श्री कृष्ण ने कहा था; “जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है…..”

कभी कभी यदि अपने जीवन में घटी घटाओं को देखता हूँ तो पाता हूँ कि वे वास्तव में महान विद्वान रहे होंगे जो उन्होंने ऐसा कहा |

जब मैं दुनिया में घट रही घटनाओं को देखता हूँ तब भी श्रीकृष्ण की विद्वता सिद्ध होती है कि उनके जितना विद्वान् उनसे पहले कभी नहीं हुआ |

अब उदाहरण के लिए धर्म के नाम पर नफरतवाद का प्रचार-प्रसार करते धार्मिक संगठनों और धर्म गुरुओं को ही ले लीजिये | तालिबान और आईसीस जो उपद्रव कर रहे हैं, उससे स्वतः सिद्ध हो रहा है कि धर्म वह नहीं है जिसे इतने वर्षो से लोग धर्म मानकर चले आ रहे थे | धर्म तो सनातन ही है |

भारतीय धार्मिक संगठनों और धर्मगुरुओं की दुकानदारी और धर्म के नाम पर नफरत फैलाने के रंगारंग कार्यक्रमों के कारण भी अब लोगों को धर्म के प्रति रूचि कम हो गयी और वे भी समझने लगे कि जिसे वे इतने समय से धर्म मानकर दंगा-फसाद करते आ रहे हैं, वह वास्तव में धर्म है ही नहीं | क्योंकि धर्म तो सनातन है |

धर्म तो सनातन, सर्वव्यापी, अविनाशी होता है उसका नाश हो कैसे सकता है ? धर्म तो ईश्वरीय है मानवनिर्मित नहीं है इसलिए ही तो ईश्वर से प्राप्त हृदय मानवनिर्मित धर्म के अंतर्गत कार्य नहीं करता | जरा सोचिये कि यदि हृदय भी हिन्दू मुस्लिम हो जाता तो क्या होता ? बात बात पर हड़ताल करने लग जाता…. और आपका क्या होता वह सोचिये… ! यह और बात है कि अब तो मानव ने भी हृदय का अविष्कार कर लिया है और भविष्य में लोग अपनी मर्जी से अपनी अपनी पसंद के ब्रांडेड हृदय लगवा सकेंगे |

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एक दिन एक शिविर में एक सज्जन ने मुझे कहा था कि आपको राष्ट्र की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है, आप हमारे साथ जुड़ जाइए और घूमिये फिरिए बस…. दुनिया अपनी गति चलती है हमारे चाहने से नहीं ! तब मुझे लगा था कि उन्हें राष्ट्र की चिंता नहीं है… लेकिन समय के साथ मुझे पता चला कि वे अपनी जगह सही थे | मर तो वही रहे हैं जो यह मानकर जी रहे हैं कि आग दूसरों के घर लगी है हमें क्या फर्क पड़ता है | मर तो वही लोग रहे हैं जो आतंकवादी नहीं और न ही उनसे कोई सम्बन्ध है उनका | दंगे में भी कोई नेता या उनका दुमछल्ला नहीं मरता और न ही मरता है कोई धर्म गुरु, लेकिन जो इन सबसे दूर रहना पसंद करते हैं, वे ही मारे जाते हैं | जो नफरत के बीज बोने वालों का बहिष्कार नहीं करते, वे ही प्रभावित होते हैं क्योंकि उन्हीं के बच्चे भविष्य में ऐसे संगठनों में शामिल होते हैं या इनके जहर से मारे जाते हैं |

न जाने क्यों मेरा मन इन उपद्रवियों, नफरत के बीज बोने वालों द्वारा किये जा रहे उत्पातों के प्रति धीरे धीरे संवेदनहीन होता जा रहा है | अब लगता है कि ये लोग जो कर रहे हैं ठीक ही कर रहे हैं | इस प्रकार कम से कम सोये और अय्याशी में खोयी जनता होश में तो आएगी ? इनके कारण कम से कम अब लोग समझ तो पायेंगे कि धर्म नफरत नहीं सिखाता | इनके कारण लोग समझ तो पाएंगे कि वास्तविक धर्म है क्या ! इनके कारण कम से कम लोग समझ तो पायेंगे कि कितने वर्षों तक धर्म के ठेकेदार उन्हें धर्म के नाम पर लूटते चले आ रहे थे ! इन्हीं लोगों के कारण उन्हें पता तो चलेगा कि उनके बच्चे क्यों अश्लील व अभद्र भाषा बोलने लगे ! इन्हीं के कारण पता तो चलेगा कि बच्चे क्यों आज नफरतवाद की ओर आकर्षित हो रहे हैं….. ये कट्टर धार्मिक लोग ही समझा पाएंगे कि धर्म वास्तव में है क्या, हम चीख चीख कर मर जायेंगे लेकिन इन सोये हुए शरीफों के कान में जूँ तक न रेंगेंगी |

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नफरत एक ऐसी चीज है जो हर बच्चे के मन में होता है | क्योंकि वह अपने आप को कमजोर पाता है बड़ों के मुकाबले | इसलिए वह अपनी भड़ास निकालने के उपाए खोजता रहता है | शुरुआत करता है रोने चीखने से और फिर गालियों से लेकर गोलियों तक पहुँच जाता है यदि सही समय पर न संभाला गया तो | जब बच्चा गाली देना शुरू करता है, तब माँ-बाप ध्यान नहीं देते और रटा हुआ डायलोग बोल देते है, “क्या करें जी कलजुग आ गया है कलजुग !”

फिर यही नफरत के बीज लिए बच्चे मिलते हैं धर्म के ठेकेदारों के पाले धर्मदूतों से, जो उस नफरत के बीज को सींचते हैं | बस कुछ ही दिनों में बच्चा भी पर-धर्म निंदा अभियान का सक्रीय कार्यकर्त्ता बन जाता है और माँ-बाप गर्व से सीना चौड़ा करके कहते हैं, “हमारा बेटा तो अब कट्टर धार्मिक हो गया है जी ! पहले एक दो गालियाँ ही जानता था अब तो फर्राटे से गालियाँ देता है और वह भी बिना डिक्शनरी देखे |”

और यदि माँ-बाप पहले ही कट्टर धार्मिक हो, तो कहते हैं, “मेरा बेटा तो अब अल्लाह का बंदा हो गया ! अब तो अल्लाह के फरिश्तों ने उसे एके ४७ इनाम में दी है | आँख बंद कर गोलियाँ चलाता है छोटे बड़े का कोई लिहाज नहीं करता | क्योंकि अल्लाह सबको बराबर का दर्जा देता है, कोई भेदभाव नहीं रहता | इसलिए मेरा बेटा भी कोई भेदभाव नहीं करता |

अधिकाँश सभ्य, शरीफ धार्मिक ऐसे हैं, जिन्हें हत्या, लूट-पाट, बलात्कार, आतंकवाद आदि से कोई परेशानी नहीं होती, जब तक उनका अपना कोई इनका शिकार नहीं हो जाता | तब तक लोग ईश्वर, नेता और कलयुग को जिम्मेदार ठहराते रहते हैं | अपना दोष कभी देख ही नहीं पाते क्योंकि समय ही नहीं मिलता पैसे कमाने से |

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इसलिए आज मैं भी मानता हूँ कि जो हो रहा है वह अच्छा ही हो रहा है | यदि यह सब न हो तो लोगों को वास्तविक धर्म का कोई ज्ञान होगा ही नहीं | ~विशुद्ध चैतन्य

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