क्या ये लोग ईसा मसीह के आदर्शों का ही अनुसरण कर रहे हैं ?

यदि नहीं, तो फिर ये लोग ईसाई कैसे हुए है ?

और यदि ये लोग ईसाई नहीं हैं, तो फिर इनको अधिकार कैसे मिला किसी को ईसाइयत के नाम पर धमकी देने का ?

और सबसे बड़ा आश्चर्य यह कि कोई ईसाई संगठन अभी इनको इसाईयत सिखा क्यों नहीं पाया ?

और यही हो रहा है सभी सम्प्रदायों के साथ धर्म के नाम पर | हर कोई अपने-अपने ईष्ट और धर्म के नाम पर अमानवीय कार्यो में लिप्त लोगों से ऑंखें मूँद लेते हैं, लेकिन दूसरों को बताते फिरते हैं कि आपके दड़बे में अत्याचार हो रहा है, हमारा दड़बा ही केवल ईश्वरीय किताबों का अनुसरण करता है | ~विशुद्ध चैतन्य

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