वर्ण भेद की राजनीति |

ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परन्तप।

कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणैः॥

भावार्थ : हे परंतप! ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्यों के तथा शूद्रों के कर्म स्वभाव से उत्पन्न गुणों द्वारा विभक्त किए गए हैं॥41॥

यदि वर्ण व्यवस्था कर्म आधरित है, तो फिर कोई जन्म से ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र कैसे हुआ ? जबकि वह कार्य तो किसी और वर्ण का कर रहा हो ?

– अपमानित व अनादर करने पर

– खाने-पीने की वस्तु में छुआछूत करने पर

– बेगार या बालश्रम, बंधुआ मजदूरी

– महिला का लैंगिक शोषण करने

– पानी गंदा करने पर

– जमीन पर कब्जा करने

– निवास स्थान छोडऩे को मजबूर करने पर

– मारपीट में विकलांग करने व हत्या होने

– मकान जलाने अथवा रोजगार साधन नष्ट करने पर

नगद राशि के साथ अन्य सुविधाएं

– हरिजन एक्ट के मामले की सुनवाई में तारीख पर आने में यात्रा भत्ता

– भरण पोषण व आहार व्यय

– मृत्यु होने व आशियाना नष्ट होने की दशा में पुनर्वास की सहायता

– मृतक की विधवा अथवा उसकी संतान/आश्रित को 3 माह के अंदर सरकारी या अद्र्ध सरकारी नौकरी

सहायता की प्रक्रिया

– हरिजन एक्ट का प्रकरण दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्रकरण आदिम जाति कल्याण विभाग के पास आता है।

– प्रकरण दर्ज होने पर कुल सहायता की 25 प्रतिशत राशि का चेक दिया जाता है। लेकिन उस चेक को पीडि़त केश नहीं करा सकता है।

– दूसरा चेक 25 फीसदी राशि का न्यायालय में चालान पेश होने के बाद दिया जाता है। इस चेक को भी पीडि़त केश नहीं करा सकता है।

– प्रकरण का निराकरण होने के बाद शेष 50 प्रतिशत राशि का चेक दिया जाता है, जिसमें टीप लगाई जाती है कि पूरी राशि पीडि़त के खाते में भेजी जाए।

उनका कहना है

जबरन बनाते हैं दबाव: एसडीओपी

थाने में शिकायतें तो बहुत आती हैं, लेकिन जांच के बाद ही प्रकरण दर्ज किया जाता है। अधिकांश में विरोधियों को फंसाने अथवा सहायता राशि प्राप्त करने के लिए शिकायतें की जाती हैं। जांच में मामला झूठा होने पर जब हम प्रकरण दर्ज नहीं करते हैं तो कई तरह के दबाव बनाए जाते हैं।

केके व्यास, एसडीओपी, अजाक थाना शिवपुरी

50 फीसदी मामलों में होते हैं दोषमुक्त

हरिजन एक्ट के जितने भी प्रकरण दर्ज होते हैं, उनमें से 50 प्रतिशत मामलों में दोष सिद्ध नहीं होता है। एक मामले में तो बयान पलटने पर महिला न्यायाधीश ने सहायता राशि न देने का आदेश विभाग को दिया था। लेकिन नियमों की वजह से हमें राशि देनी पड़ी। हम लोग तो नियमों से बंधे हुए हैं।

एलआर मीणा, संयोजक, आदिम जाति कल्याण विभाग शिवपुरी

837 total views, 1 views today

The short URL of this article is: https://www.vishuddhablog.com/vblgsYo4

पोस्ट से सम्बंधित आपके विचार ?

Please Login to comment
avatar
  Subscribe  
Notify of