हर अनपढ़-गंवार ऐसी ही अन्धविश्वास पूर्ण बातें करता है

धर्मों के विशेषज्ञ कहते हैं कि उनका किताबी धर्म वैज्ञानिक आधार पर है | विज्ञान कहता है पहले जानो, अनुभव करो फिर मानो | लेकिन जहाँ धर्म आ जाता है वह कोई जानने के चक्कर में नहीं पड़ता बस मान लेता है | और यदि कोई जानना भी चाहे तो पहले ईश्वरीय किताबें पढ़ो, फिर उनके अनुवाद पढ़ो, फिर उन अनुवाद और अर्थों को समझो | इस प्रकार समझते समझते उम्र निकल जाती है लेकिन समझ में कुछ नहीं आता |

एक उदाहरण लें, जैसे हम पानी पीते हैं तो प्यास बुझती है, और पानी न मिले तो मौत हो जाती है | यह बात हर सनातनी जानता है उसे किसी किताब से समझने की आवश्यकता नहीं होती | लेकिन यदि पढ़े-लिखों को यही बात कही जायेगी तो शायद वे मजाक उड़ायेंगे और कहेंगे, “कैसी अन्धविश्वास वाली बातें कर रहे हो ? अरे कोक और पेप्सी पीने से भी प्यास बुझती है, एक्वा और किनले पीने से भी प्यास बुझती है | जरुरी नहीं है पानी ही पीना है… यह सब उस जमाने की बातें हैं जब लोग अनपढ़ हुआ करते थे और पब्लिक स्कूल, कान्वेंट या मिशनरी स्कूलें नहीं हुआ करतीं थीं |”

यही बात किसी क़ुरान, हदीस या वेद, बाइबल के जानकारों से कही जाए तो कहेंगे, “पहले हमारी ईश्वरीय किताबें पढ़ो तब पता चलेगा सच्चाई का | फलाने ने तो केवल हमारी किताबों की एक दो लाइन ही पढ़ीं थीं और जिंदगी भर उन्हें प्यास ही नहीं लगी | उन्होंने तो हाथ ही नहीं लगाया पानी को…. इसलिए पानी जीवन के लिए जरुरी नहीं है, धर्म ग्रंथों को पढ़ना ज़रूरी है |”

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तो मेरा मानना है कि विज्ञान भी सबका अपना अपना है और ज्ञान भी | जैसे कुछ लोगों का मानना है कि मंदिर-मस्जिद बनाना सबसे बड़ी जरूरत है, तभी देश समृद्ध व खुशहाल होगा | यह उनका ईश्वरीय किताबों पर आधारित वैज्ञानिक धर्म कहता है शायद और उसके अनुयाई मानते हैं | मुझे पूरा विश्वास है कि उन्होंने हजारों वर्षों के अपने प्रयोगों और गणनाओं से यह तथ्य जाना है | तो जाहिर सी बात है कि सही ही कह रहे होंगे क्योंकि विज्ञान तो कभी गलत होता ही नहीं है | और फिर जब धर्म ही विज्ञान पर आधारित हो तो गलत होने का सवाल ही नहीं उठता | शायद यही कारण है कि हमारे देश में बाकी सभी समस्याओं को ताक पर रख दिया गया और मंदिर-मस्जिद का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया |

आप सभी से निवेदन है कि विश्व के जिन भी स्थानों पर मंदिर-मस्जिद, गिरजा-गुरुद्वारा या कोई तीर्थ-स्थान हैं, उनके सर्वे करवाइए और पता लगाइए कि क्या वहां वे सभी समस्याएं दूर हो गयीं, जिन समस्याओं को दूर करने के लिए इनका निर्माण किया जाता है ? यदि आप किसी मंदिर, मस्जिद तीर्थ जा रहे हैं अपनी मनोकामना पूर्ण करवाने के लिए, तो मंदिर के गेट में बैठे भिखारियों से पूछिये कि उन्होंने अपने लिए ईश्वर से भिखारी होने का वरदान ही क्यों माँगा ? पूछिये मंदिर-मस्जिदों और तीर्थों के ठेकेदारों से कि जब उनके ईश्वर उनके दिए टाइमटेबल पर वहाँ आते हैं, तब उन्हें भिखारियों से बचाकर कैसे अंदर लेकर जाते हैं ? क्या उस समय भिखारियों को कहीं और शिफ्ट कर देते हैं ?

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पूछिये उनसे जो मंदिर-मस्जिद के लिए जान लेने-देने पर अड़े हुए हैं कि विश्व में जहां भी ये मंदिर-मस्जिद हैं उस स्थान का विकास कितना हुआ और वहां के लोग कितने समृद्ध हुए | क्या वहां बेरोजगारी, शोषण, अत्याचार, अन्याय दूर हुआ ?

आप सभी लोग पढ़े-लिखे हैं, विद्वान हैं, वैज्ञानिक सोच रखते हैं और विज्ञान पर आधारित धर्मो को मानते हैं इसलिए ही मैंने यह सारे सवाल आप लोगों के सामने रखे | हम तो ठहरे अनपढ़ इसलिए हमारे ईश्वर तो हमारे साथ ही रहते हैं, हमारी तरह ही जीते हैं और जब हम श
रीर छोड़ते हैं तो वही हमे नए शरीर दिलवाते भी हैं | लेकिन मेरी बातों का आप लोग क्यों विश्वास करेंगे भला ? हर अनपढ़-गंवार ऐसी ही अन्धविश्वास पूर्ण बातें करता है, लेकीन मैं नहीं चाहता कि आप लोग मेरी बातों का विश्वास करें और करना भी नहीं चाहिए अनपढ़ों की बातों का विश्वास क्योंकि आप लोग तो पढ़े-लिखे हैं, अंग्रेजी, फारसी, संस्कृत जानते हैं, ईश्वरीय किताबें पढ़ते हैं… | ~विशुद्ध चैतन्य

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