स्वयं से परिचित होना ही एक मात्र उपाय है उन्नति का

“जब मैं मुंबई आया था तब भी स्टारडस्ट मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मैं बेस्ट हूं। तब लोगों ने कहा था कि यह घमंडी है, बड़बोला है। पता नहीं कितनी आलोचना हुई। मैं जब सुबह उठता हूं और यह नहीं सोच पाऊं कि मैं बेस्ट हूं तो कुछ कर ही नहीं पाऊंगा। हलांकि मुझे पता है कि मैं बेस्ट नहीं हूं।

सुबह-सुबह एक बच्चा उठता है और दीवार के ऊपर लिखता है कि आई एम द बेस्ट। लेकिन लिखने के बाद सोचता है कि यार मेरा जो भाई है वह तो बेस्ट डॉक्टर है, मेरी जो बहन है वह तो बैडमिंटन में वर्ल्ड चैंपियन हो गई है। फिर वह सोचता है और दीवार पर मिटाकर लिखता है कि आई एम द बेस्ट इन द वर्ल्ड। तो मैं उस बच्चे की तरह हूं। मैं जब सुबह-सुबह उठता हूं तो भरोसा दिलाना होता है कि मैं बेस्ट हूं। यह घमंड नहीं है। यह खुद को भरोसा दिलाना है।” -शाहरुख़ खान
शाहरुख की फिल्म जब बाजीगर आई थी, उस समय उनको बहुत करीब से जानने वाले दिल्ली के एक संगीतकार ने मुझे बताया कि कैसे एनएसडी में लोग उसके बडबोलेपन से परेशान थे | शाहरुख़ हमेशा कहा करते थे कि एक दिन वह सुपरस्टार बनेंगे और सभी हँसा करते थे |

मैं अक्सर कहता हूँ कि स्वयं से परिचित होना ही एक मात्र उपाय है उन्नति का और शाहरुख़ उसका जीवंत उदाहरण है | दुनिया आपके विषय में वही जानती है जो वह देखती है, जबकी आपका अंतर्मन आपके विषय में वह जानता है जो आप हैं | अतः स्वयं से परिचय अवश्य कीजिये क्योंकि वह कभी आपको भटकाएगा नहीं | वह आपको वही करने के लिए प्रेरित करेगा जो आप करने के लिए आये हैं | चाहे उस काम की कोई कीमत आज न हो, लेकिन कल वही काम महत्वपूर्ण हो जाएगा औरों के लिए जैसे एडिसन के कार्य | -विशुद्ध चैतन्य  

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