सुखी रहने का रहस्य

इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि एक सुखी भक्त भक्ति में लीन चला जा रहा है दुनियादारी से बेखबर | उसका सुख यही है कि उसे कमल का फूल वाला कच्छा भेंट कर दिया किसी ने बस वह भक्त बन गया कमल के फूल का, फिर चाहे दुनिया उसे Fool समझे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता |

लेकिन कुछ मेरे जैसे होते हैं जिसे कोई कच्छा भी भेंट कर दे तो वह सुखी नहीं रह पाता |

मेरे आश्रम में दो वृद्ध हैं जिनमें से एक को उसकी पत्नी और बच्चों ने मार-पीट कर घर से निकाल दिया था | अब दोनों की समस्या यह है कि दोनों ही दिन भर किसी न किसी की बुराई करते ही रहते हैं | उनके पास कोई और विषय होता ही नहीं बात करने के लिए | फिर कोई और सुनने वाला यहाँ होता नहीं, सिवाय मेरे | तो मेरे पास चले आते हैं अपना दुखड़ा लेकर |

मेरी कोशिश यही रहती है कि आश्रम में विवाद न होने पाए, सभी सुखी रहें संतुष्ट रहें | लेकिन सुखी होने के लिए कोई तैयार नहीं, सभी के पास कोई न कोई रोना रहता ही है | तो मैंने कल दोनों वृद्धों को समझाया कि यूँ दिन भर दूसरों की बुराई खोजते रहने से कोई लाभ नहीं | अब उम्र हो गयी तो थोड़ा ध्यान भजन में ध्यान दो, प्रभु के नाम जाप पर ध्यान दो | अब कुछ वर्षो के मेहमान हो और आश्रमवासी हो, तो अपने मोक्ष के उपाय सोचो |

दूसरो की बुराई खोजने से कोई भला नहीं होने वाला, दूसरों की निंदा करने से कोई भला नहीं होने वाला | क्योंकि कोई सुधरेगा नहीं आप लोगों के निंदा करने से, उनकी नजर में आपकी कोई वेल्यु है नहीं | लोग तो मोदी की भी इतनी बुराई करते हैं, क्या उसे कोई फर्क पड़ता है ?

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अपने ऐश में डूबा हुआ है, उसके चाहने वाले उसकी उतरन भी करोड़ों में खरीदते हैं, उसके लिए तीस हजारी कुकरमुत्ते का सूप बनाते हैं, उसके पास खड़े होने मिल जाये, उसी को लोग मोक्ष समझ लेते हैं | भगवान् का नाम एक बार जपना भूल भी जाएँ, हनुमान चालीसा भले कभी नहीं पढें, लेकिन मोदी का नाम जपना नहीं भूलते, मोदी चालीसा पढ़ना नहीं भूलते | लोगों के लिए वही असली भगवान् है, अवतार है, तारनहार हार है |

ठीक इसी प्रकार जिनकी आप लोग बुराई करते हैं, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता | वे सब ऐश कर रहे हैं, अपनी अपनी दुनिया में मग्न हैं, लोग उनके सामने नतमस्तक रहते हैं | भले फिर वे कितने ही धूर्त-मक्कार हों, बेईमान हों….दुनिया यदि उन्हें सलाम रही है, तो वही सही है | वैसे भी आज ईमानदारों की कोई इज्जत नहीं है |

दोनों को मेरी बात समझ में आयी और बोले कि आज से हम किसी की बुराई नहीं करेंगे, बिलकुल मोदी भक्तों की तरह ज़िन्दगी गुजारेंगे | फिर चाहे कोई मरे या जीये हमें कोई फर्क नहीं पड़ता |

मैंने कहा कि बिलकुल यही सही राह है सुखी व संपन्न जीवन जीने का | मिडिया वालों को देख लो, नेताओं को देख लो, बड़े व्यापारियों को देख लो….और दुनिया में जितने भी सुखी-संपन्न लोग हैं, उन सभी को देख लो….सभी “मैं सुखी तो जग सुखी” के सिद्धांत पर जीते हैं | उन्हें बस अपने कच्छे से मतलब है…उन्हें कच्छा मिल गया और वे सुखी हो गये | बाकी उस कच्छे का इंतज़ाम करने वाले ने कितनो के कच्छे उतार दिए, कितनो को बेघर कर दिया, कितनो को मौत के घाट उतार दिया….उन सब से उन्हें कोई लेना देना नहीं | बस उन्हें कच्छा मिल गया आत्मा तृप्त हो गयी उनकी |

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तो यही है सुखी जीवन का रहस्य | आपको न तो पड़ोसी की चिंता करनी है, न ही किसी भूखे नंगे की | न तो अपने गाँव मोहल्ले की चिंता करनी है, न ही देश की | बस अपने विषय में सोचिये, अपना सुख देखिये….सारी दुनिया सुखी नजर आएगी |

बस मैं कुछ अपवाद हूँ क्योंकि मेरी दुनिया इतनी छोटी नहीं है, जिसमें केवल मैं और मेरा परिवार ही आता है | मेरी दुनिया थोड़ी बड़ी है यानि यह देश | देश में जब कोई शोषित पीड़ित होता है, तो लगता है कि मैं ही जिम्मेदार हूँ | जब कोई नेता स्वार्थी हो जाता है, जब मिडिया रखैल हो जाता है…..तब लगता है कि मैं ही जिम्मेदार हूँ…क्योंकि यह देश मेरा है | और यह भी जानता हूँ कि जीवन में सुखी रहने का रहस्य है “मैं सुखी तो जग सुखी” के सिद्धांत पर चलना श्री-श्री रवि शंकर, बाबा रामदेव, देश के नेताओं, बाबाओं, बड़े बड़े उद्योपतियों की तरह |

~विशुद्ध चैतन्य

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