धर्मों रक्षति रक्षितः


अर्थात, धर्म की रक्षा करने पर ही सुरक्षित रहोगे |

अब चूँकि धर्म के ठेकेदारों, धर्म रक्षकों और कट्टर धार्मिकों को ही धर्म का ज्ञान नहीं, धर्म से परिचय नहीं, इसीलिए धर्म की रक्षा करने की बजाय, सम्प्रदाय, पंथों के विचारधाराओं, मत-मान्यताओं, कर्मकांडों, तिलक-टोपी और राजनेताओं, राजनैतिक पार्टियों को धर्म मानकर उनकी रक्षा करने के लिए निकल पड़ते हैं |

हिन्दू से मुसलमान हो जाना या मुसलमान से हिन्दू हो जाना धर्म परिवर्तन नहीं है | यह बिलकुल वैसी ही घटना है जैसे कांग्रेसी से भाजपाई हो जाना या भाजपाई से कांग्रेसी हो जाना या सपाई से बसपाई हो जाना या बसपाई से सपाई हो जाना |

मुसलमान मंदिरों में जाने लगे, पूजा-पाठ, व्रत-उपवास करने लगें या हिन्दू मस्जिदों में जाने लगें, रोजा-नमाज करने लगें तो धर्म परिवर्तन नहीं हो जाता | या बिलकुल वैसी ही बात हो जाती है जैसे कुरैशी की दूकान से कोई हिन्दू चिकन खरीद ले या पांडेय की दूकान से कोई मुसलमान बर्तन या मिठाई खरीद ले |

धर्म की रक्षा उसी दिन हो सकती है जब इन्सान को धर्म की समझ आ जाए | विद्यालयों, विश्वविद्यालयों में ही धर्म की शिक्षा अनिवार्य कर दी जाए | और धार्मिक शिक्षा का अर्थ तथाकथित धार्मिक, आसमानी, हवाई किताबों को रटाना नहीं, बल्कि व्याहारिक रूप से धार्मिक बनाना होता है |

व्यवहारिक धार्मिक होने का अर्थ है, अधर्म यानि शोषण, अत्याचार, अन्याय, भ्रष्टाचार, लूटपाट के विरुद्ध आवाज उठाना, विरोध करना | और व्यवहारिक धार्मिक वह है जो धूर्त, मक्कार, जुमलेबाज, धोखेबाज, वादाखिलाफ, माफियाओं और अपराधियों के रखैल नेताओं, पार्टियों का समर्थन न करें |

ऐसी बात नहीं है कि धर्म परिवर्तन नहीं होता, होता है बहुत लोग करते हैं | जैसे कोई कायर अचानक से किसी कारण वश साहसी बन जाए | या कोई साहसी व्यक्ति कायर बन जाए | कोई व्यक्ति ईमानदारी छोड़ बेईमानों के साथ मिल जाए, कोई व्यक्ति चोरी बेईमानी छोड़ ईमानदार बन जाए, कोई व्यक्ति धूर्त-मक्कारों का साथ देने की बजाय ईमानदार के साथ खड़े हो जाए या कोई व्यक्ति ईमानदार का साथ छोड़ बेईमानों के साथ खड़े हो जाए……..इसे ही धर्म परिवर्तन कहते हैं |

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दुष्टों से अपनी संपत्ति, अपनी भूमि की रक्षा करना ही धर्म की रक्षा है | अत्याचारियों, अन्यायियों, भ्रष्टाचारियों से स्वयं की, परिवार की, समाज की और देश की रक्षा करना ही धर्म की रक्षा है | और जो व्यक्ति, परिवार या समाज धर्म की रक्षा नहीं करता, उसका सर्वनाश हो जाता है, बिलकुल वैसे ही जैसे ईराक और सीरिया के नागरिकों का हुआ |

इसीलिए ही कहा गया है, “धर्मों रक्षति रक्षितः

~विशुद्ध चैतन्य

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