आपसे बेहतर और कौन समझ व समझा सकता है इन सब धार्मिक ग्रंथों को ?


कल मैंने बीबीसी की एक न्यूज़ शेयर किया जिसमें भारत में कहीं स्त्रियों के खतना के विरोध में मुस्लिमों के द्वारा आवाज उठाने का जिक्र था | मुस्लिमों ने मेरे पोस्ट पर उस कुप्रथा का विरोध करने के स्थान पर मुझे ही हदीस और कुरान पढ़ाना शुरू कर दिया | इसी प्रकार जब मैं हिंदुत्व के नाम पर उपद्रव मचा रहे उत्पातियों के विरोध में कुछ लिखता हूँ या किसी कुप्रथा का विरोध करता हूँ तो हिन्दू मुझे वेद और उपनिषद पढ़ाने चले आते हैं |

अरे पढ़े-लिखो !!! मुझ अनपढ़ को ये सब पढ़वाने से क्या लाभ जब आप उनको नहीं पढ़ा और समझा पाए जो उत्पात मचा रहे हैं ? आप साक्षी, प्राची, तोगड़िया को वेद और गीता नहीं समझा पाए और न ही रामायण का मूल भाव समझा पाए, आप आइसिस और ब्रूनेई को क़ुरान और हदीस नहीं समझा पाए…. लेकिन मुझे पढ़ाने चले आते हो ??

मेरे लिए ये सब काला अक्षर भैंस बराबर ही हैं | आप लोग पढ़े-लिखें हैं अंग्रेजी, संस्कृत, फारसी बोलते और समझते हैं…. आपसे बेहतर और कौन समझ व समझा सकता है इन सब धार्मिक ग्रंथों को ? आप लोग पढ़िए और पढ़ाइये उनको जो देश में अराजकता फैला रहे हैं | जो मंदिर-मस्जिद के नाम पर समाज को बाँट रहे हैं | जो देश में फिर से १९४७ करवाने की जुगत लगा रहे हैं…. उनको पढ़ाइये और समझाइये…. मुझे समझाने और पढ़ाने से कोई लाभ नहीं होने वाला |

फिर जब कभी इन सब ग्रंथों को पढ़ने और समझने के बाद समय बचे तब चिंतन मनन कीजियेगा कि समाज में ये आसुरी शक्तियाँ हावी क्यों हैं जब इतने महान और ईश्वरीय ग्रन्थ मौजूद हैं ? कभी चिंतन मनन कीजियेगा कि इतने धार्मिकों के इस देश में होते हुए भी राष्ट्र का मुख्य मुद्दा मंदिर-मस्जिद और मोदी-केजरी ही क्यों हैं ? हमारी चर्चाओं में नेताओं और धर्मों के ठेकेदारों के जानबूझ कर गुमराह करने के लिए दिए जा रहे बयान ही क्यों हैं ? हम इस बात पर चर्चा क्यों नहीं कर पाते कि वनों और कृषि योग्य भूमि को कारखानों और कंक्रीट के जंगलों में बदलने से रोक क्यों नहीं पा रहे | हम किसानों और आदिवासियों के प्रति इतने उदासीन क्यों हो गये हैं ? हम उन्हें हथियार उठाने पर विवश होने क्यों दे रहे हैं ?

READ  "हम दुनिया में किस उद्देश्य से आये हैं ?"

कभी समय मिले तो चिंतन कीजियेगा कि आप सभी का किताबी धर्म क्या मानवता नहीं सिखाता ? क्या आपसी सौहार्द व भाईचारा नहीं सिखाता ? क्या सहयोगिता का भाव नहीं सिखाता ? क्या अपने ही समाज संप्रदाय के दोषों को दूर करना नहीं सिखाता ?

मैं तो ठहरा अनपढ़ और इसलिए किताबी धर्मो से अनजान हूँ इसलिए सनातन धर्म में स्वाभाविक रूप से आ जाता हूँ | बिलकुल वैसे ही जैसे सभी पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, जीव-जंतु…. और वे सभी जिन्होंने धर्मग्रंथों को नहीं पढ़े, वे सनातन धर्मानुसार ही आचरण करते हैं | हमारी तो विवशता है सनातनी होने की क्योंकि हम अनपढ़ हैं, लेकिन आप लोग तो पढ़े-लिखे हैं, अंग्रेजी, संस्कृत, अरबी और फारसी जानते हैं | तो जरा अपनी अपनी ईश्वरीय किताबों को देख कर बताइये कि क्या उसमें यही लिखा है कि नेताओं ने क्या कहा, ठेकेदारों ने क्या कहा, किसने किस पर केस किया, किसने किस को पार्टी से निकाला… इन्हीं सब विषयों पर चर्चा करना ही ईश्वरीय वंदना है ? क्या इन सब पर चर्चा करने से राष्ट्र का विकास हो जाएगा ? क्या इन सब पर चर्चा करने से अम्बानी, अदानी, मोदी, केजरी, साक्षी, प्राची, तोगड़िया, हाफिज सईद, ओवैसी, ब्रूनेई आदि पर कोई फर्क पड़ेगा ? क्या देश का विकास होगा या बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा ? ~विशुद्ध चैतन्य

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of