गुल्लू ढोलकिया अपने दोस्तों के साथ दिन भर आवारा गर्दी करता या गाँव के बाहर कि पुलिया में बैठे गप्पे मारता रहता अपने दोस्तों के साथ | सभी गाँव वाले परेशान थे उनसे और समझा समझा कर थक गये कि कभी स्कूल चले जाया करो…

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गुल्लू ढोलकिया अपने दोस्तों के साथ दिन भर आवारा गर्दी करता या गाँव के बाहर कि पुलिया में बैठे गप्पे मारता रहता अपने दोस्तों के साथ | सभी गाँव वाले परेशान थे उनसे और समझा समझा कर थक गये कि कभी स्कूल चले जाया करो…

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गुल्लू ढोलकिया को इतिहास में बहुत ही रूचि थी इसलिए वह बचपन से ड्रैगन, डायनासौर आदि के कॉमिक्स पढ़ता रहता था | जब भी कहीं इतिहास से सम्बंधित कोई बात होती वह बहुत ही ध्यान से सुना करता था | उसके घर में एक पुरानी…

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कई हज़ार साल पुरानी बात है | चुनमुन परदेसी बहुत ही उदास था और बहुत ही गुस्से में भी | लोगों ने कारण पूछा कि क्या हुआ तो वह चिडचिडे अंदाज में बोला, “अरे तुम क्या जानो क्या हुआ, तुम लोग तो नाचो गाओ, ख़ुशी…

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गुल्लू ढोलकिया को इतिहास में बहुत ही रूचि थी इसलिए वह बचपन से ड्रैगन, डायनासौर आदि के कॉमिक्स पढ़ता रहता था | जब भी कहीं इतिहास से सम्बंधित कोई बात होती वह बहुत ही ध्यान से सुना करता था | उसके घर में एक पुरानी…

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कई हज़ार साल पुरानी बात है | चुनमुन परदेसी बहुत ही उदास था और बहुत ही गुस्से में भी | लोगों ने कारण पूछा कि क्या हुआ तो वह चिडचिडे अंदाज में बोला, “अरे तुम क्या जानो क्या हुआ, तुम लोग तो नाचो गाओ, ख़ुशी…

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एक बहुत पुराना वृक्ष था | आकाश में सम्राट की तरह उसके हाथ फैले हुए थे | उस पर फूल और फल आते थे तो दूर-दूर से पक्षी सुगंध लेने आते थे, तितलियाँ मंडराती थीं | उसकी छाया, उसके फैले हाथ हवाओं में, उसका उसका…

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चुन्नुमल घुन्घुनियाँ एक बहुत ही प्रतिष्ठित व्यापारी थे | देश विदेश में उनका व्यापार फैला हुआ था | करोंड़ों का लेन देन चलता था उनका | व्यस्त इतने रहते थे कि आँख खुलते ही काम पर लग जाते और आँख बंद होने तक काम करते…

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एक दिन मुल्ला बगदाद की गलियों से गुजर रहे थे। प्रायः वे गधे पर और वह भी उलटे बैठकर सवारी किया करते थे। और कहने की जरूरत नहीं कि उनका यह तरीका ही लोगों को हंसाने के लिए पर्याप्त था। खैर, उस दिन वे बाजार…

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एक दिन मुल्ला बगदाद की गलियों से गुजर रहे थे। प्रायः वे गधे पर और वह भी उलटे बैठकर सवारी किया करते थे। और कहने की जरूरत नहीं कि उनका यह तरीका ही लोगों को हंसाने के लिए पर्याप्त था। खैर, उस दिन वे बाजार…

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