पीके विरोधियों के पास है इन सवालों के जवाब ?

#PKdebate

  • पीके का कई शहरों में विरोध हो रहा है। विरोधियों का दावा है कि फिल्म उनकी भावनाएं आहत कर रही है। हालांकि फिल्म 200 करोड़ से अधिक कमा चुकी है। ऐसे में क्या माना जाए विरोध कर रहे लोग वाकई में धर्म परायण हैं? या फिल्म से जिनकी दुकानदारी बंद हो जाने का खतरा, ये जमात उसी की प्रतिनिधि तो नहीं?
  • फिल्म के कई दृश्यों में धार्मिक प्रपंचों और धर्म के ठेकेदारों की पोल खोली गई है। मसलन एक दृश्य में दिखाया गया है कि मंदिर के बाहर एक दुकानदार 200 रुपए में पीके को पूजा सामग्री बेचता है। मंदिरों के बाहर ये ठगी आम बात है, फिल्म का विरोध कर रहे संगठन इससे इनकार करेंगे? क्या उन्होंने इसे रोकने की कोशिश कभी की?
  • धार्मिक स्‍थलों पर आदमी श्रद्धा भाव से जाता लेकिन लौटते हुए किसी और की चप्‍पल उठा लाता है। पीके भी इस ठगी का शिकार होता है। मंद‌िर, मस्जिद, गुरुद्वारों के बाहर चप्पलों की चोरी रोकने की कोशिश क‌िसी संगठन ने की?

  • फिल्म में दिखाया गया है कि तपस्वी महाराज पीके के रिमोट को शिव के डमरू का मनका बताते हैं, जो सरासर झूठ है। क्या कई ऐसे संत नहीं हैं जो ईश्वर के साक्षात्कार का दावा करते हैं। धर्म संगठनों ने कभी ऐसे संतों की पोल खोलने की कोशिश की?
  • फिल्म में तपस्वी महाराज से एक भक्त अपनी बीवी की बीमारी को ठीक करने का उपाय पूछता है तो वह उसे नेपाल और चीन की सीमा पर बने मंदिर का दर्शन करने की सलाह देते हैं। क्या मंदिर का दर्शन करने से बीमारी ठीक हो सकती है? अगर नहीं तो ऐसी सलाहें संत-महंत क्यों देते हैं?
  • फिल्म में दिखाया गया है कॉलेज के बाहर पत्थर का टुकड़ा रखकर उस पर सिंदूर लगा देने भर से वहां भक्तों की भीड़ लग जाती है और पैसे की बरसात होने लगती है, जबकि एक चाय वाला पूरे दिन की मेहनत के बाद भी अपनी रोजी रोटी का जुगाड़ नहीं कर पाता। क्या ये सच नहीं है?
  • फिल्म के एक सीन में पूछा गया है कि हवा से सोना पैदा करने वाला बाबा चंदा क्यों लेते हैं, क्या वे देश की गरीबी नहीं दूर कर सकते। क्या ये सच नहीं कि देश में कई ऐसे बाबा हैं जो चमत्कार के नाम पर ऐसी क‌लाबाजी करते हैं?
  • फिल्म में दिखाया गया है कि तपस्वी महराज ईश्वर को फोन करते हैं और उसी से समस्याओं का समाधान पूछते हैं। तपस्वी महाराज की फोन कॉल का रहस्य खुलते है, भक्तों का भरोसा उठ जाता है। क्या धार्मिक संगठनों को ये डर है कि असल जिंदगी में भी ऐसी ठगी की पोल न खुल जाए!
  • फिल्म एक दृश्य में पीके जब विभिन्न धर्मों के लोगों को लेकर तपस्वी महाराज के सामने जाता है और उनसे सभी के धर्म बताने को कहता है तो वो उनके पहनावों से धर्म बताने का प्रयास करते हैं, जबकि वास्तव में ऐसा होता नहीं है। क्या ये सच नहीं है कि धर्म संगठनों ने धर्म को धार्मिक प्रतीकों तक सीमित कर दिया है?
  • खुदा की रक्षा के लिए आतंकी संगठन बम धमाका करते हैं और मारे जाते हैं मासूम लोग। चंद धर्मांध लोगों की साजिशों का ‌खामियाजा मासूमों को नहीं भुगतना पड़ रहा है ?

अमर उजाला ने सराहनीय कदम उठाया और पत्रकारिता को वास्तव में एक सही दिशा देने का प्रयास किया | 

अन्य लिंक:

Supreme court rejects ban on Aamir Khan’s PK; says don’t watch the film if you don’t like it!

साभार: अमर उजाला

यह फिल्म देखिये और बताइये कि क्या इस फिल्म में मंदिर पुरोहितों जिस प्रकार षड्यंत्रकारियों का साथ दिया वह हिंदुत्व का अपमान नहीं था ? किसी ने शोर मचाया था तब ?

READ  किले की सुरक्षा घंटी बजाकर

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of