सन्यासी को कैसा होना चाहिए ?

पेड़ पर उल्टा लटका हुआ ?

लंगोट पहनकर जंगलों में ईश्वर को ढूँढता हुआ ?

गेरुआ में भीख मांगता हुआ ?

गीता और रामायण बाँचता हुआ ?

समाज से भागा हुआ लेकिन साधुसमाज में आश्रय लिया हुआ ?

जादू-टोना करने वाला या जादूगरी दिखाने वाला ?

गोल्डन, पायलट, लेपटॉप या मोबाइल बाबा जैसा ?

लोगों की गालियाँ सुनकर भी श्री श्री रविशंकर जी की तरह मुस्कुराने वाला ?

पुलिस के डर से सलवार कुर्ती डाल कर भागने वाला ?…..

क्या यही है सन्यास धर्म ?

सन्यासी को कैसा होना चाहिए अब वे ज्ञानी सिखायेंगे, जो अपने बच्चों को मर्यादा, सभ्यता और राष्ट्रभक्ति नहीं सिखा पाए ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे सन्यासी को कैसा होना चाहिए और कैसा नहीं, जो खुद अपने बच्चों को नहीं सिखा पाए शालीन भाषा और बड़ों के प्रति आदर का भाव ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे सन्यासी को कैसा होना चाहिए जो नहीं सिखा पाए अपने सम्प्रदाय को कि कोई भी नेता या गुण्डा ईश्वर से श्रेष्ठ नहीं होता और उसके बहकावे में आकर कोई काम भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे किसी को आर्थिक, शारीरिक या मानसिक कष्ट पहुँचता हो ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे सन्यासी को स्त्री से दूर रहना है या नहीं, जिनकी स्त्रियाँ और जो स्वयं स्त्रियों के कपड़े उतारने में लगे हुए हैं ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे संयासी को कैसा होना चाहिए जो नौकरी करने के लिए पढ़ते हैं और नौकरी करते हुए मर जाते हैं, और परोपकार के नाम पर मंदिर में दो रूपये चढ़ाकर पुन्य कमा रहे हैं ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे संयासी को कैसा होना चाहिए जो नारे लगाकर और नेताओं की जयकारा लगाना राष्ट्रभक्ति मानती है, लेकिन किसी पीड़ित या शोषित की सहायता करना सरकार का काम ?

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वे ज्ञानी सिखा रहें हैं सन्यासी को कैसा होना चाहिए, जिन्होंने शास्त्र रट लिए लेकिन समझा नहीं कि लिखा क्या है शास्त्रों में |

वे ज्ञानी सिखायेंगे संयासी को कैसा होना चाहिए, जो दिन भर ज़हर उगलते रहते हैं दूसरे सम्प्रदायों के लिए राष्ट्रभक्ति के नाम पर ? और आश्चर्य कि बात है यही लोग बातें करते राष्ट्रीय एकता की ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे संयासी को कैसा होना चाहिए, जो देवी देवताओं की तस्वीरें शेयर करते हैं रहते हैं भक्ति के नाम पर और जहर भरा पड़ा है भीतर ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे संयासी को कैसा होना चाहिए, जिनके ईश्वर मंदिर और मस्जिद में कैद पड़े हुए हैं ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे संयासी को कैसा होना चाहिए, जिनके मंदिर मस्जिद अपने गाँव की सहायता भी नहीं कर पाते ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे संयासी को कैसा होना चाहिए, जिनके मंदिर मस्जिद धर्म के नाम पर दंगे फसाद के माध्यम बने हुए हैं ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे संयासी को कैसा होना चाहिए, समझायेंगे जो राम और सरकार भरोसे बैठे रहते है और सरकार ही विदेशियों को हमारे सर पर लाकर बैठाती है ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे संयासी को कैसा होना चाहिए, जो अपनी मातृभाषा से अधिक सम्मान विदेशी भाषा को देते हैं ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे कि सन्यासी को कैसा होना चाहिए, जो स्वयं अपराधी छवि के नेताओं को वोट देती है और उन्हें सौंपती है मालिकाना अधिकार खुद के शोषण का ?

वे ज्ञानी सिखायेंगे कि सन्यासी को कैसा होना चाहिए, जो ईश्वर और अल्लाह से भी ऊपर मानते हैं ‘मोहर्रम अली पप्पू’ जैसे किराए के गुंडों को | मुस्लिम इनके कहने पर आगजनी करते हैं और हिन्दू और सिख बदला लेने के लिए कार्यवाही करते हैं उन निर्दोषों, अबलाओं और बच्चों पर जिनका कोई लेना देना नहीं होता ऐसी घटनाओं में | पप्पू जैसे लोगों के आका विपक्ष पर आरोप लगाते हैं और जनता आपस में मारकाट करती है | जैसे कि गोधरा में हुआ | क्या कभी कोई नेता या उपद्रवी हताहत होता है ऐसी कार्यवाहियों में ? बहुत हुआ तो कुछ महीने की जेल और फिर ससम्मान समाज में उत्पात करने के लिए स्वतंत्र |

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यह सन्यासी बिलकुल अलग है यह जान लीजिये | मुझे सन्यासधर्म सिखाने से पहले स्वयं राष्ट्रधर्म, मानव धर्म, नागरिकधर्म, पुरुषधर्म, स्त्रीधर्म, छात्रधर्म, का अच्छे से अध्ययन करके समझ लें और व्यवहार में लायें | -विशुद्ध चैतन्य

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