बुराई करने के लिए तो सारा ज़माना है….

अक्सर हम सभी दूसरों की नजर में अच्छे बनने के चक्कर वह नहीं हो पाते जो होना चाहते हैं | मुझे याद है जब अन्नुमालिक का इंटरव्यू पहली बार देखा था, तब मेरे पिताजी के मुँह से निकला था कि यह मैं मैं बहुत करता है | मुझे भी यही लगा था तब, लेकिन उसके बाद उसकी कई सुपरहिट गाने आने लगे | उसके बारे में मेरे साथी जो उसे जानते थे, वे बताते थे कि ये प्रोड्यूसरों के बाथरूम के बाहर भी खड़े होकर अपनी धुनें सुनाने से नहीं हिचकता था | कहता था कि आप आराम से निपट लीजिये मैं बाहर से ही धुन सुना देता हूँ…..चलिए ये सारी बातें तो लोग कहते ही हैं जब कोई सफल हो जाता है | लेकिन मुख्य मुद्दा यह कि आज की दुनिया में यदि आप सफल होना चाहते हैं तो अपने मुँहमियाँ मिट्ठू बने अन्नुमालिक की तरह | क्योंकि आज किसी की पास समय नहीं है आपके विषय में जानने या प्रचार करने का | और न ही हर कोई इतना सौभाग्यशाली होता है कि अम्बानी अदानी जैसे लोग करोड़ों रूपये फूँक दें आपके प्रचार के लिए |

आप जीवन में कुछ करना चाहते हैं, तो आपको ऊपर उठना पड़ेगा स्वयं को ही और स्वयं की प्रशंसा करके मनोबल भी बढ़ाते रहना पड़ेगा | क्योंकि निंदा और हतोत्साहित करने वालों की कोई कमी नहीं है और वे मुफ्त में मिल जायेंगे आपको जैसे जैसे आप आगे बढ़ेंगे |

यदि दूसरों ने आपकी कोई कमियां बतायीं हैं, तो उसे दिल पर न लें क्योंकि आज आपसे कई गुना अधिक कमियों वाले भी मंत्री और अधिकारी बने बैठे हैं | आज कितने मंत्री हैं जो आये दिन आपनी फूहड़ वक्तव्यों के कारण चर्चा में बने रहते हैं लेकिन उनके चेहरे में कोई शिकन तक नहीं आती |

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गलतियाँ करने से न डरें और निंदा की चिंता न करें | केवल इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि आपके कारण किसी निर्दोष के मान-सम्मान और जीवन पर कोई आँच न आये | गलतियाँ हो जाएँ तो उसे न दोहराने का संकल्प लें और आगे बढ़ें | एक दिन आप स्वयं से परिचित हो जायेंगे और तब आप पायेंगे कि आपने उसे खोज लिया जिसे खोजने के लिए लोग हिमालयों में भटक रहें हैं | क्योंकि आप जो होने के लिए आये थे, यदि वह नहीं हो पाते जो जीवन भर एक खालीपन सा लगा रहता है और बेचैनी रहती है सो अलग | इसलिए स्वयं को ही उठाना पड़ेगा, दूसरा जीवन भर नहीं समझ पायेगा कि वास्तव में आप दुनिया में क्यों आये हैं | दूसरों की सलाह भी तभी लीजिये जब आपको लगे कि आप भटक गये हैं और कोई दिशा नहीं सूझ रही | और अच्छाई को परिभाषित करना बहुत ही मुश्किल है | किसी को कुछ अच्छा लगता है, तो किसी को कुछ और लोगों को खुश करने में जीवन बीत जाएगा लेकिन लोग खुश नहीं होंगे | किसी न किसी कोई न किओ शिकायत रहेगी ही आपसे | -विशुद्ध चैतन्य

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