जिसे आप लोग यथार्थ की दुनिया मानते है, मुझे वे काल्पनिक लगतीं हैं

अक्सर देखता हूँ कि लोग सत्य खोजने निकले हैं | वे खोज रहे हैं कि रामायण के पात्र वास्तविक थे कि काल्पनिक, महाभारत के पात्र वास्तविक थे कि काल्पनिक, क़ुरान, बाइबल के पात्र वास्तविक हैं या काल्पनिक | तो पुरातत्ववेताओं की खोजों और शोधपत्रों को खंगालते हैं | लेकिन कुछ भी ठीक से पता नहीं चलता कि सही क्या है और गलत क्या, कोई कुछ कह रहा है तो कोई कुछ |

इन खोजियों में सर्वाधिक बुरी स्थिति उनकी है, जिन्होंने बचपन में चंदामामा, चम्पक, नंदन, बिल्लू, चाचा-चौधरी, पिंकी, लोटपोट जैसी पत्रिकाएं नहीं पढ़ीं | इनको कथाओं से समझाये जाने वाली शिक्षाओं का कोई ज्ञान नहीं | ये लोग फेरीटेल्स से दी जाने वाली शिक्षाओं से कोई शिक्षा नहीं ले पाते क्योंकि उनके पात्र वास्तविक नहीं होते | ये रिअलिटी शो से शिक्षा लेते हैं और यही कारण है कि रियलिट शो बिग बॉस सुपर डुपर हिट है |


मैंने आज तक यह जानने का प्रयास नहीं किया कि कोई भी ईश्वरीय ग्रन्थ लिखने वाला व्यक्ति ईश्वर था या नहीं | मैंने आज तक कभी जानने का प्रयास नहीं किया कि किसी भी ईश्वरीय ग्रन्थ या धार्मिक ग्रन्थ के पात्र वास्तविक थे या नहीं, क्योंकि मैं अपने अनुभवों से जानता हूँ, कि जितना ज्ञान मुझे काल्पनिक कथाओं से प्राप्त हुआ, उतना वास्तविक कथाओं से नहीं | आज भी मैं कल्पनाओं में ही रहना अधिक पसंद करता हूँ, क्योंकि जिसे आप लोग यथार्थ की दुनिया मानते है, मुझे वे काल्पनिक लगतीं हैं |

आप लोग कहतें हैं कि धर्मग्रन्थ प्रेम और भाईचारा का सन्देश देती है, लेकिन व्यावहारिक दुनिया में वह सत्य नहीं है | आप लोग कहते हैं, कि झूठ, बोलना, चोरी करना, बलात्कार करना, निर्दोषों, मासूमों की हत्या करना, दूसरों की संपत्ति पर बुरी नजर डालना या छीनना पाप है, अपराध है और ईश्वर या अल्लाह यानि जिसका जो भी भगवान है, वह उनको सजा देता है, लेकिन व्यावहारिक दुनिया में कोई भी ईश्वर या उसके कानून से डरता नजर नहीं आता | यानि आप जिस यथार्थ की बातें करते हैं, वह वास्तव में काल्पनिक है |

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जरा अपने दिल पर हाथ रख कर कहो, कि कब आप ईश्वर से डरे और गुनाह करने से तौबा की ? कब आप शैतान से डरे बिना, अन्याय व अत्याचार का विरोध करने का साहस किया यह जानते हुए भी कि आपके परिवार व व आपकी जान खतरे में पड़ सकती है ?

आप वकील हैं आप व्यापारी हैं तो दिन में कितनी बार झूठ बोलते हैं ? क्या आपका ईश्वर आपको यह अनुमति देता है कि झूठ बोलकर लोगों को ठगों ?

तो जिसे आप लोग यथार्थ कहते हैं, जिसे आप लोग वास्तविक कहते हैं, वही वास्तव में काल्पनिक है | आपकी वास्तविक दुनिया तो हिंसा, नफरत, लूटपाट, घोटालों से भरी पड़ी है और वह भी तब, जबकि हर कोई खुद को धार्मिक, नमाजी होने का दावा कर रहा है | और ये नकली किताबी लोग, निकलते हैं पुराणों के पात्रों की वास्तविकता खोजने कि यदि वे वास्तव में हुए तो उनकी शिक्षा सही है और यदि काल्पनिक हुए तो उन शिक्षाओं को मानने का कोई औचित्य ही नहीं है | ~विशुद्ध चैतन्य

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