रोना धोना मच गया चारों ओर कि धर्म खो गया…

कई हज़ार साल पहले की बात है | चौबे जी के फेसबुक पर एक मेसेज आया कि सनातन धर्म खतरे में है | बस फिर क्या था, चौबे और उनकी पत्नी बच्चों समेत धर्म की रक्षा के लिए घर से बाहर निकल आये | अड़ोसी-पड़ोसियों ने पूछा कि आज सुबह सुबह कहाँ की तैयारी…?

चौबाइन जी ने बहुत ही धीरे से एक पड़ोसन की कान में बोला कि अमेरिका से ओबामा ने इनको मेसेज किया है कि सनातन धर्म खतरे में है… इसलिए हम लोग जा रहें हैं धर्म की रक्षा करने |

बस…. जब तक चौबे जी घर का ताला लगाते बात पूरे गाँव में फ़ैल गई | अब तो जिसको देखो वही अपना सामान बांधे चौबे जी की घर की तरफ लपकने लगा, इससे पहले कि चौबे जी जाकर अपना सनातन धर्म तो सुरक्षित कर पाते | सभी चौबे जी को घेर कर खड़े हो गये | चौबे जी ने बहुत हाथ-पैर जोड़े कि हमें जाने दो… लेकिन भला कौन जाने देता |

आखिर में चौबे जी ने हार मान ली और राज खोला कि हमारा सनातन धर्म खतरे में है यह बात फेसबुक में आई है इसलिए झूठ तो हो ही नहीं सकता | और अब रक्षा करने का एक ही उपाय है अपना अपना धर्म पहाड़ी वाले बाबा के कुटिया के पास जो गड्ढा है उसमें जमा करवा दो | और जैसे ही खतरा टल जाएगा सब जाकर अपना अपना धर्म निकाल लेंगे |

“बहुत सही जा रहे हो भैया !!! हम ही मिले थे बेवकूफ बनाने को ???” भीड़ से किसी की आवाज आई |

“भाई इसमें बेवक़ूफ़ बनाने वाली क्या बात है ?” चौबे जी ने मासूमियत से पूछा |

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“देख लो भाइयो !!! कितना भोला बन रहा है ??? इतनी बड़ी बात हो गई और हमें बताये बिना चुपके से जा रहे थे ! अरे वह तो हमरी लुगाई सयानी निकली जो भेद उगलवा लिया नहीं तो हम तो कहीं के नहीं रह जाते !!! ये अपना धर्म तो बचा लेते और हमें अधर्मी बनता देखकर बाद में हमें ही १०० गुना मुनाफा लगाकर धर्म बेचते !!! हम भी चलेंगे अपना धर्म जमा करवाने |” भीड़ में से किसी ने बोला |

अब आगे आगे चौबे, चौबाइन और उनके बच्चे और पीछे पीछे सारा गाँव अपनी अपनी पोटली लेकर बाबजी के पास पहुंचे |

बाबा जी इतनी भीड़ आता देखकर घबरा गये कि माजरा क्या है ? वे कुछ समझ पाते इससे पहले ही चौबे जी वहाँ पहुँच गए और ओबामा का ख़ास सन्देश भी सुना दिया | बाबा जी की छाती गर्व से चार फीट चौड़ी हो गई कि ओबामा तक फेसबुक में उनको मेसेज कर रहें हैं और वह भी चौबे जी के फोन पर | उन्होंने कहा कि ठीक है सब लोग नाम पता और पहचान लिखकर अपनी अपनी धर्म की पोटली मुझे दे दो मैं उसे तुम लोगों के आँखों के सामने गड्ढे में फेंकूंगा और फिर सभी मिलकर उस गड्ढे को बंद कर देंगे |

सबसे पहले चौबे जी आगे आये और पोटली बाबा को थमाई | बाबा ने पोटली खोलकर देखा तो उसमें सारे कर्मकांड की पुस्तकें, चालीसा, देवी देवताओं की तस्वीरें और पूजन सामग्री भरी पड़ी थी | बाबा ने सभी चीजें देखी और पूछा कि आपने तो कहा था सनातन धर्म खतरे में है, इस पोटली में धर्म कहाँ है ?

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अब चौबे जी का मुँह खुला का खुला रह गया | इतने सालों से एक भी व्रत नहीं छोड़ा कभी पूजा नहीं छोड़ा, लेकिन आज उनकी पोटली में धर्म ही नहीं है | वे कभी अपनी धोती तो कभी कुरता तो कभी चौबाइन का पर्स सभी तलाश लिया लेकिन धर्म नहीं मिला |

बाबा बोले ठीक है बाकी भी जरा अपनी अपनी पोटली चेक कर लो की जिसे बचाने लाये हो वही तो नहीं भूल आये घर पर ? सभी अपनी अपने पोटली टटोल मारी लेकिन धर्म नहीं मिला | रोना धोना मच गया चारों ओर कि धर्म खो गया… सभी गाँव की तरफ वापस भागे और हर कोना और कूआँ छानने लगे…

आज तक ढूंढ रहें हैं वे बेचारे |

नोट: यह सत्यघटना पूरी तरह से काल्पनिक है और इसका किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं है, पूरी तरह अधार्मिक है | -विशुद्ध चैतन्य

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