युद्ध की जो अफवाहें फैलाई जा रहीं हैं, उनसे सावधान रहें

यह ध्यान रखें, जिस देश के साथ व्यापारिक सम्बन्ध हैं उनसे युद्ध होने की सम्भावना बहुत ही कम होती है | जैसे कि चीन और पाकिस्तान से भारत के व्यापारिक सम्बन्ध | यदि चीन से युद्ध होता है, तो भारत के नगरसेठ सरकार से नाराज हो जायेंगे और सरकार व अन्य राजनैतिक पार्टियों को चंदा मिलना बंद हो जाएगा | इससे सभी राजनैतिक पार्टियाँ भूखों मरने की स्थिति में पहुँच जायेगी |

फिर भारतीय जनता भी चीनी उत्पादों से इतनी जुड़ चुकी है कि चीन से मोबाइल फोन आने बंद हो गये, या अन्य घरेलु जरूरत की चीजें आनी बंद हो गयीं तो जनता परेशान हो जायेगी, क्योंकि भारतीय अभी इतने समृद्ध नहीं हैं कि सस्ते उत्पाद अपने ही देश में बना सकें | फिर भारत एक उपभोक्तावादी देश है और यहाँ की मानसिकता उत्पादन में नहीं, उपभोग में हैं | इसलिए भारतीय वस्त्र उद्योग से लेकर हर प्रकार के शिल्प उद्योगों को आहुति देकर, विदेशों से आयात वस्तु ही खरीदना पसंद करते हैं | कुटीर उद्योग भी यहाँ अपनी अंतिम साँसें गिन रहा है और बड़े बड़े व्यापारिक संस्थान उनकी जगह ले रहे हैं, जो यहाँ लोगों को नौकरी देते हैं, न कि आत्मनिर्भर बनाते हैं |

इसलिए इनके साथ युद्ध की जो अफवाहें फैलाई जा रहीं हैं, उनसे सावधान रहें | वे सीमा में गश्त करते टैंक, वे सैनिकों की घुसपेठ, वे सर्जिकल स्ट्राइक, वे नेताओं के बड़े बड़े बयान, वे एक दूसरों को देख लेने की धमकी…. सब नौटंकी है | इस नौटंकी के पीछे केवल व्यपार चल रहा है हथियारों का और उस व्यापार से देश को कोई लाभ नहीं | क्योंकि वे हथियार पड़े पड़े सड़ जायेंगे साल छः महीने में, फिर पाकिस्तान या चीन कोई धमकी दे देगा और फिर नए हथियार खरीदने पड़ेंगे… इसी प्रकार तीन दशकों से हथियार खरीदे बेचे जा रहे हैं | और जनता समझती है कि ये लोग कोई सचमुच का युद्ध करने जा रहे हैं |

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आप खुद ही सोचिये जिन देशों से अम्बानी अदानी का कारोबार जुड़ा हुआ हो, 4G का सिम भी अपने देश में बना पाने में असमर्थ व्यापारी… अपने देश में मजबूत कील तक बना पाने में असमर्थ व्यापारी, दाल से लेकर प्याज तक विदेशों से आयात करने वाले व्यापारी.. युध्द होने देंगे ? भूखे न मर जायेंगे ये सब ?

जनता चाहे भूखों मर जाए, आदिवासी चाहे बेमौत मारे जाएँ, किसान चाहे आत्महत्या कर लें… नगरसेठों, धन्नासेठों और राजनेताओं को कुछ नहीं होना चाहिए | ~विशुद्ध चैतन्य


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