प्रकृति से दूर हो चुके मानवों में यह गुण दुर्लभ होता जा रहा है

एक माँ की ताकत, साहस व आक्रामकता एक प्राकृतिक गुण है | आत्मरक्षा से अधिक अपने बच्चों की रक्षा का यही वह गुण है, जिसके कारण जीवों का आस्तित्व आज भी बना हुआ है | आज भी यह गुण पशुओं में अधिक देखने को मिलता है लेकिन मानवों में कम, क्योंकि मानव अब सभ्य हो चुका है |

आत्मरक्षा व अपने परिवार की रक्षा के लिए एक पशु को पुलिस, या गुंडों-मवालियों की धार्मिक सेना की आवश्यकता नहीं होती, वह तो स्वयं ही सक्षम होते हैं बड़े से बड़े शत्रु से टकराने में | प्रकृति से दूर हो चुके मानवों में यह गुण दुर्लभ होता जा रहा है | मैं इस धर्म को सनातन धर्म का ही मुख्य अंग मानता हूँ ~विशुद्ध चैतन्य

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