यहाँ कोई न्यूज़ चैनल हिन्दू है तो कोई मुस्लिम कोई सेक्युलर…सनातनी कोई नहीं

भारत के पौराणिक ग्रंथो से जो महत्वपूर्ण बात मैंने समझीं, वह यह कि जो भी सद्पुरुष रहे, धर्मपथ पर रहे, उनका शोषण ही नहीं, नाश ही हुआ अधर्मियों के हाथों | पहले प्राण जाए पर वचन न जाए के सिद्धांत पर चलते थे वीर क्षत्रिय, लेकिन उन्हीं के इस सिद्धांतों से दुष्टों ने लाभ उठाया और कर्ण से लेकर भीष्म तक अपने ही दिए वचनों में बंधकर अपनी ही मूर्खता से कलंकित व दुष्टों के प्रति निष्ठावान रहने के लिए विवश हुए | ऐसी कई कहानियाँ पढ़ने मिल जाती है जिनसे यह पता चलता है कि विवेकहीनता की स्थिति में दिए गये वचनों का दुरूपयोग हुआ जैसे कि राम को वनवास भेजने के लिए कैकई ने दशरथ के दिए वचन का दुरूपयोग किया |

ठीक इसी प्रकार वर्तमान में भी भारत की ‘धर्मनिरपेक्षता’ व ‘सर्वधर्म समभाव’ (जिसे कोई मानता ही नहीं) का दुरूपयोग होता आ रहा है | जैसे मुस्लिमों के देश में दूसरों के लिए कोई स्थान नहीं है, जबकि भारत में सभी मिलजुल कर रह सकते हैं | लेकिन कट्टरपंथी इसी स्वतंत्रता का दुरुपयोग करते हैं, फिर वह हिन्दू हों या मुस्लिम | यहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, इसलिए हर किसी को अपना विरोध करने का अधिकार है… लेकिन इसी स्वतंत्रता का दुरपयोग होता है जब दूसरे सम्प्रदायों के प्रति न केवल ज़हर उगला जाता है, बल्कि सम्पत्ति में तोड़फोड़ से लेकर व्यक्ति की हत्या तक कर दी जा रही |
भारत कि यही उदार संस्कृति न केवल हिन्दूवादी संगठनों को आतंक मचाने कि छूट दे रही है, बल्कि दूसरे धर्मो के अनुयाइयों को भी पूरा अवसर दे रही है उत्पात मचाने के लिए | सरकार व कानून से लेकर मीडिया तक का भेदभाव पूर्ण व्यव्हार, आग में घी डालने का काम कर रहा है | और यह इसलिए क्योंकि न तो मीडिया में समझदार सुलझे हुए लोगों को महत्व दिया जाता है, न शासन-प्रशासन में और न ही न्यायपालिका व पुलिस-प्रशासन में |

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यहाँ कोई न्यूज़ चैनल हिन्दू है तो कोई मुस्लिम कोई सेक्युलर | यहाँ कोई जज/वकील हिन्दू है, कोई मुस्लिम तो कोई सेक्युलर | यहाँ कोई पुलिस अधिकारी हिन्दू है, मुस्लिम है या सेक्युलर | सेक्युलर के मायने भी बदल कर रख दिए भारतियों ने, यहाँ सेक्युलर होने का अर्थ हो गया प्रो-मुस्लिम | यानि मुस्लिमों का हितैषी और हिन्दुओं का शत्रु |

भारत के संविधान की दुर्गति भी बिलकुल वैसे ही हो रही है, जैसे कुरान और इस्लाम की दुर्गति की आइसिस और अलकायदा ने | गीता और वेदों की दुर्गति की संघी-बजरंगियों और हिंदुत्व के ठेकेदारों ने | यानि जो शिक्षा इन पुस्तकों में दी गयी है, बिलकुल उसके विपरीत चले और वह भी यह कह कर कि धर्म की रक्षा कर रहे हैं | यानि अधर्म-पथ को इन्होने धर्म की संज्ञा दे दी |

तो पितामह भीष्म की तरह भारत भी अपनी ही वचनबद्धता व उदारता के कारण बर्बाद होता रहा और आज भी हो रहा है | भेड़ों की भीड़ दाना चुगने में व्यस्त है और भेड़ियों की टोली शिकार करने में | राजा इतना बूढ़ा हो चुका है कि, उसे अपने आसपास बैठे गिद्ध और भेड़ियों को ही अपना हितैषी माने बैठा है | जिस भारत के विद्वान् पूरे विश्व को आपसी भाईचारा, प्रेम व सहयोगिता का पाठ पढ़ाते आये, जो भेदभाव से मुक्त समाज की शिक्षा देते आये, उसी भारत के उत्तराधिकारी, नफरत के बीज बोने के कारोबार में व्यस्त हैं | उसी भारत में लोग अपनी मत, मान्यताओं व काल्पनिक ईश्वरीय किताबों को व्यहारिकता से भी अधिक महत्व देकर अपने दड़बों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं | किसी को राम राज स्थापित करना है भारत में तो किसी को हुसैन या मोहम्मद राह स्थापित करना है, तो किसी को जीसस राष्ट्र स्थापित करना है, तो किसी को विक्टोरिया राज चाहिए, किसी को मुगल राज चाहिए…..आपसी सौहार्द, प्रेम समृद्धि व विकास किसी को नहीं चाहिए | ~विशुद्ध चैतन्य

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