ए फॉर एप्पल

तो गुल्लू की प्रिंटिंग प्रेस की दूकान शुरू हो गयी धूम-धाम से | दूर दूर से लोग आने लगे गुल्लू के पास डिग्री बनवाने और गुल्लू की डिग्री की विशेषता थी कि वह इतनी आकर्षक होती थी कि लोग देखते रह जाते थे | जिस लड़के या लड़की कि शादी मंगल दोष के कारण न हो पा रही हो, उसकी भी शादी गुल्लू की डिग्री मिलते ही हो जाती थी | इसलिए उसकी दूकान के सामने इतनी लम्बी लाइन लगी होती थी कि लोग चार पाँच दिन का खाना बंधवाकर और एक चारपाई साथ में रखकर ही लाइन में लगते थे |

एक दिन गुल्लू को पता चला कि दूर किसी गाँव में एक बुजुर्ग हैं, जो अभी भी स्कूल जाते हैं और ए फॉर एप्पल, बी फॉर बुक नामक भजन रोज गाते हैं | पूरे गाँव में उसका बहुत ही सम्मान है और लोग कोई भी शादी-व्याह या धार्मिक त्यौहार में उनको बुलाना नहीं भूलते | कहते हैं कि वे जिस जोड़े के सर पर हाथ रख देते हैं, उनकी शादी फिर कभी नहीं टूटती | बस उनके पास कोई डिग्री नहीं है | बचपन में उनके पिताजी जब उसका दाखिला करवाया था, तब पहली बार जिस जगह उसे बैठाया था, वहीं आज भी बैठते हैं | न जाने तब से लेकर आज तक कितने शिक्षक आये और चले गये, बच्चों ने बड़े बड़े स्कूल कॉलेज पढ़कर भी छोड़ दिया लेकिन वे वहीँ के वहीँ हैं | बस गाँव के लोग चाहते हैं कि एक डिग्री उनको भी मिल जाए तो वे भी थोड़ा आराम कर लें पढाई-लिखाई से | गुल्लू को लगा कि उसे उनसे मिलना चाहिए आखिर वे अंग्रेजी में अटक कहाँ गए | और इतने सालों में वे आगे क्यों नहीं बढ़े ?
गुल्लू जब उनसे मिलने पहुँचा तो सारा गाँव इकठ्ठा हो गया था | दोनों बाहर एक पेड़ के नीचे बैठ गये | गुल्लू ने प्रश्न किया, “बाबा आपने जो इतने साल ए फॉर एप्पल की साधना की है, उससे आगे क्यों नहीं बढ़े ?”

READ  अगर अहंकार कुशल हो, तो फूटी कौड़ी पर भी साम्राज्य खड़े कर सकता है

बुजुर्ग ने बहुत ही गंभीर मुद्रा बनाते हुए कहा, “बेटा देखो ए फॉर एप्पल ही सत्य है | हाँ आजकल के लोग भटक गये हैं और ए फॉर आगरा, ए फॉर अल्मेरा आदि बोलते हैं |”

“बाबा ए,बी सी डी तो केवल अक्षर हैं उन्हें जोड़कर शब्द बनते हैं और शब्द से वाक्य बनते हैं और इस प्रकार पूरी किताब बनती है…” गुल्लू ने समझाया |

“मुर्ख हो तुम ! तुम्हें शिक्षा के विषय में कोई ज्ञान ही नहीं है | एक दिन मैंने अपने गुरूजी के सामने ए फॉर अम्मा बोल दिया था, उस दिन बहुत मार पड़ी थी | बाद में सबने समझाया कि ए फॉर एप्पल ही सत्य है | बस तब से ए फॉर एप्पल बोलने लगा | बाद में मुझे पता चला कि इस शब्द में कितनी शक्ति है और कितनी शांति है…. अब लोग आकर समझाते हैं मुझे दुनिया भर की बातें | लेकिन हमारे गुरूजी से अधिक ज्ञानी कोई हो सकता है भला ? अंग्रेजों के जमाने के गुरूजी थे आजकल के नहीं | जब वे अंग्रेजी बोलते थे, तो अंग्रेज भी हक्के बक्के रह जाते थे और जब तक उनकी अंग्रेजी का मतलब कोई नहीं बता देता था अंग्रेज को भी समझ में नहीं आता था | ऐसे थे हमारे गुरूजी ! अब तो लोगों न पूरी विद्या को ही तोड़ मरोड़ कर रख दिया | पूर्वजों के ग्रन्थों के साथ छेड़ छाड़ करके नए नए मतलब निकाल रहे हो | यह देखो मेरे पास है ओरिजिनल अंग्रेजी की किताब और इसमें ए फॉर एप्पल ही लिखा है |” यह कहते हुए बुजुर्ग ने एक पुरानी अंग्रेजों के ज़माने की किताब निकाल कर दिखाई |

READ  'मानव जीवन का उद्देश्य'

गुल्लू ने बुजुर्ग के पैर छुए और सभी गाँव वालों से कहा, “आज मुझे वास्तव में एक महान गुरु के दर्शन हुए | मैं इनके लिए डिग्री फ्री में छापूंगा और वह डिग्री भी इतनी बड़ी होगी कि आज तक उससे बड़ी डिग्री बनी ही न हो कहीं | पूरे बारह फुट की होगी वह डिग्री…. !!”

सारा गाँव तालियों के शोर से गूंज उठा |

गुल्लू की डिग्री की कहानी तो आपने पढ़ी ही होगी और यदि नहीं तो इस लिंक पर पढ़ सकते हैं…”उस दिन गाँव वालों को समझ में आया कि डिग्री का होना कितना जरुरी है”

~विशुद्ध चैतन्य

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of