गालियों और मन्त्रों का प्रभाव व दुष्प्रभाव

इस दीवार को देखिए ! क्या आप अपने घर की दीवार इसी प्रकार रंगीन देखना पसंद करेंगे ? क्या आपके मित्र व परिचित ऐसी दीवार के पास बैठकर चर्चा करना पसंद करेंगे ?

पर्सनल आईडी और फेसबुक पेज, दो अलग अलग उद्देश्यों के लिए होते हैं । पर्सनल आईडी या प्रोफाइल पेज अपने घनिष्ट मित्रों व परिचितों जुड़ने के लिए होते हैं । जबकि फेसबुक पेज सार्वजिनक या व्यापारिक उद्देश्यों के लिए होते हैं ।

जो भी पोस्ट हम लिखते हैं या शेयर करते हैं वह जहाँ शो होती है, उसे टाइम लाइन या वाल यानी दीवार कहते हैं ।

कुछ लोगों की बहुत बुरी आदत होती है थूकने की । गुटखा या पान मुँह में भरे रहते हैं और जहां भी अवसर मिला थूक देते हैं । आपने शहरों में ऐसी कई दीवारें देखी होंगी, जहाँ महान थुक्कड़ों की रंगीन कलाकारी देखने मिलती है ।

इसी प्रकार कुछ लोग गालियों व अभद्र शब्दों से भरे रहते हैं । इनकी भी आदत थुक्कड़ों से अलग नहीं होती । चलते फिरते किसी के भी पोस्ट पर गालियों की पीक मारकर निकल पड़ेंगे अपने बाप की दीवार समझकर । पूरी वाल यानी टाइमलाइन को बिल्कुल सार्वजनिक वाल की तरह रंगीन बना देंते हैं ये लोग ।

अब जरा सोचिए कि क्या आप अपने घरों की दीवारों को इन थुक्कड़ों की कलाकारी से रंगीन देखना पसंद करेंगे ?

मैं तो पसंद नहीं करता, इसीलिये ऐसे थुक्कड़ों को अपनी फ्रेंडलिस्ट में नहीं रखता । क्योंकि इनके गंद फैलाने की वजह से मेरी वाल भी रेलवे स्टेशनों की वाल की तरह रंगीन हो जाती है और कोई भी सभ्य व्यक्ति वहाँ खड़े होना भी पसंद नहीं करता, चर्चा करना तो दूर की बात है ।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और गालिया

आप माँसाहारी नहीं हैं क्योंकि आप उस पारिवारिक पृष्ठभूमि से हैं जहाँ माँसाहार वर्जित है |
यदि आपको किसी माँसाहारी के साथ रहना पड़े, तब आपके लिए कठिनाई हो जाती है | आप बहुत असहज महसूस करते हैं |

READ  अब चूँकि लोग अशिक्षित थे अनपढ़ थे तो उन्हें क्या पता कि GOD किसे कहते हैं ?

ठीक इसी प्रकार मैं गालीबाजों के साथ सहज नहीं रहता | चाहे मुझे सभी गालियाँ आती हों, आवश्यकता पड़ने पर उनका प्रयोग भी करता हूँ, लेकिन फिर भी मैं उन लोगों के साथ सहज नहीं हूँ जिनके वाक्य बिना गालियों के पूरे नहीं होते |

क्योंकि मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि गालीबाजों की नहीं रही | हमारा परिवार एक बहुत ही सभ्य परिवार माना जाता था | मैंने जिस स्कूल से शिक्षा प्राप्त की, उसमें गालियाँ वर्जित थीं | यदि कोई शिकायत भी कर देता कि किसी बच्चे ने गाली दी, तो चार बेंत हाथ में पड़ते थे और मुर्गा बनना पड़ता था पूरे पीरियड के लिए वह अलग | और यह नहीं कि स्कूल में ही गाली दी हो तब सजा मिलती थी, स्कूल के बाहर भी कहीं बाजार या मोहल्ले या कहीं भी गाली दी किसी को, तो अगले दिन वह स्कूल में शिकायत कर देता था | और हमारा स्कूल भारतीय अदालतों के सिद्धांत पर नहीं चलता था | त्वरित कार्यवाही होती थी |

यदि प्रेयर के समय किसी ने शिकायत कर दी, तो प्रेयर समाप्त होते ही हेडमास्टर साहब सजा सुना देते थे | और यदि क्लास में शिकायत हुई तो तुरंत ही क्लास में ही सजा मिल जाती थी |

यह और बात है कि अब दुनिया बहुत आगे बढ़ गयी है | अब गाली देना पढ़े-लिखे होने की निशानी है | जो गाली न दे वह गँवार माना जाता है

मंत्रोच्चार और गालियाँ

मंत्रोच्चार, नाम-जाप का जो महत्व है, वही गालियों का भी है | बस अंतर इतना है कि नाम-जाप, मंत्रोच्चार साकारत्मक व सृजनात्मक उर्जा उत्पन्न करते हैं और गालियाँ नकारात्मक व विध्वंसक उर्जा उत्पन्न करते हैं | मंत्रोच्चार हो रहा हो, नाम जाप हो रहा हो और उच्चारण करने वाला व्यक्ति किसी को दिखाने या सुनाने के लिए, नहीं अपने में मस्त होकर कर रहा हो, तब उसके आसपास का वातावरण बहुत ही शुद्ध, शांत व शीतलता प्रदान करने वाला हो जाता है | उसके पास बैठने का मन करता है, बैठकर शान्ति से उसे उनने का मन करता है | वहां बैठकर मन को बहुत ही शान्ति मिलती है |

READ  इस प्रकार मैंने जाना कि ऋषि प्रजाति के लुप्त होने के बाद से धर्म प्रकृति के विरुद्ध हो गया

लेकिन वहीँ यदि कोई गालियाँ बक रहा हो तो आप शान्ति से भरे बैठे हों, तब भी आपके भीतर बेचैनी उत्पन्न हो जाती है | आपकी भंवें तन जाती है, क्रोध उत्पन्न हो जाता है, शरीर में तनाव आ जाता है, और मन करता है जाकर दो बजाएं गाली बकने वाले के कनपटी के नीचे | ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गालियों के साथ नकारात्मक विकृत उर्जा का प्रवाह होता है | जो वायुमंडल को दूषित कर देता है | उसके दुष्प्रभाव से आपका मस्तिष्क भी दूषित हो जाता है और पलट कर आप भी गालियाँ ही निकालते हैं |

तो नाम जाप करना, या राम राम कहना या किसी भी ईष्ट का नाम जपना मन को सकारात्मकता प्रदान करता है |जबकि गालियाँ बकना मन को उग्र करता है, बेचैन करता है, हिंसक बनाता है |

मैंने अपने अनुभवों से जाना है कि जो जितना अधिक धार्मिकता का प्रदर्शन करता है, वह उतना ही अधिक गालियाँ बकता है | विशेषकर जिनका सरनेम शर्मा, वेदी, द्विवेदी, त्रिवेदी, चतुर्वेदी….या ब्राह्मण कुल से जुड़ा हो | शायद उन्हें इस बात का भान नहीं कि उनके सरनेम की क्या गरिमा है | उनके लिए तो बस सरनेम मात्र ही होता है, वास्तव में वे कोई ब्राहमण तो होते नहीं | पूर्वज ने कभी अपने श्रम, त्याग, व तपस्या से उच्च शिक्षा प्राप्त की और द्विवेदी, त्रिवेदी, चतुर्वेदी जैसी उपाधियाँ प्राप्त कर ली तो बस उसे ही ढोए चले जा रहे हैं | इनकी स्थिति बिलकुल वैसी ही होती है, जैसे किसी पायलट का वंश अपने सरनेम में पायलट लगा ले या डॉक्टर का वंश अपने सरनेम में डॉक्टर लगा ले | फिर भले किसी चाय बीडी की दूकान या रेहड़ी चला रहा हो |

READ  मैं समर्थन करूँगा इस कानून का यदि भारत में भी ऐसा ही हो जाये तो |

ऐसे धार्मिक लोग ईश्वर का नाम दिन में जितनी बार नहीं लेते, उससे कई गुना अधिक बार गालियों का जाप करते हैं | और जो व्यक्ति जिस शब्द या वाक्य का जाप प्रतिदिन सर्वाधिक करता है, उसी का प्रभाव उसके आसपास बन जाता है | यदि अच्छे वाक्यों या शब्दों का प्रयोग व्यक्ति अधिक करता है, तब उसे सुख समृद्धि प्राप्त होती है, दरिद्र परिवार में जन्म लेने के बाद भी उच्च पद प्राप्त करके सुख वैभव ऐश्वर्य भोगने का अवसर मिलता है | वहीँ व्यक्ति यदि दूषित विकृत शब्दों या वाक्यों का प्रयोग अधिक करता है, तो भले ही राजकुल में जन्म लिया हो, वह दरिद्र होता चला जाता है | दुनिया भर के केस मुकदमों में फंसते चला जाता है, और कई बार जेल की सजा तक भुगतनी पड़ जाती है |

गालीबाज लोगों का व्यक्तिगत जीवन क्लेशों से भरा रहता है, कर्जों की बोझ, जीवन साथी से अनबन और बुढापे में बच्चों की दुत्कार झेलना पड़ता है |

यह सब मैंने देखा है दुनिया में घटते हुए इसीलिए ही अच्छी तरह से समझता हूँ कि गालियों और मन्त्रों का क्या प्रभाव पड़ता है जीवन में | अतः आप सभी से आग्रह है कि गालियों का प्रयोग कम से कम करें और हो सके तो बिलकुल ही त्याग दें गालियों की आदत | क्योंकि यह शराब से भी अधिक हानिकारक व विध्वंसक है | दूसरों का नुक्सान कुछ नहीं करती, लेकिन आपका अपना बहुत नुक्सान करती है |

~विशुद्ध चैतन्य

2
लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
1 Comment threads
1 Thread replies
2 Followers
 
Most reacted comment
Hottest comment thread
2 Comment authors
विशुद्ध चैतन्यराज कुशवाहा Recent comment authors
  Subscribe  
newest oldest most voted
Notify of
राज कुशवाहा
Guest
राज कुशवाहा

बहुत खूब स्वामी जी बिल्कुल सच्ची बात है