कभी आपने जानने का प्रयास किया है कि आपके साल भर का मेडिकल का बिल कितना होता है ?

हम डॉक्टर को भगवान् मानते हैं लेकिन वास्तव में वे शनि के दूत हैं जो आपके कर्मों के आधार पर आपसे जुर्माना वसूलते हैं |
अगर आप अपने आस पास नजर दौडाएँ तो पायेंगे कि दूसरों को पीड़ित करने वाले, किसी असहाय की सहायता न करने वाले, अपने लीजिये जीने वाले और कंजूस प्रवृति के लोगों का जीवन डॉक्टर के हाथ थामें ही कटता है |

कभी आपने जानने का प्रयास किया है कि आपके साल भर का मेडिकल का बिल कितना होता है और किसी की सहायतार्थ किया खर्च कितना होता है ? 

आज कल एक फैशन चल पड़ा है डॉक्टरों के दरबार में हाज़िरी देने का | बहुत शान से बताते हैं लोग कि किस डॉक्टर के यहाँ पेशी थी और कितनी फीस देनी पड़ी उसे | अक्सर लोग कहते हैं कि मैं तो सरकारी अस्पताल में कभी जाता नहीं प्राइवेट में ही जाता हूँ | कुछ लोग फोर्टिस और अपोलो से नीचे जाना पसंद नहीं करते | डॉक्टर भी कहते हैं कि महीने में कम से कम एक बार चेकअप जरुर करवा लेना चाहिए | एक प्रकार से यह ठीक भी है कि शरीर हमारा वाहन है इसलिए मेंटेनेंस रखनी ही चाहिए | एक बार मैकेनिक (डॉक्टर) को दिखाना ही चाहिए | आज कल सारे स्पेयर पार्ट्स मार्किट में उपलब्ध तो हैं ही, आवश्यकतानुसार बदलवा भी लेना चाहिए….

यहाँ मुझे याद आया कि मेरे गुरूजी हमेशा कमर दर्द को लेकर परेशान रहते हैं तो मैं उनसे अकसर कहता हूँ कि आपके तो कई शिष्य विदेशों में हैं | कोई विदेशी कमर क्यों नहीं लगवा लेते ?….:)

तो यह फैशन हो गया आजकल जबकि हमारे आयुर्वेद में अचूक उपचार हैं इन बीमारियों का और वह भी बहुत ही सस्ते में | क्योंकि आयुर्वेद का उद्देश्य आपको स्वस्थ करना होता है आपकी बीमारी से पैसे कमाना नहीं होता | लेकिन हम आयुर्वेद या देसी इलाज नहीं करवाएंगे क्योंकि समाज में नाक कट जायेगी कि पढ़े लिखे होकर देसी इलाज करवा रहे हो | ब्रिटेन की पूर्व प्रधान मंत्री मार्गरेट थैचर शैम्पू से लेकर तेल तक अर्थ शरीर की आवश्यकता की सभी चीजें आयुर्वेदिक चिकित्सक से ही लेती हैं | वे स्वयं कभी ऐलोपेथी का प्रयोग नहीं करतीं | होलीवुड की कई अभिनेत्रियाँ सूर्यनमस्कार करती हैं स्वस्थ रहने के लिए और आयुर्वेदिक दवाएं ही प्रयोग करती हैं | लेकिन हमें शर्म आती है |

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चलिए कोई बात नहीं अपने अपने कर्म हैं भोगने तो हैं ही | बीमारी के बहाने ही सही आपके अनैतिक रूप से जमा किये धन बाहर निकल जाते हैं | कोई आपसे सहायता माँगता है तो आपके पास सौ बहाने निकल आते हैं, वहीँ जब डॉक्टर के पास जाते हैं तब सौ बहाने निकल आते हैं डॉक्टर के पास भी आपके जेब से धन बाहर निकलवाने के लिए | और आप उतने ही असहाय हो जाते हैं जितना असहाय वह व्यक्ति आपके पास से लौटा जो आपसे सहायता माँगने आया था | ~विशुद्ध चैतन्य  

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