कल संस्कृत के एक विद्वान् ने कहा मुझसे कि संस्कृत तो आती नहीं तुम्हें और सम्प्रदाय को परिभाषित करने निकले हो ? पता भी है तुम्हें कि सम्प्रदाय संस्कृत का शब्द है ? चाहो तो मैं तुम्हें संस्कृत पढ़ा सकता हूँ | मेरा उत्तर था…

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अमेज़न-डॉट-इन पर रिंकी के लिए एक गेंद ऑर्डर किया था, जो कल पहुँचा मेरे पास | यह गेंद मुझे 239/- की पड़ी…मैंने अपने जीवन में इतने महँगे गेंद से कभी नहीं खेला…हमारे ज़माने में पाँच दस रूपये में बढ़िया वाली गेंद आ जाती थी |…

“पूजिए विप्र ज्ञान गुण हीना, शूद्र ना पूजिए ज्ञान प्रवीणा।”-तुलसीदास (रामचरितमानस) आज इन्टरनेट पर तुलसीदास रचित दोहे के इस अंश को खोजा तो पाया कि जितने भी दलित समाज उद्धारक हैं, सभी के पास अलग अलग रामचरितमानस है और सभी में दोहे भी अलग अलग…

अधिकांश साधक त्राटक को मात्र ध्यान की एक विधि समझते हैं | वास्तव में त्राटक एक जीवन शैली है | आइये समझाता हूँ कि कैसे ? सोशल मिडिया आने के बाद से मानव के जीवन में बेचैनी अधिक बढ़ गयी, क्योंकि यहाँ दुनिया भर से…

कभी सोचा है आपने कि आपके चुने हुए नेता का महत्व ही क्या है ? वह होता तो राजनैतिक पार्टियों का सामन्त ही है | उसे पार्टी के अधीन ही रहना है, उसे निर्णय भी वही लेना है जो पार्टी के वरिष्टजन को रुचिकर लगे…

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हर सीजन का अपना महत्व है और उस सीजन से जुड़े त्यौहार या खेलों का अपना महत्व | हर कोई सीजन के त्योहार या खेलों के रंगों में रंगा होता है, हर कोई उसी विषय में चर्चा कर रहा होता है, किसी और विषय में…

राजनैतिक पार्टियाँ जनहितों को ध्यान में रखकर नेता नहीं चुनती, यह देखकर चुनती हैं कि किस नेता से जनता डरती है, किसके पास गुंडे-मवालियों की सेना अधिक है और कौन सा नेता पार्टी को अधिक से अधिक आर्थिक लाभ पहुंचाता है | फिर चाहे वह…

इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि एक सुखी भक्त भक्ति में लीन चला जा रहा है दुनियादारी से बेखबर | उसका सुख यही है कि उसे कमल का फूल वाला कच्छा भेंट कर दिया किसी ने बस वह भक्त बन गया कमल के…

प्रश्न उठता था मन में बार-बार कि लोग बुद्ध, जीसस, महावीर का नहीं, धनानन्द, लुच्चों-लफंगों का अनुसरण करते हैं…लेकिन क्यों ? बरसों तक कारण नहीं समझ में आया लेकिन जब समझ में आया, तब आश्चर्य में पड़ गया | तब पहली बार ज्ञात हुआ कि…

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अर्थात, धर्म की रक्षा करने पर ही सुरक्षित रहोगे | अब चूँकि धर्म के ठेकेदारों, धर्म रक्षकों और कट्टर धार्मिकों को ही धर्म का ज्ञान नहीं, धर्म से परिचय नहीं, इसीलिए धर्म की रक्षा करने की बजाय, सम्प्रदाय, पंथों के विचारधाराओं, मत-मान्यताओं, कर्मकांडों, तिलक-टोपी और…

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society against dharma

समाज या सम्प्रदाय हिन्दू हो, या इस्लामिक, या ईसाई, या सिख, या बौध, या जैन या वामपंथी, या दक्षिणपंथी या भाजपाई, या सपाई या बसपाई या कोंग्रेसी या आपिया या और कोई भी | अधर्म यानि अन्याय, शोषण, अत्याचार, भ्रष्टाचार, अशिष्टता, अभद्रता, दूसरों की संपत्ति…

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“ध्यान का अर्थ होता है : चुप, मौन, कोई विचार नहीं उठता, कोई विचार की तरंग नहीं उठती, झील शांत है..। यह शांत झील वर्तमान से जोड़ देती है। और जो वर्तमान से जुड़ा, वही योगी है। ध्यानी योगी है। और जो वर्तमान से जुड़…