पूर्वजन्म पुनर्जन्म पर काम करने वाले वैज्ञानिकों की धारणा है कि धर्म और देश इंसानों के बनाए हैं और कुदरत इनको कतई नहीं मानती।

भारतीय जनता पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले जन्म में कट्टर मुस्लिम थे। उनका नाम था सर सैय्यद अहमद खान। जी हां, वहीं सर सैय्यद अहमद जिन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी।

पिछले जन्म के सर सैय्यद अहमद और इस जन्म के नरेंद्र मोदी की शक्त सूरत, दाढी और आंखें ही एक जैसी नहीं हैं बल्कि उनके जीवन की घटनाएं भी चौंकाने वाली हद तक एक जैसी हैं। यह दावा किसी सिरफिले ने नहीं किया है बल्कि अमरीका में सानफ्रांसिस्को स्थित इंस्टीट्यूट फॉर दी इंटीग्रेशन आफ साइंस, इन्ट्यूशन एण्ड रिसर्च (आइआइएसआइएस) ने किया है।

इस संस्था ने पूरी दुनिया में अब तक करीब 20 हजार पुरुषों, बच्चों और यहां तक पशुओं के पुनर्जन्म पर भी अनेक अमरीकी विश्वविद्यालयों की मदद से शोध अध्ययन किए हैं और अनेक पुस्तकें भी प्रकाशित की हैं।

मोदी इस जन्म में अभूतपूर्व ढंग से पूरे भारत को अपने पक्ष में करने में कामयाब हुए और अगर पूर्व जन्म शोधवेत्ताओं का दावा सही माना जाए तो मुसलमानों में एकता की अलख जगाकर और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना करके उन्होंने पिछले जन्म में भी कुछ ऐसा ही काम किया था।

पूनर्जन्म के मामलों पर शोध के दौरान एक धर्म में दूसरे, एक देश से दूसरे देश में और  से पुरुष या पुरुष से बनने के हजारों मामले इन विषयों पर शोध करने वालों ने पाए हैं और सबसे ज्यादा हैरत की बात यह पाई कि कोई व्यक्ति पिछले जन्म में जिस स्तर की प्रसिद्धि हासिल किए था उसी स्तर की कामयाबी पा लेता था।

आइआइएसआइएस ने एक शोध में पिछले जन्म में नरेंद्र मोदी क्या थे। इस पर काम करने के लिए विश्वविख्यात पुनर्जन्म वैज्ञानिक केविन रियर्सन की सेवाएं ली। केविन ने मिस्र के अहतुन रे नामक माध्यम की सहायता से मालूम किया कि पिछले जन्म में नरेंद्र मोदी ने सर सैय्यद अहमद खान के रूप में दुनिया भर के मुसलमानों की एकता, शैक्षिक प्रगति और अधिकारों के लिए काफी काम किया। वह तब भी दाढी रखते थे और उनका स्वरूप आज जैसा ही हुआ करता था।

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उल्लेखनीय है कि सर सैय्यद अहमद खान ने ही यह अभियान चलाया था कि मुसलमानों को आधुनिक तालीम दी जानी चाहिए और लड़कियों को भी पढ़ाना चाहिए। उन्होंने ही बाद में यह विचार दिया कि मुसलमानों का भला एक पृथक राष्ट्र के गठन के बाद ही मुमकिन है। यही विचार अंतत: पाकिस्तान के गठन का कारण बना।

आइआइएसआइएस अनेक नामचीन शोध वैज्ञानिकों और परा-मनोविश्लेषकों की मदद से विज्ञान, पूर्वाभास और पुनर्जन्म समेत अनेक विषयों पर पिछले 30 साल से काम कर रही है और पूरी दुनिया में इसके लाखों समर्थक हैं। यह जानकर हैरत नहीं होनी चाहिए कि हर देश, धर्म और काल खंड में मृत्यु के बाद की दुनिया, पूर्वजन्म और पुनर्जन्म को मानने वाले करोड़ों लोग मौजूद हैं।

आइआइएसआइएस.नेट की अपनी वेबसाईट आइआइएसआइएस.नेट पर पुनर्जन्म, पूर्वाभास और इससे जुड़े अनेक रोचक रहस्यों पर सप्रमाण बेशुमार जानकारी उपलब्ध है। दुनिया भर के इन विषयों के जानकार लेखक और विशेषज्ञ इससे जुडे हैं।

सैकड़ों अन्य कामयाब लोगों के बारे में किये गए शोध अध्ययनों में ऐसा ही धर्मातरण पाया गया है। सिर्फ एक बात सामान्य रही है कि कुदरत ने किसी को कुछ भी बना कर इस दुनिया में वापस भेजा मगर उसकी पिछले जन्म की काबलियत नहीं छीनी।

पुनर्जन्म पर शोध के बाद अमरीकी मनोवैज्ञानिक और वर्जीनिया विश्वविद्यालय के विख्यात प्रोफेसर डा. इयान स्टीवेंसन ने लगभग 3000 पुनर्जन्मों की पुष्टि की।
उनके इन अध्ययनों पर भी पुस्तकें छपीं। पुनर्जन्म के बारे में स्थापित और विश्व स्तर पर मान्य सिद्धांतों के मुताबिक पुन: जन्म लेने वालों में पूर्वजन्म की यादें, पूर्वजन्म की आदतें और दिलचस्पियां, शरीर पर पूर्व जन्म जैसे निशान. खानपान की रुचियां और सबसे बढ़कर पूर्वजन्म जैसा ही चेहरा मोहरा हुआ करता है।

आइआइएसआइएस के डा. वाल्टर सेमकिव ने भी दुनिया भर के मशहूर लोगों की पूर्व जन्म पर काम किया है। उनके मुताबिक भारतीय फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन पूर्व जन्म में भी बेहद कामयाब अभिनेता ही थे। तब वे शेक्सपियर नाटकों के अभिनेता एडविन बूथ थे। उनके उस जन्म में भी नाक नक्श और आखें पिछले जन्म में भी वर्तमान अमिताभ बच्चन जैसे ही थे। उनका एकमात्र उपलब्ध फोटो युवा अमिताभ जैसा ही लगता है।

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डा. वालटर सेमकिव की पुस्तक में हिन्दुस्तान की अनेक हस्तियों के पूर्व जन्म पर शोध नतीजे दिए गए हैं। उनके मुताबिक भारत के राष्ट्रपति रहे मिसाइल मैन डा. अब्दुल कलाम पूर्व जन्म में भारत के मशहूर सेनानी टीपू सुलतान थे। उस रूप में भी वह अपने मौजूदा स्वरूप की खासियत अपनी खास हेयर स्टाइल जैसी पगड़ी ही पहना करते थे। पूर्व जन्म में भी टीपू एक तरह से मिसाइल मैन ही थे। युद्धों में पहली बार टीपू ने ही राकेटों का इस्तेमाल किया था।

पूरे संसार में हर देश और धर्मो को मानने वालों में पूर्वजन्म और पुनर्जन्म के मामले पाए जाते हैं। तिब्बतियों में तो दलाई लामा की तलाश ही इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर की जाती रही है।

आइआइएसआइएस के संस्थापक तथा पेशे से एक चिकित्सक डा.वाल्टर सेमकिव, एमडी शिक्षा प्राप्त हैं और दुनिया के सबसे विख्यात पुनर्जन्म विशेषज्ञ प्रोफेसर डा. इयान स्टीवेंसन के शिष्य हैं।

डा. वाल्टर सेमकिव ने लगभग 4000 लोगों से सम्बंधित पुनर्जन्म के आंकडों का अध्ययन किया है और इस विषय पर अनेक किताबें लिखीं। उनकी पुस्तक ,बोर्न अगेन, की अब तक 40 लाख प्रतियां अनेक भाषाओं में बिक चुकी हैं।

आइआइएसआइएस के अनेक शोध वैज्ञानिक यह मानते हैं कि पिछले जन्म के मुसलमानों की भलाई के लिए जद्दोजहद करने वाले सर सैय्यद अहमद खान भले ही नरेन्द्र मोदी के रूप में जन्म लें या देश के लिए सर्वस्व बलिदान करने वाले टीपू सुलतान डा. एपीजे अब्दुल कलाम के रूप में मगर कुदरत द्वारा उनके जीवन दर्शन और लक्ष्य पूर्व निर्धारित ही हैं।

पूर्वजन्म पुनर्जन्म पर काम करने वाले वैज्ञानिकों की धारणा है कि धर्म और देश इंसानों के बनाए हैं और कुदरत इनको कतई नहीं मानती। इन्हीं शोध अध्ययनों के मुताबिक मशहूर पिछले जन्म में टीपू सुलतान के पिता सुलतान हैदर अली की मिलेट्री साज सामान और राकेटों में बहुत दिलचस्पी थी। उनके नाम नक्श, शैली और जीवन रुचियां भारत के अन्तरिक्ष वैज्ञानिक डा. विक्रम साराभाई से काफी
मिलती थी।

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डा. साराभाई ने ही आरम्भ में पिछले जन्म के टीपू और इस जन्म में एक रक्षा वैज्ञानिक के रूप में जन्मे डा. कलाम की काबलियत को खूब बढ़ावा दिया। पुनर्जन्म शोध अध्ययनों में परा मनोवैज्ञानिकों ने पाया है कि अतिशय प्रतिभावान और कामयाब लोगों की पूर्वजन्म की क्षमताओं, कामयाबियों और जीवन स्तर में पुनर्जन्म में कमी नहीं आती।

पुनर्जन्म पर काम करने वाले वैज्ञानिक इसे भाग के कार्मिक सिद्धांत के जरिए समझाते हैं जिसके अनुसार पूर्व जन्म के कर्मो (प्रारब्ध) को वर्तमान कर्मो के गुणांक के रूप में हासिल किया जाता है। इसके अनुसार किसी भी जन्म में किया गया कर्म कभी भी नष्ट नहीं होता।

आइआइएसआइएस अध्ययनों के मुताबिक पिछले जन्म में लाल किले से अंग्रेजों द्वारा बंदी बनाकर निर्वासित किए गए बहादुर शाह जफर ने ही भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में जवाहर लाल नेहरू के रूप में उसी लाल किले पर तिरंगा फहराने की ख्वाहिश पूरी की जहां से पिछले जन्म में उनको अपमानित करके निकाला गया था। जवाहर लाल नेहरू और बहादुर शाह जफर दोनों की ही शकल सूरत बहुत मिलती थी।

आइआइएसआइएस ने अनेक विश्वस्तरीय राजनेताओं, उद्योगपतियों और फिल्म, साहित्य संगीत तथा खेल की दुनिया की हस्तियों के बारे में इसी प्रकार की दिलचस्प पूर्वजन्म सम्बन्धी खोजें की हैं।

कहीं भी यह नहीं पाया गया कि कोई भी विख्यात व्यक्ति इस जन्म में अपनी पिछले जन्म की भूमिकाओं से कोई अलग सोच रखता था। नरेंद्र मोदी यदि वाकई ही पिछले जन्म में सर सैय्यद अहमद खान थे तो क्या इस जन्म में मुसलमानों की तालीम और खुशहाली को बढ़ावा देने की कोई नयी कोशिश करेंगें। ये तो वक्त ही बताएगा।

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