जीवन का अंतिम पड़ाव

व्यक्ति यह मानता है कि वह अब अपने कर्तव्यों से मुक्त हो गया है और उसे बस किसी आश्रम में जाकर माला जपते हुए, भजन करते हुए और दवाइयाँ खाते हुए अपनी मृत्यु की प्रतीक्षा करनी है | मेरे आश्रम में भी ऐसे वृद्ध आते हैं कुछ दिन ठहरते हैं और चले जाते हैं | मैं उनके इस सुनहरे अवसर को और अधिक मूल्यवान बनाना चाहता हूँ, लेकिन अभी मैं इस योग्य नहीं हूँ कि सभी आवश्यक सामग्रियों व सुविधाओं से युक्त वृद्धाश्रम बनवा सकूँ | लेकिन भविष्य में ऐसा एक आश्रम बनवाना तो है ही अपनी मृत्यु से पहले |

तो जब हम अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में होते हैं तो कुछ लोगों के लिए वह समय प्रतीक्षा कक्ष में बैठे यात्रियों जैसा हो जाता है | वे जीवन को बोझ मानकर हर दिन यही कहते रहते हैं कि हे ईश्वर बुला ले हमें | या फिर लोगों को प्रवचन देते घूमते हैं जिसके कारण सभी उनसे बचना चाहते हैं |

लेकिन कई लोग ऐसे भी होते हैं जो इस जीवन को और अधिक जीवन्तता से जीते हैं | कुछ अपने उन रुचियों या स्वप्नों को पूरा करने में समय व्यतीत करते हैं जो वे अपने जीवन के भागमभाग में नहीं पूरा कर पाए | जैसे एक ८० साल की नानी अपनी पोती के साथ ही ग्रेजुएट होती है या कोई वृद्ध कोई वाधयंत्र या गायन कक्षा में प्रवेश लेता है |


हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि केवल शरीर नष्ट होता है और आत्मा दूसरा शरीर धारण कर लेती है | अर्थात पुनर्जन्म ले लेता है | जब व्यक्ति मृत्यु से पूर्व किसी विषय पर बहुत केन्द्रित हो जाता है तब वही उसके अगले जन्म का उद्देश्य हो जाता है | उदाहरण के लिए कोई दरिद्रता में मरता है तो वह अगले जन्म में केवल धन को ही महत्व देता है | उसके सारे सम्बन्ध व प्रेम धन पर ही आधारित होते हैं | कोई नेता बनने की अधूरी आस लिए मरता है, तब अगले जन्म में उसका सारा प्रयोजन नेता बनने के लिए ही होता है | वह नेता बनने के लिए किसी भी मर्यादा को तोड़ सकता है |

READ  सेक्स के 10 पॉपुलर मिथ

जीवन का यही वह समय होता है जब आप अपने अगले जन्म को अधिक सकारात्मक बनाने के प्रयोजन भी कर सकते हैं | अभी आप इस समय को यह सोच कर व्यतीत करते हैं कि अब तो उम्र निकल गयी अब क्या फायदा ? लेकिन मैं कहता हूँ कि आप यह मानकर चलिए कि अब तो समय मिला है अगले जन्म को अधिक रचनात्मक बनाने का | आप अधूरी इच्छाओं को पूरी करने में शरीर से चाहे अयोग्य हो चुके हों पर आत्मा तो कभी वृद्ध नहीं होता इसलिए आप स्वयं को दिशा दीजिये कि आप अगले जन्म में क्या करना चाहते हैं और कैसे जीना चाहते हैं | और यह उतना ही सत्य व संभव है जितना कि एंट्रेंस टेस्ट की तैयारी करना या किसी दूसरे शहर में बसने के पूर्व की तैयारी करना |

उदाहरण के लिए इस विडिओ को देखिये और सोचिये कि क्या मेरी बात सही नहीं है ?

हम अपने बच्चों से कहते हैं कि फलां के बच्चे को देखो, वैसा बनो…. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वह पिछले जन्म में क्या बनना चाहता था और आप उसे क्या बनाना चाहते हैं ? कोई बचपन से ही संगीत में रूचि लेता है तो कोई चित्रकला में तो कोई नृत्य में तो कोई पठन-पाठन में या खेल-कूद में | उनकी रूचि को पहचानिए और सहयोगी बनिए उनके पिछले जन्म में देखे स्वप्न को पूरा करने में | उन्होंने आपको अपने माँ-बाप के रूप में चुना क्योंकि उन्हें लगा कि शायद आप योग्य हैं उनके स्वप्नों को पूरा करने में सहयोगी होने के लिए | बच्चों पर अपनी पसंद न थोपें |

READ  इस ब्रहमांड में कई ऐसे रहस्य छुपे हुए हैं जिन्हें खोजना जानना अभी बाकी है

यदि आपके घर में कोई वृद्ध हैं तो उनके उन सपनों को उनके अगले जन्म में साकार करने के लिए उनके सहयोगी बनिए इससे अधिक कोई महान कार्य आप नहीं कर पाएंगे अपने माँ-बाप के लिए इस जीवन में | -विशुद्ध चैतन्य 

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of