सम्पूर्ण सृष्टि सनातन धर्म पर आधारित है

आज कल बहुत भ्रम की स्थिति में आये गए धर्म के ठेकेदार | उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि हिन्दू धर्म श्रेष्ठ है या सनातन धर्म | तो दोनों को मिला दिया और कहने लगे सनातन हिन्दू धर्म | जबकि हिन्दू भी अब एक सम्प्रदाय मात्र रह गया है और उद्देश्य केवल राजनैतिक व व्यावसायिक ही है | ठीक वैसे ही जैसे मुस्लिम सम्प्रदाय है या अन्य और सम्प्रदाय |

मैं यह जानता हूँ कि सनातन धर्म वह सनातन धर्म नहीं है, जो आर्यसमाजी परिभाषित करते हैं या पंडित पुरोहित परिभाषित करते हैं | सनातन धर्म में न तो किसी को लाया जा सकता है और न ही सनातन से बाहर कोई जा सकता है | सनातन धर्म के विरुद्ध न कोई हो सकता है और न ही बाहर हो कर जी सकता है….. क्योंकि सम्पूर्ण सृष्टि सनातन धर्म पर आधारित है और निरंतर उसी के अंतर्गत गति व प्रगति करती है | ऋषियों ने केवल उसे समझा और कलमबद्ध किया है, कोई स्थापना नहीं की है सनातन धर्म की जैसे कि अन्य धर्म, मत या पंथ स्थापित किये हुए हैं |

यह आप लोगों का भ्रम है कि आपने किसी को सनातनी बना दिया या हिन्दू बना दिया | जो हिन्द की सीमा से बाहर हुआ वह हिन्दू नहीं रह जाता और जिस दिन हृदय सनातन धर्म से विमुख हो जाता है उस दिन शरीर निर्जीव हो जाता है |

आप केवल एक सम्प्रदाय से दूसरे सम्प्रदाय में उन्हें ला रहे हैं और कुछ नहीं कर रहे, कल वे किसी और सम्प्रदाय में चले जायेंगे कुछ फर्क नहीं पड़ेगा | लेकिन जिस दिन वे सनातन धर्म से विमुख हो जायेंगे उस दिन न उन्हें हिंदुत्व बचा सकेगा और न ही इस्लाम | अंतरिक्ष में भ्रमण करते पिंड जब सनातन धर्म से भटक जाते हैं तो वे पृथ्वी पर गिरते हैं या अन्य ग्रहों पर | लेकिन पृथ्वी के सारे सम्प्रदाय यहाँ तक कि हिन्दू सम्प्रदाय भी उसे वापस सनातनी नहीं बना पाते |

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गौतम बुद्ध ने कोई पंथ नहीं चलाया था केवल हिन्दू धर्म में जो विकृतियाँ थीं उनसे लोगों को अवगत करवाया था | लोगों ने हिंदुत्व नहीं छोड़ा था लेकिन पंडित-पुरोहितों के शोषण से स्वयं को मुक्त करवाने के लिए बुद्ध के साथ अवश्य हो गये थे | बुद्ध ने किसी से नहीं कहा था कि मेरे साथ आओ तो तुम्हें स्वर्ग मिलेगा या धन समृद्धि मिलेगा | उन्होंने केवल यह कहा था कि स्वयं को जान लो तो सबकुछ मिल जाएगा | बुद्ध ने कोई धर्म परिवर्तन अभियान भी नहीं चलाया था, केवल अपने आचरण व व्यव्हार के कारण ही वे लोगों का दिल जीतने में सक्षम हुए थे |

जीसस के साथ भी यही हुआ था और आज भी मिशनरी, गावों में जाकर लोगों की सेवा करते हैं और उनका दिल जीतकर उन्हें अपने साथ मिला रहे हैं न कि किसी का गला काटकर या बलात्कार करके वे धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं | रही लालची लोगों की बात तो वे सर्वत्र हैं और उनको यदि लालच देकर वे अपने साथ मिला रहे हैं तो वे कोई गलत नहीं कर रहे | हिन्दू भी चाहते तो ऐसा कर सकते थे और आज कर भी रहे हैं |

मैं भी चाहूँ तो ऐसा कर सकता हूँ क्योंकि मैं तो सबसे पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र में रहता हूँ | लेकिन हमारे आश्रम और हमारे गुरु के ऐसे सिद्धांत नहीं थे | क्योंकि हमारे गुरूजी जानते थे कि धर्म क्या है | वे तो कभी इस मुहीम में थे ही नहीं कि किसी का धर्म परिवर्तन करवाना है, जबकि उनके शिष्यों में हिन्दू भी थे और मुस्लिम भी | उन्होंने कभी किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करवाया | सभी से यही कहा कि तुम जिस भी पंथ से हो उसे ही मानो, लेकिन मानव बनो, सहयोगी बनो सभी के लिए, राष्ट्र के लिए | उन्होंने किसी भी पंथ कि निंदा नहीं की और न ही मांसाहारियों से कभी घृणा की | वे स्वयं मांसाहारी नहीं थे, लेकिन माँसाहारी श्रृद्धालुओं के लिए स्वयं अपने हाथ से माँस बनाया भी और परोसा भी | यही कारण है कि मैं आज इस आश्रम में हूँ क्योंकि सनातन धर्म को यदि सही रूप में को समझा था तो इस आश्रम के संस्थापक ने ही | कट्टर पंडों के समाज में भी उन्होंने अपने लिए सम्मान प्राप्त किया, मुस्लिम समुदायों के बीच भी और आदिवासियों के बीच भी | दुर्भाग्य से उनके शिष्य कट्टर हिन्दू निकल गये और लोग आश्रम से दूर होते चले गए | -विशुद्ध चैतन्य

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