क्या आप कभी चाहेंगे कि आप का बेटा किसी पिता को वह दुःख दे जो…

यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि किसी सम्प्रदाय के कट्टर समर्थकों की सरकार हो, तो विकास और शांति स्थापित हो सकती है | आज मुस्लिम देशों की स्थिति देखें तो यह सिद्ध हो जाता है कि कट्टर मानसिकता की सरकार अक्षम होती है राष्ट्र में समन्वयता लाने में | आज भारत की ही स्थिति देखें तो विकास और भ्रष्टाचार का मुद्दा दफना दिया गया और धर्मांतरण और सांप्रदायिक मुद्दा ऊपर आ गया | आज किसी को महँगाई, बेरोजगारी, आदिवासी और किसानों की समस्या से कुछ लेना देना नहीं रहा | एक भय का वातावरण बनाया जा रहा है भारत में कि मुस्लिम सारे हिन्दुओं को मारने आ रहे हैं | मुस्लिमों को गालियाँ दे देकर उनके मन में भी द्वेष और क्रोध उत्पन्न कर रहें हैं, ताकि वे भड़क कर कोई उपद्रव करें और ये लोग कह सकें कि देखा..! हम तो पहले ही कह रहे थे….!

मुस्लिमों की समस्या यह है कि वे भेड़चाल में अधिक विश्वास करते हैं | कहीं कोई उपद्रव हुआ और बिना कारण जाने कूद पड़ते हैं | क्योंकि वे मानते हैं कि वे विदेशी हैं और भारत में किराए पर रह रहें हैं | वे भारत को अपना देश मान पाने में कठिनाई का अनुभव करते हैं | और इन सबका प्रमुख कारण हैं धर्मों के ठेकेदार ! जो अपनी अपनी राजनीति और दूकान की आमदनी बनाए रखने के लिए लोगों में राष्ट्रीय भावना से अधिक साम्प्रदायिक भावना को भरते रहते हैं | यह और बात है कि ऊपर के सभी आपस में मिले-जुले रहते हैं और सभी को पता होता है कि वे कैसे नीचे की लोगों को मुर्ख बना रहें हैं | जबकि आम जनता जानबूझकर भी अनजान बनी हुई है |

READ  बहुमत जिसे मिला हो, वह सही ही होगा इस बात की कोई गारन्टी नहीं है

ये धार्मिक सरकारें राष्ट्रहित का सोच ही कैसे सकती हैं जब कभी धर्म-गुरुओं ने ही राष्ट्रहित न सोचा हो ? कोई भी साम्प्रदायिक संगठन राष्ट्रहित को महत्व नहीं देता यह इतिहास कहता है | ईसाई शान्ति के साथ पूरे राष्ट्र में अपने पंथ का प्रचार-प्रसार कर रहा, लेकिन किसी को कोई आपत्ति नहीं हुई कभी | क्योंकि वह हथियारों का प्रयोग नहीं कर रहा | वह लोगों की सहायता करके उनका दिल जीतता है और तब जाकर लोग उनके पंथ को अपनाते हैं | लेकिन बाकियों के साथ ऐसा नहीं है | हिन्दू और मुस्लिमों को तो मानवता से कोई लेना देना ही नहीं होता | उनको तो बस अपनी जनसँख्या बढ़ाने से मतलब है, ताकि कल जब लोग दंगे में मारे जाएँ तो गिनती कम न हो जाए | लेकिन कभी कोई ऐसी योजना नहीं बना पाए, कि अपने कमजोर वर्ग को कोई स्थाई सहायता प्राप्त हो सके | बहुत हुआ तो दिखावे के लिए भंडारा चला दिया या फिर कुछ लोग राशन लेकर पहुँच गये या रक्तदान शिविर लगा दिया…. वह भी वहाँ जहाँ प्रचार होने की आशा अधिक हों | जहाँ मीडिया के लोग अधिक दिखें वहीं ये जनसेवा की दूकान लगा कर बैठ जाते हैं | मिडिया गायब और इनका परमार्थ भी गायब हो जाता है | कोई पीड़ित इनसे सहायता मांगने आये तो मंदिर-मस्जिद दिखा देते हैं या सरकार को दोष देने लगते हैं |


लेकिन आजादी के इतने वर्षों बाद भी ये दूर-दराज के क्षेत्रों में जाकर बिना शर्त सेवा करने का साहस नहीं जुटा पाए | पूरा नार्थईस्ट आज ईसाई धर्म अपना चुका है क्योंकि ईसाई वहाँ उनकी सहायता करते थे | न भारत सरकार उनका भला कर पायी और न ही धर्मों के ठेकेदार | ईसाई यह दिखाने में सक्षम रहे कि हिन्दू होने का कोई लाभ नहीं क्योंकि कोई पूछने वाला नहीं है तुम्हें | ईसाई हो जाओ तो अमेरिका तुम्हारी देखभाल करेगा | और आज भी वे लोग ही सही सिद्ध हो रहे हैं क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री को भी अमेरिका को भगवान् मानना पड़ता है |

READ  मैं धन्यवाद् देता हूँ हिंदुत्व के नाम पर उपद्रव कर रहे सड़क-छाप लफंगों की सेनाओं और इनके आकाओं का

कभी भी किसी भी साम्प्रदायिक नेता ने यह नहीं सोचा कि हम अपने ही लोगों का उद्धार करें उनकी समस्याएं दूर करने का प्रयास करें तो स्वतः ही लोगों का आपके पंथ के प्रति आकर्षण बढ़ेगा | क्योंकि यदि आप सहयोगी हैं तो स्वाभाविक है कि आपके पंथ के कारण ही आपको ऐसी भावना मिली | यदि आप हिंसक हैं तो भी दोष आपके पंथ के संस्कारों को ही जायेगा जैसा कि आईसीस और अलकायदा के कारण आज मुस्लिम यह नहीं कह सकते कि उनका इस्लाम आतंक नहीं सिखाता | वे कितना भी दलील दें कि हमारा इस्लाम शांति का पाठ पढाता है, लेकिन कोई विश्वास नहीं करेगा क्योंकि प्रत्यक्ष जो दिख रहा है वह प्रमाण है कि इस्लाम शांति का धर्म नहीं है | वे तो आपस में भी शांति से नहीं रह सकते, किसी और के साथ शांति से भला कैसे रहेंगे ? यह और बात है कि भारतीय संस्कारों के कारण भारतीय मुस्लिम अमानवीय स्थिति में नहीं पहुंचे, लेकिन विदेशियों के भड़काने के कारण वे भी उपद्रव करने से नहीं चूकते | इन मुट्ठी भर मुस्लिम उपद्रवियों की आढ़ में पूरे हिन्दू सम्प्रदाय को डराने और हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहें है ये संघी-बजरंगी |

तो भारत जैसे राष्ट्र को कट्टर धार्मिकों की नहीं, मानवतावादी सरकार की आवश्यकता है |  ऐसी सरकार जो पंथ निरपेक्ष हो जब राजनैतिक या न्यायिक निर्णय लेना हो | जिसके भीतर मानवता अभी भी थोड़ी ही सही, बची तो हो | जो लगाम लगा सके धार्मिक उन्मादों और उपद्रवो पर | क्योंकि भारत एक राष्ट्र है, कोई कबीला नहीं |

जब दंगा होता है, तब धर्मों के ठेकेदार और दुमछल्ले आग लगा कर भाग जाते हैं और झुलसते हैं निर्दोष और मासूम | गोलियाँ चलती हैं तब मरते हैं वे लोग जिनको पता भी नहीं होता कि यहाँ आज दंगा होने वाला है | जबकि गोलियाँ चलाने और आग लगाने वाला दो दिन पहले से ही जानता था | जो स्वयं को शांतिप्रिय कहते हैं, जो अपने अपने एयरकंडीशंड मठो और मकानों में दुबके पड़े रहते हैं और कभी इन उपद्रवियों का विरोध नहीं करते (चाहे सोशल मिडिया में ही सही) वे ये भूल जाते हैं कि ये नफरत के बीज जो सोशल मिडिया में छिड़के जा रहे हैं आपके घर बैठे मासूम बच्चे की मानसिकता को भी ध्वस्त कर रहे हैं | ये सांप्रदायिक विषधर जहाँ भी बैठेंगे ज़हर ही उगलेंगे | इसलिए अपने बच्चों को नफ़रत भारती मानिसकता में न बड़ा होने दें | क्योंकि भविष्य उन्हीं का है | ये जहरीले लोग अपना जीवन जी चुके, कम कम आने वाला भविष्य तो स्वस्थ व सौहार्दपूर्ण रहे बच्चों का ?

READ  गणपति विसर्जन क्यों किया जाता है ?

क्या आप कभी चाहेंगे कि आप का बेटा किसी पिता को वह दुःख दे जो आप सोचना भी नहीं चाहते ?-विशुद्ध चैतन्य

लेख से सम्बंधित अपने विचार अवश्य रखें

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of