या तो मर्यादित भाषा और व्यव्हार को अपनाओ ताकि राम नाम की मर्यादा बनी रहे, या….

बैधनाथ धाम से एक प्रसिद्ध महाराज का निमंत्रण आया है कि वे रामकथा कर रहें हैं १२-१६ तक तो अवश्य पधारें |

अच्छी बात है….सोचा था पहले कि चला जाऊंगा क्योंकि वे कई अच्छे कार्य भी कर रहे हैं जैसे गरीबों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा के लिए स्कूल भी खोला हुआ…..लेकिन अब सोच रहा हूँ कि नहीं जाऊँगा | क्योंकि रामायण, रामकथा और कृष्णकथा जैसे शब्दों से ही विरक्क्ती हो गयी है | वास्तव में राम नाम से ही विरक्ति हो गयी है |
क्योंकि राम नाम का उच्चारण करने वालों को भाषा की मर्यादा का भी ज्ञान नहीं होता, तो राम की मर्यादा को भला वे क्या जानेंगे | एक दो अपवादों को छोड़ दूं तो अधिकाँश रामभक्त वे ही लोग हैं जिनको गाली-गलौज, हिंसा और हथियारों से असीम प्रेम है | राम को हिंसा का पर्याय के रूप में स्थापित कर दिया गया | अब राम नामी अर्थात बजरंगी या शिवसैनिक या गली का कोई टपोरी टार्जन |

है न आश्चर्य की बात !!! एक महान आत्मा (कथानुसार ही सही) जिसने अपने पिता के सुख के लिए सत्ता सुख छोड़ दिया, वहीँ सत्ता के लिए उनके अनुयायी दंगा और हिंसा भड़काने से भी परहेज नहीं करते | जिस राम ने वानरों को भी अपनी सेना में शामिल किया, वहीं ये राम राम करने वाले देश भर में ज़हर घोलते फिर रहें हैं राम और राममंदिर के नाम पर | जिस राम ने भीलनी के झूठे बेर खाने में भी संकोच नहीं किया, वहीं ये राम भक्त जात-पात और छुआ-छूत की राजनीति पर ही अपनी दूकान चला रहें हैं | एक वे राम जिसने कभी मर्यादा भंग नहीं होने दी, वहीँ ये रामभक्त जो मर्यादा की परिभाषा भी नहीं जानते (अभी आयेंगे दो चार इसी पोस्ट में और पूछेंगे की मर्यादा किस चिड़िया का नाम है 🙂  | आज राम नाम भक्ति का नहीं, प्रेम का नहीं, हिंसा और राजनीति का दूसरा नाम बन चूका है….

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अब यह मत कहियेगा कि दो चार लोग गलत हैं इसका मतलब राम नाम ही गलत नहीं हो जाता | मैंने राम या उनके चरित्र को गलत नहीं कहा है, मैंने यही कहा कि राम का नाम लेने वालों को मर्यादा का ज्ञान नहीं है और राम नाम का समर्थन करने वाले कायरों के पास इतना भी साहस नहीं, कि अमर्यादित लोगों को समझा पायें कि या तो मर्यादित भाषा और व्यव्हार को अपनाओ |  ताकि राम नाम की मर्यादा बनी रहे, या फिर राम का नाम बदनाम न हो इसलिए अपने ही जैसे मानसिकता के किसी टपोरी को अपना आदर्श बना लो और उनकी जय जयकार करो  |

लेकिन ऐसा भी संभव नहीं है क्योंकि राम नाम की आढ़ लेने की आवश्यकता सज्जनों को नहीं, दुर्जनों को है | सज्जन तो उन दुर्जनों के डर से राम का नाम लेते हैं न कि भक्ति से | भक्ति ही होती तो विष्णु, और ब्रम्हा को क्यों भूल जाते ? मानवता और सहृदयता को क्यों भूल जाते…? मंदिर यदि श्रृद्धावश ही बन रही होती तो सूर्य, विष्णु और ब्रम्हा के मंदिर क्यों लुप्त हो गए ? राम और हनुमान से यदि भक्ति ही होती तो सडकों के किनारे हनुमान जी भिखारी की तरह नहीं खड़े कर दिए गये होते, आते जाते लोगों से दान माँगने | वास्तव में सड़कों के किनारे बने ऐसे छोटे छोटे मूर्तियों और मंदिरों को ये धार्मिक लोग दानपेटी के रूप में ही प्रयोग करते हैं | श्रृद्धा और भक्ति का को काम नहीं होता वहाँ | बाद में वही सड़क के किनारे बैठे हनुमानजी सड़क घेरना शुरू कर देते हैं और कोई विरोध करे, हिन्दू धर्म खतरे में पड़ जाता है |

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अभी देखिएगा ये मूढ़ राम-भक्त आयेंगे मेरे पोस्ट पर और कहेंगे कि मैंने राम को गाली दी, हिन्दू धर्म का अपमान किया….. चूँकि वे स्वयं राम भक्त होंगे, तो उनको राम की तरफ से लाइसेंस मिला हुआ होता है गाली गलौज और धमकियाँ देने के लिए | -विशुद्ध चैतन्य

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