उसके नौकर ने दूध में जहर देकर उसकी हत्या कर दी थी

दिल्ली जहांगीरपुरी की रहने वाली 9 साल की निशा ने अपने पुनर्जन्म की बात करके सबको चौंका दिया।

उसका कहना है कि वह मुजफ्फरनगर के खतौली की रहने वाली थी। उसने दावा किया कि जब वह सोलह साल की थी, तब उसके नौकर ने दूध में जहर देकर उसकी हत्या कर दी थी और शव को खतौली की गंगनहर में फेंक दिया था।

पुनर्जन्म का दावा करने वाली निशा ने खतौली की गंग नहर को दिखाया। उसने यहां मौजूद ताराचंद शिवालय, चर्च के बारे में भी बताया। उसने यह भी बताया कि गंग नहर पर दोनों ओर चीतल और अलखनंदा रेस्टोरेंट थे, जहां पर वो खाना खाने आते थे। साथ ही यहां गंग नहर के पास विशाल बरगद का पेड़ भी था। मासूम के मुंह से ये सब सुनकर उसे देखने वाली भीड़ भी हैरान रह गई। निशा का कहना था कि उसकी मां का नाम नैना और भाई का नाम राजेंद्र था। वह यह तक बता रही थी कि वो ठाकुर समाज की थी, मगर अपने घर का पता और पिता का नाम उसे याद नहीं था। 

दिल्ली के जहांगीरपुरी में हलवाई का काम करने वाले निशा के बाबा बाबूराम, पिता धर्मवीर, मां मीरा ने बताया कि उसकी चार बेटियों में निशा सबसे छोटी है। उसका जन्म 25 मई 2005 को हुआ था। जब वह छह साल की थी, तभी से वह अपने को खतौली निवासी बताते हुए पुनर्जन्म की बातें बताने लगी थी।

वह अपने परिजनों के साथ मंगलवार को खतौली पहुंची लेकिन उसके पहले जन्म वाले परिजन नहीं मिले।

हम बच्चों के साथ एक उत्पाद जैसा व्यवहार करने लगे हैं | हम उसपर वह सब थोपना चाहते हैं जो हम नहीं कर सके या पड़ोसी से प्रतिस्पर्धा करने के लिए बच्चों का बाल्यकाल छीनने लगे | हम उसे वह नहीं होने दे रहे जिसके लिए उसने जन्म लिया | यदि कोई बच्चा अपने पूर्वजन्म के अधूरे कार्य को या स्वप्न को पूरा करने का प्रयोजन करने का प्रयास करता है तो माँ बाप उसे मुर्ख समझते हैं या फिर भावनात्मक ब्लैकमेल करके उसे अपना मार्ग बदलने पर विवश करते हैं |समय समय पर हम यह सुनते पढ़ते रहते हैं कि अमुक बच्चे को पूर्वजन्म की घटना याद आई…लेकिन हम कभी अपने बच्चों के अंतर्मन में झाँकने का प्रयास नहीं करते | हम नहीं समझना चाहते कि वह पिछले जन्म में क्या था और इस जन्म में क्या करना चाहता है | यही कारण है कि अधिकाँश जनसँख्या मानसिक रूप से असंतुष्ट जीवन जीते हुए मर जाती है | अधिकाँश लोगों को हम यही कहते सुनते हैं कि वे जीवन को बस काट रहे हैं न कि संतुष्टि के साथ जी रहे हैं | -विशुद्ध चैतन्य 

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