ईश्वर की खोज

ईश्वर का आस्तित्व
स्वामी शिवचैतन्य जी मेरे प्रवचन से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने घोषणा कर दी कि आज से मैं अपने एक मात्र लक्ष्य पर ध्यान दूंगा |
मैंने पूछा, “कौन सा लक्ष्य ?”
“ईश्वर प्राप्ति का… मैंने सन्यास दीक्षा लिया था ईश्वर प्राप्त करने के लिए |” उन्होंने कहा |
आपको तो २०-३० साल हो गये इस फील्ड में, अब तक क्या कर रहे थे ? मैंने पूछा |
“अरे दुनिया भर के चक्कर कर रखा था इन (एडमिन) लोगों ने | एक जगह शान्ति से बैठने ही नहीं देते |”
चलिए कोई बात नहीं, आप सीधे ईश्वर को ही प्राप्त क्यों करना चाहते हैं ? कुछ आसान उपलब्धि पहले क्यों नहीं पा लेते ? मैंने पूछा |
“कौन सी उपलब्धि ?” उन्होंने आश्चर्य और उत्साह से पूछा |
मैंने कहा कि ईश्वर ने दस दिशाएं बनाई है उनमें से किसी भी एक दिशा को चुन लीजिये और उसे प्राप्त करिए | उसके लिए कोई साधना और तपस्या या जाप करने की भी आवश्यकता नहीं है |
वे मेरी शक्ल देखने लग गए | केवल इतना बोले, “समझ गया | आप की बात को पूरी तरह समझ गया |”
स्वामी जी तो समझ गए, अब बताइये कि क्या आप समझे ?

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