गुरु-विपत्ति एक समाना

गुरु और विपत्ति में यही एक समानता है कि गुरु भी विपत्ति की तरह अवांछित व्यवहार करता है | गुरु आपसे वह करने को नहीं कहेगा जो आपको पसंद हो, अपितु वह करने को कहेगा, जिससे आपका उत्थान हो | गुरु आपको कुछ सिखायेगा नहीं, बल्कि आपके भीतर जो गुण छुपा हुआ, जो ज्ञान छुपा हुआ है, उसे उभारेगा | गुरु कुछ थोपेगा नहीं, बल्कि आपको उभरने का अवसर देगा | गुरु बिलकुल लापरवाह दिख सकता है, लेकिन आपकी हर गतिविधि पर उसकी नजर रहेगी | गुरु आपसे दूर भी होंगे तो भी उन्हें आपकी चिंता रहेगी….. लेकिन गुरु को शिष्य मिलना और शिष्य को गुरु मिलना उतना ही कठिन है वर्तमान युग में, जितना कि किसी को उसका जीवन साथी मिलना |


विवाह करना, बच्चे पैदा करना महान काम नहीं है, ये काम तो पशु-पक्षी मानवों से बेहतर कर लेते हैं और वह भी बिना किसी डॉक्टर, अस्पताल या अन्य किसी की सहायता के | महान काम है अच्छा जीवन-साथी मिलना और वह बहुत ही कम लोगों को मिल पाता है, बाकी तो अपनी जिंदगी, अपने वैवाहिक संबंधो को ढो रहे होते हैं | इसी प्रकार गुरु और शिष्य भी बहुत मिल जायेंगे, लेकिन एक सच्चे गुरु को सच्चा शिष्य, और सच्चे शिष्य को सच्चा गुरु मिल पाए वह बहुत ही कम हो पाता है |

क्योंकि शर्तों पर आधारित होते हैं ये रिश्ते वर्तमान युग में | जबकि उपरोक्त दोनों ही सम्बन्ध बिना किसी शर्त के स्वाभाविक होने चाहिए | दोनों सम्बन्ध समर्पण पर आधारित है, एक को मिटना ही होगा कुछ पाने के लिए क्योंकि अहंकार से कुछ नहीं पाया जा सकता | बिना झुके नदी से प्यास नहीं झुकाई जा सकती और ज्ञानियों की कोई कमी नहीं है इस दुनिया में, इसलिए ज्ञानियों को कभी गुरु नहीं मिलते… केवल टीचर मिल जाते हैं, शास्त्रज्ञ मिल जाते हैं, रटाने सिखाने वाला मिल जाता है… लेकिन गुरु ? गुरु नहीं मिलते |

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ऐसे ज्ञानी भ्रम में रहते हैं कि उन्होंने गुरु से शिक्षा प्राप्त की, वास्तव में उन्होंने शिक्षक से शिक्षा प्राप्त कि, टीचर से शिक्षा प्रात की होती है, न कि गुरु से | क्योंकि गुरु कुछ देता नहीं, केवल जगाता है, होश में लाता है और कहता है; “यह देखो तुम्हारे पास तो ज्ञान का खजाना पड़ा हुआ है, कहाँ भटकते फिर रहे हो ?”

इसी प्रकार जीवन साथी कुछ देता नहीं केवल सहयोगी हो जाता है जीवन संग्राम में | उसका साथ होना ही बहुत होता है, उसका आसपास होना ही बहुत होता है | जीवन साथी आपकी उस कमी को पूरी करता है, जो जीवन संग्राम में आपको कमजोर बना रही थी | लेकिन यदि दोनों ही ज्ञानी निकले तो, दोनों ही स्वयं को मिटाने के लिए तैयार न हों, तो वह वर्तमान विवाह की तरह बोझिल जिंदगी हो जायेगी | क्योंकि एक म्यान में दो तलवारे नहीं रह सकतीं और रख भी दी गयीं किसी तरह तो युद्ध या आपत्काल में दोनों ही काम नहीं आएँगी |

~विशुद्ध चैतन्य

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