8 जनवरी 1964 को अपने पहले सालाना भाषण में लिंडन ने गरीबी के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया था.

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में गरीबी अब तक खत्म नहीं हो पाई है. आज से 50 साल पहले तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने अपने सालाना भाषण में गरीबी को उखाड़ फेंकने का ऐलान किया था. 8 जनवरी 1964 को अपने पहले सालाना भाषण में लिंडन ने गरीबी के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया था.

भुखमरी का कारण गरीबी है. अमेरिका के आवास और शहरी विकास विभाग के एक शोध के मुताबिक साल 2013 में न्यू यॉर्क शहर में बेघरों की संख्या बढ़ी है. अमेरिका के बड़े शहरों में सिर्फ लॉस एजेंलिस में वृ्द्धि की प्रतिशत न्यू यॉर्क से अधिक है. आपात खाद्य सहायता की बहुत मांग है. न्यू यॉर्क में फूड बैंक हर रोज चार लाख भूखे लोगों को शहर भर में खाना खिलाने का काम करता है.

अमेरिकी जनगणना विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2009 और 2011 के बीच आई वैश्विक मंदी में करीब तीन अमेरिकियों में से एक ने गरीबी का अनुभव किया. कुछ लोगों के पास नौकरी होती है लेकिन वे अपनी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते. उन्हें गरीब कर्मी कहा जाता है. अमेरिका में न्यूनतम मजदूरी करीब 7.25 डॉलर यानी 450 रुपये है. साल 2013 में गैलॉप के एक सर्वे से पता चला कि अमेरिका के 20 फीसदी वयस्क साल के किसी एक समय में पर्याप्त भोजन खरीदने के लिए जद्दोजहद करते रहे.

साल 2012 में करीब चार करोड़ 70 लाख अमेरिकी गरीबी से प्रभावित हुए. इनमें एक करोड़ 30 लाख बच्चे भी शामिल हैं. मंदी के पहले अमेरिका के फूड स्टैंप प्रोग्राम के तहत 26 लाख व्यक्तियों को अनुमोदित खाद्य सामग्री सरकारी सब्सिडी के साथ मिली थी. यह आंकड़ा 2010 के बाद से तेजी से बढ़ा है.

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कारण क्या है कि पूरे विश्व के आतंकवादियों को ट्रेनिंग और हथियार उपलब्ध करवाने वाली अमेरिका में उनके ही नागरिक भूखमरी में जी रहें हैं ?

मेरी नजर में तो एक ही कारण दिखाई देता है कि भुखमरी और बेरोजगारी भले ही मानवता के नाम पर कलंक और एक अभिशाप है, लेकिन नेताओं के लिए ये वरदान हैं | क्योंकि यदि यही नहीं रहेंगे तो गरीबी और बेरोजगारी मिटाने का परम्परागत नारा और भाषण बेकार हो जाएगा | यह भाषण तो नेताओं को जन्मजात विरासत में मिलता है और अभ्यास इतना हो चुका है इस भाषण का कि डेनमार्क या स्वीडन में भी जायेंगे तो गरीबी मिटाने का भाषण ही देंगे | ~विशुद्ध चैतन्य 

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