्रृद्धांजली देना ?

READ  सनातन धर्म सिमट कर हिन्दू धर्म हो गया और धर्म खतरे में पड़ने लगा.....

सैनिको को श्रृद्धांजली जबानी खर्च से नहीं, पाकिस्तान स्थिति आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करके ही दिया जा सकता है और वह भी त्वरित कार्यवाही से यानि शहीदों की तेरहवीं से पहले | पाकिस्तान की अवाम से कोई बैर नहीं हमारा, इसीलिए पाकिस्तान को सहयोग करना होगा चाहे मन मारकर करे | यदि पाकिस्तान सहयोग न करे, तो भारत को ठोस कदम उठाना चाहिए और पाकिस्तान में घुस कर आतंकियों का सफाया बिलकुल वैसे ही करना चाहिए, जैसे अमेरिका ने अफगान और पाकिस्तान में किया |

इससे कम कुछ भी स्वीकार नहीं |

सिर्फ आतंकियों को दोष देने से काम नही चलेगा।उनका तो ये काम है।वो तो हमेशा ऐसी हरकतों की फिराक मे रहते हैं।लेकिन मामला…

Posted by Sandeep Ohlan on Thursday, 14 February 2019

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of