तैयार हो जाइए भविष्य के सभ्य, उन्नत और अत्याधुनिक समाज के लिए

मानवजाति ने एक बड़ी भूल की वह है कपड़ों का अविष्कार और उसे न पहनने वालों को अनैतिक व असामाजिक कहना | आज कपड़े पहनने के कारण ही बलात्कार की घटनाएँ बढ़ गयीं हैं भारत में | जबकि जो विदेश से घूम कर आये हैं वे बताते हैं कि विदेशों में कुछ जगहें तो ऐसी हैं जहाँ स्त्री पुरुष दोनों ही कपड़े नहीं पहनते और वहाँ बलात्कार भी नहीं होते |

अब विश्व की महिलाओं ने बीड़ा उठाया है पुरुषों द्वारा थोपे गए कपड़ों का बहिष्कार करने का | हमारा सिनेजगत भी कपड़ों के बहिष्कार करने के अभियान में पूरी तन्मयता से साथ दे रहा है |

जल्दी ही महिला आयोग कपड़ों के विरोध में बिल लेकर आयेंगी और सर्वसम्मति से पास करवा लेंगी | तब नए सामाजिक नियम बन जायेंगे |

Ø कपड़े पहने हुए व्यक्ति को लोग पागल कहेंगे या असामाजिक या मंदबुद्धि |

Ø कपड़े पहने हुए व्यक्ति को देख कर स्त्रियाँ शर्म से अपनी आँखों में हाथ रख लिया करेंगी |

Ø सार्वजनिक रूप से कपड़े पहनना अपराध माना जाएगा और केवल बेडरूम, बाथरूम या समुद्र में नहाते समय ही कपड़े पहनने के छूट होगी | 

Ø अमेरिका जैसे विकसित देशों में प्रदर्शनकारी पूरे कपड़े पहनकर विरोध करेंगे | 

Ø पूनम पांडे खिलाड़ियों के जीत की ख़ुशी में कपड़े पहन लेगी और सारे फोटोग्राफर उस दुर्लभ दृश्य की तस्वीर लेने के लिए सरफुटव्वल करेंगे |

जरा सोचिये…! हम तब वास्तव में आधुनिक कहलायेंगे | तब हम सभ्य और सामाजिक कहलायेंगे | क्योंकि हमने जन्म लिया बिना कपड़ों के, जियेंगे बिना कपड़ों के और मरेंगे बिना कपड़ों के | तो तैयार हो जाइए भविष्य के सभ्य, उन्नत और अत्याधुनिक समाज के लिए और यदि घर में कपड़े हैं तो उन्हें कबाड़ी को देकर कुछ और सामान खरीद लीजिये | -विशुद्ध चैतन्य

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