हमारी राजनीती किसी नेता या पार्टी पर आधारित नहीं है

यह ध्यान रहे,

  • बहुत से नागरिक ईश्वर भक्ति के नाम पर समाज व राष्ट्रीय समस्याओं से मुँह चुरा कर आश्रमों में भजगोविन्दम जप रहे हैं |
  • बहुत से भक्त नए भक्तों को फाँसने के लिए जगह जगह भजनमण्डली ले कर घूम रहे हैं |
  • बहुत नागरिक अपने बीवी बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी की चिंता में ही घुले जा रहे हैं |
  • बहुत से नागरिक नौकरी-छोकरी-गाड़ी-कोठी की चिंता मे ही दुबले हुए चले जा रहे हैं |
  • बहुत से नागरिक अपने अपने नेताओं के जयकारे लगाने में ही व्यस्त हैं |
  • बहुत से नागरिक चुटकुलों, शेरो-शायरी में मस्त हैं
  • बहुत से नागरिक अभिनेताओं और क्रिकेटरों की भक्ति में डूबे हुए हैं |


ऐसे में इस देश के प्रति सजग व जागरूक नागरिक लगभग लुप्तप्राय हो चुके हैं | ऐसे नागरिक जो सनातनी विचारधारा के हैं, जो ‘सर्वधर्म समभाव’ व ‘सर्व जन हिताय सर्वजन सुखाय’ सिद्धांत के अनुयाई हैं, उनसे आग्रह है कि वे इस भय से चुप न बैठें कि वे अल्पसंख्यक हैं और वे कुछ भी कर पाने में असमर्थ हैं | यह राष्ट्र विदेशियों का नहीं हम सनातनियों का ही है हमें ही संवारना है इस राष्ट्र को |

माना कि आज भारत में दडबों की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन दडबों में भी सनातनी विचारधारा के लोग हैं जो भारतीय संस्कृति से प्रभावित हैं | उनकी विवशता है कि वे दडबों से बाहर नहीं निकल सकते क्योंकि कुछ दडबों में शर्ते ही ऐसी हैं कि उनको स्वतंत्र चिन्तन की मनाही है | जो उनके ईश्वरों ने किताबों में लिख दिया उससे अलग न तो वे सोच सकते हैं और न ही कह सकते हैं | हमें उनको नजरअंदाज़ कर देना चाहिए | उनको उनके हाल पर छोड़ दीजिये और आगे बढ़िये | सनातन सिद्धांत निरंतर गति व नवीनता पर आधारित है किसी ईश्वरीय पुस्तक पर नहीं | इसलिए यदि आप भी किसी कारण वश ऐसी स्थिति में फँसे हुए हैं कि कर्मकांडों में उलझकर रह गये, तो पुनः सुबह का सूरज देखिये और साक्षात् नारायण को प्रणाम कर स्वयं को मुक्त करिए किताबी बंधनों से और प्रकृति को स्वीकारिये | हम सनातनी प्रकृति के नियमों के अधीन हैं किसी किताबी नियमों के अधीन नहीं हैं | ऐसी कोई भी शिक्षा, ऐसा कोई भी सिद्धांत या ऐसा कोई भी कानून जो हमें सहजता से जीने की छूट नहीं देता, जो हमें दूसरों से नफरत करने की प्रेरणा देता है, जो हमें भेदभाव में बाँधता है, जो हमे किसी दड़बे में कैद करता है वह ईश्वरीय नहीं हो सकता और न ही हम सनातनियों के लिए स्वीकार्य हो सकता है | अतः स्वयं को ऐसे बंधनों से मुक्त करिए और बहुमत के साथ भेड़चाल में चलने के बजाय स्वविवेकानुसार अपनी ही आत्मा की आवाज सुनकर चलिए |

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यह भी ध्यान रखें कि राजनीती से हम विमुख नहीं हैं और न ही धर्म से | लेकिन हमारी राजनीती किसी नेता या पार्टी पर आधारित नहीं है, अपितु सम्पूर्ण राष्ट्र ही हमारी पार्टी है और उसके नागरिक उस पार्टी के सदस्य | हमारा धर्म किसी किताब पर आधारित नहीं है, अपितु उस सिद्धांत पर आधारित है जिसके आधार पर दुनिया के सभी ईश्वरों ने अपने अपने अनुयाइयों के लिए पुस्तकें लिखीं | इसलिए हमे ये कांग्रेसी-भाजपाई वाले खेल से बाहर निकलना होगा | कोई फर्क नहीं पड़ेगा कांग्रेस सत्ता में रहे या भाजपा या कोई और… सभी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं | ये पार्टियाँ और २०-२० सिरीज़ खेलने वाली क्रिकेट टीम एक समान है | जैसे क्रिकेटर खरीदे बेचे जाते हैं, वैसे ही इन पार्टियों के नेता भी खरीदे बेचे जाते हैं | एक नेता या पार्टी फ्लॉप हो जाये तो दूसरी आ जायेगी लेकिन इनका मालिक तो वही रहेगा | इसलिए इस खेल से स्वयं को बाहर कर लीजिये | किसी भी नेता या पार्टी के समर्थन या विरोध में कोई पोस्ट न करें | केवल राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दें | केवल यह देखें कि सरकार के किसी निर्णय से आम जन को लाभ हो रहा है या हानि बस | जनता को आत्मसम्मान व आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक करें | यह ध्यान रखें कि हम सरकार के विरुद्ध नहीं हैं क्योंकि हम जानते हैं कि सरकार गुलाम है पूंजीपतियों व विदेशियों की | इसलिए सरकार किसी की भी बने वह करेगी वही जो विदेशी चाहेंगे, जो पूंजीपति चाहेंगे | उनका दाना पानी ही उनकी मेहरबानियो से चलता है तो वे बेचारे कैसे उनकी इच्छा के विरुद्ध चल सकते हैं ?

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अतः हमें व्यक्तिवाद व जातिवाद से बाहर निकलकर केवल राष्ट्र के प्रति ही चिंतन करना है | और यही सनातन धर्म की शिक्षा भी है | ~विशुद्ध चैतन्य

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