आपके चुने हुए नेता का महत्व ही क्या है ?

कभी सोचा है आपने कि आपके चुने हुए नेता का महत्व ही क्या है ? वह होता तो राजनैतिक पार्टियों का सामन्त ही है | उसे पार्टी के अधीन ही रहना है, उसे निर्णय भी वही लेना है जो पार्टी के वरिष्टजन को रुचिकर लगे | आपका नेता कोई कार्य करे आपके क्षेत्र के विकास के लिए, तो नाम और चेहरा चमकेगा पार्टी के नेता का | जैसे भाजपा का चेहरा है मोदी, कांग्रेस का चेहरा है राहुल, आप पार्टी का चेहरा है केजरीवाल….और इसी प्रकार हर पार्टी का कोई न कोई चेहरा और चिन्ह है | तो आपके चुने हुए नेता का आस्तित्व ही क्या है ? वह कुछ करे या न करे, क्या फर्क पड़ता है ?

यदि वह काम न करे, तो लोग पार्टी के प्रमुख चेहरे को दोषी मानेंगे, वह काम करे, तो पार्टी के प्रमुख चेहरे की वाहवाही होगी | ऐसे में आपका चुना हुआ नेता क्या पूरी निष्ठा से आपके पक्ष में रहेगा ?

नहीं वह अपनी पार्टी के पक्ष में रहेगा…बिलकुल वैसे ही, जैसे सेल्समेन अपनी कम्पनी के पक्ष में रहते हैं | उनके लिए उनकी कम्पनी यानि पार्टी महत्वपूर्ण होती है, उसका हित महत्वपूर्ण होता है, चाहे देश का बेडागर्क हो जाए, चाहे जनता सर पीट पीटकर मर जाए | क्योंकि वह जानता है कि केवल पाँच वर्ष में एक ही बार जनता के सामने जाना है और वोट मांगना है और वह भी अपने नाम पर नहीं, राजनैतिक पार्टी के नाम पर | अब वह पार्टी कोई भी हो सकती है यह आवश्यक नहीं कि आज जिस पार्टी में है, उसी में कल भी रहेगा | जहाँ उसे अधिक मुनाफा और सुरक्षा दिखेगी, उस पार्टी में उसका चेहरा चमकने लगेगा |

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हाँ यदि आपके नेता अपने चेहरे पर चुनाव लड़ते, तो वे अधिक जिम्मेदार होते | उन्हें इस बात का भय रहता कि मैंने यदि अपने क्षेत्र के लिए कार्य नहीं किया, तो मेरा चेहरा कलंकित होगा, न कि पार्टी का चेहरा | उसे यह भी भय रहेगा कि अगली बार भी इसी चेहरे को कैश करवाना है, तो चेहरा बेदाग़ ही रखना होगा |

अभी तो नेता को अपने चेहरे पर कालिख पुतने का कोई भय नहीं रहता | एक पार्टी से टिकट नहीं मिला तो दूसरी पार्टी में जाकर अपना चेहरा छुपा लेगा या अपने चेहरे पर लगी कालिख मिटा लेगा | लेकिन यदि आपके नेता का चेहरा ही चुनाव चिन्ह हो जाये तब ?

तब तो वह छुप नहीं पायेगा और जो भी कार्य वह करेगा अपने क्षेत्र के विकास के लिए, उसका श्रेय भी उसे ही मिलेगा, न कि पार्टी के नेता या मुखिया को ?

कभी इस विषय पर विचार करके देखिएगा |

हम सभी अपनी पहचान बनाना चाहते हैं और जो भी श्रेष्ठ कार्य हम करते हैं, वह अपनी अलग पहचान बनाने के लिय ही करते हैं | हर कोई चाहता है कि उसे भीड़ से अलग पहचान मिले, हर कोई चाहता है कि लोग उसके चेहरे को पहचाने, उसके नाम को पहचाने | फिर वह कोई पालतू पशु ही क्यों न हो | तो भला कोई इंसान वहां अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे करेगा, जहाँ उसके चेहरे, उसके नाम को कोई महत्व ही न मिलता हो, केवल पार्टी के मुखिया या महत्वपूर्ण नेता को ही महत्व मिलता हो ? कोई भला क्यों चाहेगा कि वह दिन रात मेहनत करके समाज का भला करे और जनता मोदी मोदी करती फिरे ?

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क्या इससे बेहतर यह नहीं होता कि क्षेत्रीय नेताओं के चुनाव के बजाय, सीधे मोदी, राहुल, केजरीवाल, मायावती, अखिलेश, ममता आदि का ही चुनाव हो, और क्षेत्रीय नेता यानि सामन्त ये चुने हुए नेता ही तय करें ? इससे क्षेत्रीय नेताओं के चयन में होने वाले खर्च की बचत होती और गिनती के कुछ ही चेहरों को चुनना पड़ता |
~विशुद्ध चैतन्य

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