राष्ट्रभक्ति और किंकर्तव्यविमूढ़ भारतीय समाज

शब्दों के अर्थ और परिभाषाएं बदल चुके हैं अब |

अब भक्त का अर्थ भक्ति नहीं, अंधभक्ति है | अब देशभक्ति का अर्थ देश के प्रति भक्ति नहीं, मोदी और भाजपा के प्रति भक्ति है | अब देशसेवा का मतलब देश की सेवा नहीं, पूंजीपतियों, माफियाओं और अपराधियों की सेवा है | अब दिव्यांग का अर्थ दिव्य, दमकने वाले अंगों का स्वामी नहीं, विकलांग या विकृत अंगों का स्वामी है | सूरदास का अर्थ स्वरों का दास नहीं, नेत्रहीन व्यक्ति है | अब राजनीति का अर्थ राष्ट्रीय हितों के लिए चिंतन, किसानों, गरीबों, शोषितों, पीड़ितों की चर्चाएँ नहीं, पार्टियों की आपसी छीछालेदर, लुच्चापन और गुंडागर्दी है |

अब हर वह व्यक्ति वामपंथी है जो सरकार से सवाल करता है, हर वह व्यक्ति नक्सलवादी है, जो आदिवासियों के हितों की बात करता है | हर वह व्यक्ति नक्सली है जो अपनी भूमि की रक्षा भूमाफियाओं से करने के लिए हथियार उठा लेता है | हर वह व्यक्ति देशद्रोही है जो मोदी के छिछोरेपन का मजाक उड़ाता है, झूठी ख़बरों की सच्चाई जानना चाहता है |

और आश्चर्य तो मुझे इस बात पर होता है सर्वाधिक कि जो देश बेच रहे हैं उनके समर्थक दूसरों को देशद्रोही बताते फिर रहे हैं | जो गद्धारों के साथ खड़े हैं वे कहते फिर रहे हैं कि संभल के रहना अपने देश में छिपे हुए गद्दारों से | यदि उस गीत को पूरा सुना होता, उसका अर्थ समझा होता, तो शायद किसी भी राजनैतिक पार्टी या नेता का समर्थक उस गीत का एक लाइन भी गाने-गुनगुनाने की हिम्मत नहीं करता यदि रत्तीभर भी शर्म उसमें बची हो तो |

देशभक्त या देशप्रेमी कौन ???

क्या आपके आसपास कोई देशभक्त नजर आता है ???

क्या आप स्वयं देशभक्त या राष्ट्रभक्त हैं ?

क्या साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ते, समाज में फूट डालते, युद्धोन्माद भड़काते, जहर उगलते नेता और टीवी चैनल्स देशभक्त हैं ?

रिश्वतखोर, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी देशभक्त हैं ?

कोई अस्पताल, कोई डॉक्टर, कोई वकील, कोई जज देशभक्त है ?

ये ज़ोम्बी की तरह जीने वाले बेरोजगार भटकते युवा देशभक्त हैं ?

यह देखिए दूसरों को राष्ट्रद्रोही का सर्टिफिकेट बाँटने वाले राष्ट्रभक्त

नहीं इनमें से कोई देशभक्त नहीं हैं ! हाँ, अपवाद स्वरुप इस भीड़ में कुछ देशभक्त मिल जाएँ तो अलग बात है |

नेताओं के लिए जयकारे लगाना, युद्धोन्माद भड़काना, समाज को आपस में लड़ाना कोई देशभक्ति नहीं है | झूठी खबरें चलाना कर जनता को उकसाना, अफवाहें उड़ाना, किसी नेता या राजनैतिक पार्टी से केवल नफरत करने के लिए नफरत करना देशभक्ति नहीं है |

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आपका सारा ध्यान देश के हितों की तरफ रहना ही देशभक्ति है | नेता या राजनैतिक पार्टियाँ कोई भी हो, यदि वे आपको देश हितों से सम्बंधित कार्य करते नहीं दिखते, गड्ढों से भरी सड़कें बनवाना बंद नहीं करते, माफियाओं का आतंक कम नहीं करते, उनके गुंडे-बदमाश यदि आपको धमकियां देते फिरते हैं, तो ऐसे नेताओं और राजनैतिक पार्टियों को अपने जूतों की नोक पर रखो | यही देशभक्ति है |

किसी भी व्यक्ति, नेता, या राजनैतिक पार्टी से ऊपर है देशहित | और देश नागरिकों से बनता है, न कि नारेबाजियों और जुमलेबाजियों से |

क्या हम विश्वगुरु हैं ?

हम इस भ्रम में जी रहे हैं कि हम विश्वगुरु हैं | वास्तविकता यह है कि विश्वगुरु होना तो दूर, हम भेड़चाल में चलने वाले ज़ोम्बी यानि जिंदा लाश बन चुके हैं | आज का पढ़ा लिखा डिग्रीधारी समाज तक अशिक्षित होता है | न तो उसे धर्म का कोई ज्ञान होता है और न ही सभ्य-शालीन भाषा का ज्ञान | सदियों से समाज पूजा-पाठ, कर्मकांड, रोजा-नमाज, रीतिरिवाज, मत-मान्यताओं को ही धर्म मानता चला आ रहा है और वास्तविक धर्म से अनभिज्ञ है |

नेताओं का जहाँ आदर्श स्थापित करना होता था पहले ज़माने में, जहाँ धर्मगुरुओं को आदर्श स्थापित करना होता था, आज वही लोग युवाओं और समाज को भ्रमित करने में व्यस्त हैं | क्योंकि आज के नेता और धर्मगुरु स्वयं गुंडों मवालियों और माफियाओं के सरगना होते हैं | आज समाज किसी भी सभ्य, शालीन व्यक्ति को अपने नेता के रूप में नहीं स्वीकारता क्योंकि सभ्य और शालीन व्यक्ति पर्याय बन चुका है कायरता और अधर्म का |

आज शालीन, सभ्य और धार्मिक उसे माना जाता है जो अधर्म को देखकर आँखें मूँद ले या भजमन नारायण, नारायण का कीर्तन करे | आज सभ्य, शालीन और धार्मिक उसे माना जाता है, जो नेताओं और राजनैतिक पार्टियों के तलुए चाटता है उनके हर अधर्म में मौन धारण किये रहता है या फिर सबकुछ जानते बूझते भी अनजान होने का ढोंग करता है

किसी ज़माने में न्यूज़ चैनल्स, न्यूज़ एंकर्स स्वयं आदर्श हुआ करते थे | लोग उन्हें केवल समाचारों के कारण ही नहीं सुनते थे, कॉलेज के लड़के लड़कियां उन्हें सुनकर अपनी भाषा को शुद्ध करते थे, शब्दों के सही उच्चारण को सीखते थे | कई लड़के लड़कियां उन्हें सुनकर शॉर्टहेंड की प्रेक्टिस किया करते थे | समाचार वाचक से यदि किसी शब्द में कोई त्रुटी हो जाती थी, तो तुरंत ही वह क्षमा भी मांग लेता था |

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लेकिन आज रखैल बनकर रह गये न्यूज़ एंकर्स | रत्ती भर भी सम्मान नहीं बचा उनके लिए | आज वे आदर्श नहीं बल्कि समाज में आग लगाने वाली प्रजाति बनकर रह गये |

किसी जमाने पर जब कोई अफवाह फैलती थी, तब न्यूज़ सुनकर पुष्टि करते थे | आज न्यूज़ चैनल स्वयं अफवाह फैला रहे हैं, स्वयं झूठी खबरें चला रहे हैं और बेशर्मी इतनी कि माफ़ी तक नहीं माँगते | और समाज भी इतना गिर चुका है कि कोई उन चैनलों के विरुद्ध न तो आवाज उठाता है और न ही उनका बहिष्कार करता है |

और हम भ्रम पाले बैठे हैं कि हम विश्वगुरु हैं | हम भ्रम पाले बैठे हैं कि हम राष्ट्र या देशभक्त हैं | हम भ्रम पाले बैठे हैं कि हम धार्मिक हैं, सभ्य हैं |

बिलकुल गलत…हम दुनिया के सबसे मूर्ख, दिमाग से पैदल ज़ोम्बी मात्र हैं और कुछ नहीं | हमारे पास इतनी भी अक्ल नहीं बची कि सही और गलत को पहचान सकें | हमारे पास इतना भी साहस नहीं बचा कि गलत का विरोध कर सकें | उलटे जो सही बात बताना, समझाना चाहते हैं, उन्ही के पीछे लट्ठ लिए दौड़ पड़ते हैं, उन्हें ही गालियाँ और धमकियाँ देने लगते हैं |

राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति 

राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति का अर्थ किसी नेता या पार्टी की चाटुकारिता नहीं होती | राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति का अर्थ अपने नेता या पार्टी विरोधियों को राष्ट्रद्रोही, पाकिस्तानी, मुल्ला, आईएसआई एजेंट्स की उपाधि देना या पाकिस्तान ट्रेवेल एजेंसी खोल लेना नहीं होता | कि आये दिन किसी भी विरोधी को पाकिस्तान का टिकट मुफ्त में बाँटते चलो | नहीं राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति का अर्थ होता है गाली गलौज करना, धमकियां देना, गुंडागर्दी करना |

दुर्भाग्य से राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति उन लुच्चे लफंगे नेताओं से युवा सीखते हैं, जो चंद रुपयों में बिक जाते हैं | जो कभी इस पार्टी तो कभी उस पार्टी में डोलते फिरते हैं | ऐसे नेताओं को युवा अपना आदर्श बनाये घूमते हैं, जिनको विपक्षी पार्टियों के नेताओं का विरोध करने के शिष्टाचार का ही ज्ञान नहीं होता | राजनीती को जिन नेताओं ने लुच्चों लफंगों का अखाड़ा बना रखा है, जो माफियाओं और अपराधियों के रखैल बने हुए हैं, उन नेताओं को अपना आदर्श मानने वाले युवाओं को भला राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति का ज्ञान मिले तो मिले कहाँ से ?

स्कूल, कॉलेज तक जो पहले कभी शिक्षा का केंद्र हुआ करते थे, आज व्यावसायिक केंद्र में रूपांतरित हो चुके हैं | ऐसे में बच्चों को सिखाएगा कौन कि राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति किस चिड़िया का नाम है ?

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स्मरण रखें:

राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति नेताओं और राजनैतिक पार्टियों की चाटुकारिता नहीं, अपने देश, समाज व नागरिकों के हितों के लिए कार्य करना, चिंतन मनन करना होता है |

राष्ट्रभक्ति का अर्थ गुंडागर्दी, गाली-गलौज से विरोध व्यक्त करना नहीं, बल्कि तर्कपूर्ण चर्चा करके अपना पक्ष रखना होता है |

राष्ट्रभक्ति का अर्थ नेताओं और राजनैतिक पार्टियों के जयकारा लगाना नहीं, बल्कि अपने मोहल्ले, अपने गाँव, अपने शहर, अपने देश को स्वच्छ, दर्शनीय, सभ्य व शालीन बनाना होता है |

राष्ट्रभक्ति का अर्थ शोर शराबा नहीं, शांतिपूर्ण वातावरण बनाना होता है |

राष्ट्रभक्ति का अर्थ देश में युद्धोन्माद भड़काना नहीं, बल्कि युद्ध की स्थिति पैदा ही न हो यह प्रयास करना है |

राष्ट्रभक्ति का अर्थ पड़ोसी देशो से नफरत करना नहीं, अपने देश को सुखी व समृद्ध बनाना है |

सच्चा राष्ट्रभक्त वह है जो अपने नेताओं से प्रश्न पूछने का साहस रखता है

सच्चा राष्ट्रभक्त वह है जो शोषितों, पीड़ितों की सहायता करता है, उनके सुख दुःख में काम आता है

सच्चा राष्ट्रभक्त वह है जो लापरवाह, कामचोर, रिश्वतखोर अधिकारीयों को उनका दायित्व समझाता है और उन्हें अपना दायित्व निभाने के लिए प्रेरित करता है |

सच्चा राष्ट्रभक्त वह है जो नेताओं से प्रश् करता है कि उनके क्षेत्र की समस्याएँ क्यों नहीं सुलझीं अभी तक और विलम्ब का कारण क्या है |

सच्चा राष्ट्रभक्त वह है जो अपने क्षेत्र में कूड़ा करकट नहीं बिखेरता, बल्कि यदि कहीं गंदगी दिखे, तो तुरंत ही उसे साफ़ करने के लिए उचित कदम उठाता है |

राष्ट्रभक्त होना कोई बच्चों का खेल नहीं हैं कि गले में भगवा गमछा डाल लिया और लोगों को मार-पीट कर ‘वंदेमातरम्’ या भारत माता की जय बुलवा लिया तो हो गये राष्ट्रभक्त |

समाज को भी इस विषय पर गंभीर चिंतन मनन करना चाहिए कि उनकी सन्ताने इंसान बनने की बजाये लुच्चे-लफंगे क्यों बन रहे हैं | उन्हें भी चिंतन-मनन करना चाहिए कि शिक्षण संस्थाने महँगे शुल्क लेकर भी उनके बच्चों को शिक्षित बनाने की बजाय मात्र डिग्रीधारी बेरोजगार ही क्यों बना रही हैं ?

और जिस दिन समाज इन सब विषयों पर चिंतन मनन करने लगेगा, उस दिन भारत में लुच्चे-लफंगे नेताओं और माफियाओं का साम्राज्य समाप्त हो जाएगा | तब इस देश में सही मायनों में राष्ट्रभक्त जन्म लेना शुरू हो जायेंगे |

~विशुद्ध चैतन्य

“Sometimes people don't want to hear the truth because they don't want their illusions destroyed.” 										    ― Friedich Nietzche

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