हम भारतीय प्राचीन काल से ही हथियारों को अपने साथ रखते आये हैं

मुझपर अक्सर यह आरोप लगता है कि मैं आरएसएस का अंधविरोधी हूँ | जबकि यह गलत है | मैं केवल उनके सिक्के के उस पहलू का विरोधी हूँ जो इस्लाम की नकल पर आधारित है यानि जिसे हम हिंदुत्व के नाम से जानते हैं और जो सनातन धर्म नहीं है |

संघियों को हम अक्सर हथियारों के साथ देखते हैं या हथियारों या लाठी-युद्ध का प्रशिक्षण लेते देखते हैं | अगली बार ये चुनाव जीतते हैं, तो हो सकता है कि एक-४७ के साथ दिखें…. क्योंकि इनका उद्देश्य भारत को पाकिस्तान की नकल बनाना है | यह सपना इनका अधुरा रह गया गांधी जी के वजह से इसलिए गाँधी की हत्या कर दी | अब पूरे असार है कि भारत बिलकुल पाकिस्तान, बांग्लादेश की तरह ही एक कट्टर धार्मिक देश बनेगा और यहाँ भी वही सब होगा जो पाकिस्तान में होता है, ईराक या सीरिया या अन्य इस्लामिक देशों में होता है….. खैर यह सब बताने के लिए यह पोस्ट नहीं था… यह सब तो शास्त्रों के ज्ञाता और धार्मिकों का विषय है… हम ठहरे अनपढ़ सनातनी तो हम तो अपने ही विषय पर लौटते हैं |

तो संघियों को हथियारों के साथ देखकर अक्सर लोग तरह तरह की बातें करते हैं | यह गलत है | हम भारतीय प्राचीन काल से ही हथियारों को अपने साथ रखते आये हैं और रखना भी चाहिए | हमारी शिक्षा में अध्ययन के साथ साथ युद्ध कौशल व शस्त्रकौशल अनिवार्य था जो कि आधुनिक शिक्षा पद्धति में गायब हो चुकी है |

संघियों को कोसने से बेहतर है कि हर माँ बाप अपने स्कूलों पर दबाव बनायें कि संघियों से बेहतर ट्रेनर उपलब्ध करवाएं, मार्शल आर्ट्स के साथ साथ सभी तरह के हथियारों की शिक्षा व उन्हें चलाने में निपुणता को भी शिक्षा में अनिवार्य किया जाए | हर गली मोहल्ले के स्कूलों में यह शिक्षा अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए और इसका इतना प्रचार करना चाहिए कि बच्चे गली में क्रिकेट खेलने के स्थान पर मार्शल आर्ट्स की प्रेक्टिस करते मिलें |

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तब हमें स्वस्थ व जागरूक प्रतिनिधि मिल पायेंगे राष्ट्र के लिए | शायद आपको पता हो कि सोवियत रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी ब्लैक बेल्ट हैं | और यही कारण है कि वे मानसिक रूप से इतने समृद्ध हैं कि कोई भी उद्योगपति उन्हें अपना मार्केटिंग मैनेजर बनाकर दुनिया भर कि सैर नहीं करवा पाता | और न ही कोई उन्हें डरा-धमका पाता है और न ही कोई उन्हें खरीद पाता है जैसे हमारे यहाँ आये दिन चुनावों के बाद नेताओं, विधायकों, सांसदों की सेल लगती है और एक पार्टी दूसरे पार्टियों के नेताओं को खरीदने के लिए मोल-भाव में लगी रहती है | इज़राइल भी इसी प्रकार का देश है और लगभग हर नागरिक युद्ध कौशल में निपुण हैं, अमेरिका में भी दस वर्ष का बच्चा भी हथियार चलाना सीख लेता है |

अपने राष्ट्र को यदि समृद्ध व फिर से गौरवशाली बनाना है और सेक्युलर देश बनाये रखना है, तो संधियों की निंदा छोड़िये और अपने स्कूल के प्रमुखों के पीछे पड़िए कि वे स्कूलों में संघियों से बेहतर प्रशिक्षक उपलब्ध करवाएं | यह सब इसलिए भी आवश्यक है कि जब धार्मिक लोग एक दूसरे की गर्दने उड़ा रहे होंगे, तब कम से कम हमारे बच्चे आत्मरक्षा तो कर पायें | क्योंकि जब भी धार्मिक उन्माद भड़कता है, उस समय स्त्रियों और बच्चों पर ही कहर टूटता है क्योंकि धार्मिक लोग इन्ही पर अपनी मर्दानगी दिखाते हैं | ~विशुद्ध चैतन्य

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